नई पॉलिसी के लिए ग्राहक से कब मिलें!

नई पॉलिसी के लिए ग्राहक से कब मिलें! 

प्रायः नई पॉलिसी के लिए हम ग्राहक से तभी मिलते हैं जब पुरानी पॉलिसी की किस्ट लेनी होती है यह सही है लेकिन पर्याप्त नहीं है किसी ग्राहक के लिए पुरानी किस्त देते समय नई किस्त भ यदि ग्राहक की उम्र 40 से ज्यादा है तो हर बरस उसके लिए पॉलिसी खरीदना ज्यादा महंगा होता जाएगा 50 की उम्र है तो सालाना प्रीमियम और तेजी से बढ़ेगा दूसरे यदि हम जानते हैं कि ग्राहक की पुरानी पॉलिसी की मैच्योरिटी हो रही है तो हम उसे सुझाव दे सकते हैं कि उस पॉलिसी के बदले में उसे नई पॉलिसी तो लेनी ही चाहिए यदि 20 साल पुरानी पॉलिसी मैच्योर हो रही है तो नई पॉलिसी स्वाभाविक रूप से उससे बड़ी रकम की ही होगी तीसरा ग्राहक के परिवार में लड़के की शादी के बाद बहुत से व्यापारिक लोग घर में सभी सदस्यों की इनकम टैक्स की फाइल बनाकर रखते हैं जब नई बहू घर में आई है तो शादी के कुछ समय बाद भी उसकी फाइल भी बनाएंगे फाइल बनाने का मतलब है कि उस में इनकम टैक्स की प्लानिंग भी होगी और जीवन बीमा की जरूरत भी पड़ेगी चौथा तरीका हो सकता है परिवार में बच्चे के जन्म के बाद पहले कुछ महीनों में बच्चे के नाम का काफी रुपए कट्ठा हो जाता है इस पैसे को हम सेविंग के तरीके से जीवन बीमा में लगवा सकते हैं ध्यान रहे कि बच्चे की पॉलिसी देते समय रिस्क कवर की बात ना करें। यदि घर में लड़की पैदा हुई है तो लोग बचत की ज्यादा जरूरत महसूस करने लगते हैं कभी ऐसे ही बिना किसी विशेष अवसर के भी आप ग्राहक के यहां जा सकते हैं बीमे की बात करने के लिए।

ग्राहक से कहां मिलें?

ग्राहक से हमें कहां मिलना है यह प्रायः वही तय करता है हमें उसी स्थान पर मिलना है जो उसके लिए सुविधाजनक हो फिर भी यदि संभव हो हमारे सामने विकल्प तो हो तो हमें ग्राहक से उसे घर पर ही मिलना चाहिए ग्राहक यदि दुकान दफ्तर होटल में मिलता है तो वहां लोगों का आवागमन बहुत रहता है एक तो ग्राहक की एकाग्रता बार-बार टूटती है दूसरे यह भी हो सकता है कि आप पॉलिसी बता रहे हैं और कोई खामखा सिंह आ गया कि कौन सी पॉलिसी ले रहे हो इससे तो फला कंपनी की पॉलिसी बेहतर है या मेरा एजेंट इससे ज्यादा डिस्काउंट देता है ध्यान रहे कि ग्राहक को पॉलिसी के लिए तैयार करने में महीनों लग सकते हैं पर उसे बिगाड़ने के लिए सिर्फ एक वाक्य ही पर्याप्त है उसी वाक्य से बचने के लिए प्रयास करें कि ग्राहक से उसे घर पर ही मिले जब आप उसके घर पर मिल रहे हो तो वहां दूसरे लोग नहीं आ सकते बस किसी का फोन आ सकता है अब क्योंकि फोन करने वाले को आप दिखाई नहीं दे रहे हो तो आपके बारे में बात होने की संभावना कम है घर पर मिलने में एक लाभ यह भी है कि यदि वह पॉलिसी खरीदने का निर्णय कर ले तो उसके सभी कागज जैसे जन्मतिथि का प्रमाण पत्र फोटो चेक बुक आदि भी वही मिलने की संभावना है। 
जब आप ग्राहक के घर पर बैठ कर बात कर रहे हैं तो आपको शब्दों का प्रयोग सावधानी से करने की जरूरत है। जब उसके बीवी-बच्चे वही आस पास हो तो आप पॉलिसी समझाने के लिए इस तरह के वाक्य प्रयोग नहीं कर सकते कि 'यदि आप मर गए तो परिवार को इतना पैसा मिलेगा'। वहां आपको ज्यादा संवेदनशील होकर बात करने की जरूरत है।

टाइम वैल्यू आफ मनी (Time Value of Money)

टाइम वैल्यू आफ मनी (Time Value of Money)

निवेश जितना जल्दी करेंगे, उतना ही बेहतर रिटर्न मिलेगा, यह बात सब जानते हैं पर प्रायः नजरअंदाज कर देते हैं। एक एजेंट के रूप में हमारा कार्य है कि हम ग्राहक को इस बात का एहसास करवाएं की बीमा पॉलिसी लेने के निर्णय को यदि वह टालता है तो उसकी बहुत बड़ी कीमत है। यदि ग्राहक को यह बात एक सरल उदाहरण से समझाई जाए तो वह बेहतर समझ सकता है।

एक व्यक्ति 30 साल की उम्र में ₹1,00,000 सालाना बचाकर निवेश करना शुरू करता है और 40 की उम्र तक, यानी केवल 10 साल पैसा देता है। यदि ब्याज की दर 9% सालाना मान ली जाए तो 60 साल की उम्र में जब वे रिटायर होगा तो उसे 92,80,000 रुपए मिलेंगे।। दूसरा व्यक्ति देरी से जागता है। वह 40 वर्ष की उम्र में निवेश शुरू करता है और 20 साल तक ₹1,00,000 रूपय सालाना देता है। 9% ब्याज दर पर उसे 60 की उम्र में 55,80,000 ही मिलेंगे।

पहले व्यक्ति ने कुल दस लाख रूपया दिया और दूसरे ने बीस लाख रूपया दिया। फिर भी पहले को दूसरे से बहुत ज्यादा पैसा मिला, क्योंकि उसने 10 साल पहले बचाना शुरू किया। ब्याज की दर दोनों के लिए समान है। इसलिए ग्राहक को समझाना है वह जितनी जल्दी जोड़ना शुरु करेगा, उतना ही लाभ में रहेगा। यदि हम इस प्रयास में सफल रहे तो पॉलिसी टाले जाने की संभावना समाप्त हो जाएगी।

अक्सर हमें लगता है कि यह बहुत सामान्य घटना है और ग्राहक इसे जानता है, परंतु उसे सही वक्त पर यह सब याद दिलाना महत्वपूर्ण हो सकता है।

आप इस पोस्ट में दी गई सूचनाओं को ज्ञान में बदलें। व्यवहार में लाई गई बातें ही आप को लाभ पहुंचा सकती है  सिर्फ पढ़ी गई नहीं। बहुत सफल बीमा एजेंट बनने की हार्दिक शुभकामनाएं!

एम.डी.आर.टी (MDRT)

इसका अर्थ है मिलियन डॉलर राउंड टेबल। यह 1927 में कुछ बीमा एजेंट के द्वारा शुरू किया गया एक प्रयास है जो जीवन बीमा के क्षेत्र में सर्वोच्च सम्मान भी माना जाता है। अमेरिका में मुख्यालय वाली इस संस्था की हर वर्ष एक मीटिंग होती है, जो प्रायः अमेरिका या कनाडा में होती है।  इस मीटिंग में भाग लेने के लिए दुनियाभर के एजेंट्स के लिए मानक यानी क्वालिफाइड कंडीशन तय की जाती है, जो प्रायः हर वर्ष बदल जाती है। यह राशि हर देश में अलग-अलग होती है। उदाहरण के लिए भारत में जो एजेंट 1 जनवरी 2022 से 31 दिसंबर 2022 तक ₹7,95,900 रूपय का कमीशन या 31,83,600 रूपय का प्रीमियम करेगा, वह इसका सदस्य बन सकता है। चीन, जर्मनी और श्रीलंका में यह राशि अलग होती है। 

एमडीआरटी की उपलब्धि की प्रक्रिया को तीन भागों में बांटा जा सकता है। पहला है कि ऊपर दिए गए प्रीमियम या कमीशन को हासिल करना और अपनी बीमा कंपनी से इस बात का प्रमाण पत्र हासिल करना कि आपने यह कर लिया है। 

दूसरा कदम है कि आप अपने आप को एमडीआरटी में रजिस्टर्ड करवाएं। यदि आपने आवश्यक प्रीमियम या कमीशन कर लिया है तो इससे आप एमडीआरटी के सदस्य नहीं बन गए। आपने सिर्फ सदस्य बनने की पात्रता हासिल की है। आपको यह देखना है कि आप आवश्यक फीस देकर अपने आपको एमडीआरटी के सदस्य के रूप में रजिस्टर्ड करवाएं। इसके लिए फीस लगभग ₹30,000 रूपए है।  आप वह फीस देकर अपना रजिस्ट्रेशन करवाकर ही अपने विजिटिंग कार्ड पर एमडीआरटी का प्रतीक चिन्ह (logo) लगा सकते हैं। कुछ बीमा कंपनियां इसके लिए क्वालीफाई करने वाले सभी एजेंट का रजिस्ट्रेशन अपने खर्चे पर भी करवा देती हैं। 

तीसरा कदम है आप वहां जाकर उस सेशन में भाग लें। उसके लिए आपको अलग से फीस चुकानी होगी। एमडीआरटी का नियम है कि आपको इस में भाग लेने के लिए स्वयं ही सारा खर्चा उठाना होगा और बीमा कंपनी उसमें आपको मदद नहीं दे सकती। कुछ बीमा कंपनियां अपने एजेंट को भाग लेने के लिए ब्याज रहित कर्ज दे देती हैं। कुछ और कंपनियां एमडीआरटी की मीटिंग के दिनों में ही ठीक उसी शहर में अपने जेंट्स की मीटिंग रख लेती है, जिससे एजेंट की जेब से हवाई यात्रा का और वहां रहने का खर्चा ना लगे। 79 देशों की 475 कंपनियों से लगभग 35,000 एजेंट रजिस्ट्रेशन करवाते हैं। इनमें से लगभग एक तिहाई महिला एजेंट हैं। सबसे ज्यादा लगभग 10,000 एजेंट अमेरिका से ही होते हैं। 

इसके बाद भारत का नंबर है जिसके 6000 से ज्यादा एजेंट रजिस्ट्रेशन करवाते हैं और यह आंकड़ा हर वर्ष बढ़ता ही जा रहा है। इन 35,000 एजेंट्स में से लगभग 6000 एजेंट सेशन में भाग लेने के लिए वहां पहुंचते हैं। 
निर्धारित प्रीमियम या कमीशन से 3 गुना कमाने वाले एजेंट को कोर्ट ऑफ द टेबल यानि सीओटी कहा जाता है। उसका भी दुगना करने वाले एजेंट को टॉप ऑफ द टेबल कहा जाता है, यानि टीओटी। 35,000 एमडीआरटी एजेंट्स में 4,300 सीओटी और 1600 टीओटी होते हैं। 

एमडीआरटी एजेंट बनने का लाभ यह है कि आपका स्तर प्रमाणित हो गया। यह मान लिया गया कि आप बाकी एजेंट से बहुत ही बड़े और ऊंचे स्तर के एजेंट हैं। इसका लाभ तभी होगा जब आप अपने नाम का रजिस्ट्रेशन करवाएं। पूरा लाभ तब होगा जब आप इस मीटिंग में भाग लेने के लिए जाएं। मेरा मानना है कि इस तरह की मीटिंग में भाग लेने से दो तरह के लाभ होते हैं। पहला तो वह सब बातें जो वहां मंच से अपन-अपने क्षेत्र के विश्व प्रसिद्ध लोगों के द्वारा कही जाती हैं। दूसरे यह कि आप दुनिया के सबसे सफल बीमा एजेंट से मिलते हैं। आपको वहां वह सब जानने का अवसर मिलता है जो आप नहीं जान सकते। सफल लोगों से मिलना अपने आप में एक उपलब्धि की तरह होता है। वहां सब एक दूसरे से सीखते हैं।

पॉलिसी बेचने के अन्य तरीके

ग्रुप प्रेजेंटेशन

प्रायः बीमा एजेंट एक बार में एक ग्राहक से ही बात करता है पॉलिसी समझाने के लिए। एक बार में 1 से ज्यादा ग्राहकों को पॉलिसी समझाने का नाम है ग्रुप प्रेजेंटेशन। इसमें एजेंट एक ग्रुप के लोगों से इकट्ठे बात करता है। प्रायः यह ग्रुप एक ही तरह के लोगों का होता है, जैसे एक कंपनी में काम करने वाले लोग, एक ही स्कूल के अध्यापक, सुबह एक साथ सैर करने वाले लोग, छोटे बच्चों के माता-पिता, आदि। 

ग्रुप में जन टेशन बहुत ही कामयाब तरीका है, कम समय में ज्यादा पॉलिसी बेचने का। इसलिए जरूरी है कि इसका अधिकतम लाभ उठाने की विधि सीखी जाए। पहला ध्यान तो यह रखें कि ग्रुप बहुत ही बड़ा ना हो। आपका लक्ष्य पॉलिसी बेचने का है, ज्ञान बांटने का नहीं। यदि ग्रुप में बहुत ज्यादा लोग होंगे तो आपका प्रेजेंटेशन एक प्रवचन के तरीके से रहेगा, जिसे लोग सुन कर चल देंगे। ग्रुप में 20 से ज्यादा लोग ना हो तो बेहतर है। इतने से लोगों के बीच में आप आपसी बातचीत का सा माहौल बना सकते हैं। आप लोगों की भावनाओं को समझ सकते हैं, अपनी बातचीत को उनके मूड के हिसाब से बदल सकते हैं, सवाल-जवाब कर सकते हैं और उनके साथ बेहतर तरीके से जुड़ सकते हैं।  

ग्रुप प्रेजेंटेशन के बाद लोगों से एक फीडबैक फॉर्म जरूर भरवाएं जिसमें उनका नाम, पता, फोन नंबर रहे, जिससे आप बाद में उनसे बात कर सकें। ध्यान रहे कि ग्रुप प्रेजेंटेशन में पॉलिसी नहीं बेची जा सकती है, सिर्फ लोगों की रुचि आपकी पॉलिसी की और बनाई जा सकती है। पॉलिसी बेचने के लिए तो आपको बाद में ही लोगों से एक-एक करके मिलना होगा और उनकी व्यक्तिगत जरूरत के हिसाब से पॉलिसी समझानी होगी। इसलिए ग्रुप प्रेजेंटेशन में अत्यंत महत्वपूर्ण है बाद में ग्राहकों से मिलना। अपने सेशन के बाद आप लोगों से फीडबैक लेते समय उन्हें अपना विजिटिंग कार्ड और अपने प्लान के ब्रोशर दे सकते हैं। आप सेशन में बहुत सारी चीजें ग्राहकों को नहीं समझा सकते हैं। आपको यह देखना है कि ऐसी क्या बातें हैं जिसमें सामने बैठे लोगों में से अधिकांश की रुचि हो। आप इनकम टैक्स की बचत की बात कर सकते हैं, पेंशन प्लान की बात कर सकते हैं, बच्चों के लिए सेविंग की बात कर सकते हैं, आप रिस्क कवर पर फोकस करके बड़े टर्म प्लान की बात कर सकते हैं, आदि। आपको एक कॉमन मुद्दा खोजना होगा, जिससे सब लोग आपकी बात को उत्साह से सुनें। 

एक बात और है जो आपके ग्रुप प्रेजेंटेशन को ज्यादा कारगर बना सकती है। जो भी व्यक्ति आपको उस ग्रुप से मिलवा रहा है या ग्रुप प्रेजेंटेशन का मौका दिलवा रहा है,  उसे आप सबसे पहले अकेले में ही पॉलिसी समझाएं और बेचने का प्रयास करें। फिर आप उस के माध्यम से एक-दो उसके नजदीकी मित्रों को प्लान बेचें। प्रयास यह करें कि आप उस ग्रुप के मुखिया अथवा वहां के किसी अन्य प्रभावशाली अधिकारी को पहले अकेले में पॉलिसी बेचें। इसके बाद जब आप ग्रुप प्रेजेंटेशन करेंगे तो आपको लाभ यह रहेगा कि यदि सामूहिक निर्णय में किसी ने भी पॉलिसी नहीं ली तो आप कुछ पॉलिसी तो वहां बेच ही चुके हैं।  दूसरे उस ग्रुप प्रेजेंटेशन में आप उस मुख्य अधिकारी को, जिसको आप ग्राहक बना चुके हैं, उसका नाम प्रयोग कर सकते हैं कि झा साहब ने भी हमारी पॉलिसी में विश्वास जताया है और वह हमारे ग्राहक हैं। बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो उस अधिकारी की निर्णय क्षमता के कायल होते हैं और इसीलिए पॉलिसी लेने को तैयार हो जाएंगे कि झा साहब ग्राहक बन गए हैं तो इनका प्लान और कंपनी अच्छे ही होंगे। यहां ध्यान यह रखना है कि आप ग्रुप प्रेजेंटेशन या बाद में झा साहब की ली हुई पॉलिसी या उनकी व्यक्तिगत जानकारी का खुलासा दूसरों के सामने ना करें।  

कैनोपी 

कैनोपी या स्टाल या इंफॉर्मेशन डेस्क का उपयोग होता है, नय ग्राहकों की खोज करना। इसके लिए किसी खास अवसर पर स्टाल लगाया जा सकता है,  जैसे दिवाली मेला, नवरात्रि, दुर्गा पूजा, किसी स्कूल में लगने वाला फेस्टिवल, आदि कोई भी ऐसा स्थाई अवसर जहां लोग ज्यादा जुड रहे हों। यह कुछ घंटे से लेकर दो-तीन दिन तक का हो सकता है। इसके अलावा किसी थाई स्थायी स्थान जैसे बाजार, पार्क, मॉल, चौराहे आदि पर भी थोड़े समय के लिए लगाया जा सकता है। 

कैनोपी लगाते समय भी ध्यान रहे कि यहां आप पॉलिसी बेच नहीं सकते हैं, सिर्फ संभावित ग्राहकों के नाम और फोन नंबर इकट्ठे कर सकते हैं, जिससे ग्राहकों से बाद में मिल सकें। कोई भी ग्राहक अपने जेब में प्रीमियम का चैक, फोटो, आमदनी का प्रूफ, आयु प्रमाण पत्र लेकर नहीं घूमता है। यदि आप ग्राहक की रुचि जगा पाएं तो वह आपको मिलने का अवसर देगा जहां आप उसकी जरूरत के अनुसार उसे पॉलिसी बता सकते हैं। यदि स्टॉल पर एक लैपटॉप हो तो ठीक रहेगा जहां आप लोगों को कुछ बेसिक चीजें दिखा सकें। आप स्टॉल पर आने वाले हर ग्राहक को अपना विजिटिंग कार्ड अवश्य दें। 

कैनोपी लगाते समय एक से अधिक लोग साथ हों तो बेहतर रहेगा। आपके पास एक बार में एक से ज्यादा संभावित ग्राहक भी आ सकते हैं, दूसरे कुछ लोगों को आपको अपने आप बोल कर अपनी स्टाल की ओर आकर्षित करना होगा। इसलिए कम से कम 2 लोग तो स्टाल पर होने ही चाहियें।वहां एक विजिटर रजिस्टर भी रखना होगा, जिसमें हर आने वाले आदमी का नाम और फोन नंबर आप लिख सकें या ग्राहक से ही लिखवा सकें। प्रयास करें कि आप ग्राहक से उसका विजिटिंग कार्ड ले लें जिसमें उसका पूरा पता, पद, फोन नंबर और ईमेल का पता हो सकता है। 

इस तरह से एकत्र किए गए लोगों के नाम पते प्रायः जहां आपने स्टाल लगाया है,  उसके आस पास के ही होंगे आपको चाहिए कि इन सब लोगों से एक-दो दिन के अंदर ही संपर्क स्थापित कर उनसे मिलें। 

वैसे यह स्टाल लगाने का काम उन्हीं एजेंट्स को करना चाहिए जिनका व्यक्तिगत संपर्क का दायरा सीमित हो। दूसरे शब्दों में वे एजेंट जिनके पास बीमा बेचने का समय तो बहुत हो पर मिलने वाले लोग ना हों। 

अपने मैनेजर से ग्राहकों को पत्र लिखवाएं 

बाजार में एक एजेंट के रूप में आपकी इमेज जितनी अच्छी होगी, कामयाबी की उतनी ही संभावना बढ़ेगी। एक प्रोफेशनल और कामयाब एजेंट की इमेज बनाने के लिए आप बाकी बातों के अलावा एक काम और भी कर सकते हैं। आपने यदि ब्रांच में या अपनी कंपनी में कोई कामयाबी हासिल की है तो आप उसका लाभ ले सकते हैं। आप अपने मैनेजर से कह कर अपने ग्राहकों को एक पत्र लिखवाएं कि उनके सहयोग से आपने यह उपलब्धि हासिल की है। जब आप के ग्राहकों को इस बात का एहसास होता है कि उनका एजेंट एक कामयाब एजेंट है तो आपको उनसे बिजनेस मिलने की संभावना और बढ़ जाती है। 

ध्यान रहे कि यह पत्र बहुत बड़ा नहीं होना चाहिए। मान लीजिए आपने किसी महीने अपनी ब्रांच में बहुत बढ़िया बिजनेस किया। अब इस पत्र की भाषा कुछ इस तरह से हो सकती है हमारे एजेंट श्री विनय प्रसाद को सहयोग करने के लिए धन्यवाद आपके सक्रिय सहयोग से पिछले माह वह हमारी ब्रांच के टॉप टेन में से एक थे। आशा है आप अपना सहयोग बनाए रखेंगे। 

(ब्रांच मैनेजर)

रिकार्ड कीपिंग

यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण काम है। आप जितनी भी पॉलिसी बेच रहे हैं, उन सब का रिकॉर्ड आपके पास होना चाहिए। रिकॉर्ड से मतलब यह नहीं है कि किस ग्राहक का कौन सा पॉलिसी नंबर था। आपको पता होना चाहिए कि ग्राहक कि उस समय फैमिली हिस्ट्री क्या थी, ऊंचाई और वजन कितना था, आमदनी कितनी थी, वगैरह। साथ ही ग्राहक के हस्ताक्षर का नमूना। कभी ऐसा भी हो सकता है कि 10 साल के बाद ग्राहक भूल जाए कि उसने अंग्रेजी में साइन किए थे या हिंदी में। यदि आप ग्राहक के प्रपोजल फॉर्म की फोटो कॉपी रख पाए तो बहुत उपयुक्त होगा। 

इस सब जानकारी से आपको एक तो लाभ यह होगा कि आप ग्राहक को उसके और उसके बच्चों के जन्मदिन की शुभकामनाएं दे सकते हैं, यदि वह दूसरी पॉलिसी खरीद रहा है और सूचना, अंदाजे से ही दे रहा है तो आप जांच सकते हैं, इससे पहले कि कंपनी का अंडरराइटर नई पुरानी पॉलिसी की सूचना मे विरोधाभास देखकर पॉलिसी नकार दें। 

आपके पास यह भी रिकॉर्ड रहेगा कि कौन ईपॉलिसी कब मैच्योर हो रही है, किसका मनी बैक कब आना है ग्राहक का अता पता और फोन नंबर तो उसमें रहेगा ही। साथ ही यदि कंपनी ने पॉलिसी में कोई गलती कर दी तो आप कंपनी को सबूत दिखा सकते हैं कि आपने तो सब ठीक ही लिखा था। एक और महत्वपूर्ण लाभ यह है कि आपको नई पॉलिसी लेते समय ग्राहक से बहुत कम सूचनाएं चाहिए। पुराने फार्म से बहुत ही सूचना मिल जाएगी यह काम ऐसा ही होगा कि किसी टेलर के पास आपको माप दे रखा है आप जाकर सिर्फ कपड़ा दे आते हो शर्ट की सिलाई करने के लिए। 

अनेक एजेंट 20 साल तक भी ग्राहक की डिटेल संभाल कर रखते हैं यदि आप उनमें से हैं तो आपके ग्राहक को विश्वास भी है कि आप वह प्रोफेशनल एजेंट है जो आजीवन इसी काम में रहने के लिए आए हैं।

टाइम मैनेजमैंट (Time Management)

ईश्वर ने हम सभी को अलग-अलग क्षमताएं दी हैं। अलग-अलग शारीरिक बल  बुद्धि का स्तर, धन, परिवार की इज्जत, पड़ोसी, ऊंचे तबके के लोगों से संबंध, आदि सब चीजें हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग हैं। एक ही चीज ऐसी है जो दुनिया के हर आदमी को, चपरासी से लेकर प्रधानमंत्री तक को बराबर मिली है। वह है समय। हर किसी के पास दिन में 24 घंटे ही हैं। किसी भी आदमी की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह इस समय का उपयोग कैसे करता है। बीमा एजेंट के रूप में मिलने वाली सफलता भी इससे अलग नहीं है। 

प्रसिद्ध लेखक स्टीवन को वे अपनी पुस्तक "सेवन हैबिट्स आफ हाईली सक्सेसफुल पीपल" में लिखते हैं कि हर आदमी के कार्यकलापों को चार भागों में बांटा जा सकता है।

अर्जेंट नहीं, महत्वपूर्ण नहीं

ये वे काम हैं जो ना हमारे लिए अर्जेंट हैं, ना ही महत्वपूर्ण। इनको यदि नहीं किया जाए तो हमारा किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होगा। यह काम टाइम पास करने वाले काम हैं। कहीं खाली बैठे हैं, टीवी चल रहा है बस, बिना किसी मकसद के उसे देख रहे हैं, दूसरे मनोरंजन के साधन, किसी का अचानक फोन आ जाना और उसका हमें ऐसा काम बताना जिससे हमारा कोई सरोकार नहीं है, कोई झगड़ा जिसमें हम बेकार ही समय नष्ट कर रहे हैं, कोई ऐसा आदमी आकर बैठ गया जो आपका समय खराब कर रहा है और जिसे आप जाने के लिए नहीं कह सकते। 

किसी भी कामयाब आदमी को चाहिए कि वह अपने समय का कम से कम हिस्सा इस तरह की गतिविधियों में जाने दे। एक बीमा एजेंट को चाहिए कि वह समय की अहमियत को समझे और ब्रांच में खाली बैठकर या बिना किसी उद्देश्य के घूम फिरकर अपने कीमती समय को व्यर्थ ना गवाएं। यदि बैठना भी हो तो किसी कामयाब एजेंट या मैनेजर के पास बैठें, जिससे कुछ लाभ मिल सके।

अर्जेंट है, महत्वपूर्ण नहीं

दूसरी श्रेणी उन कामों की है जो जरूरी तो है लेकिन उनमें लगना मेरे किसी फायदे का नही है, यानी मेरे लिए महत्वपूर्ण नहीं है। यह वह काम है जो किसी मुख्य काम में व्यवधान के रूप में आते हैं, जैसे अचानक कोई मिलने के लिए आ जाए, कोई मीटिंग बुला ली जाए, जिसे आप मना ना कर सकें, कोई रिपोर्ट अचानक बनाकर भेजनी है, आदि। 

प्रायः ऐसे काम कार्यालय में काम करने वाले लोगों के होते हैं, जिन्हें कम से कम करने का प्रयास करना चाहिए। समस्या यह है कि ये सभी काम किसी और के द्वारा हम पर थोपे हुए होते हैं इसलिए हमारा इन पर नियंत्रण कम होता है। एक एजेंट के लिए इस तरह के काम हो सकते हैं कि अचानक किसी ग्राहक का फोन आ गया कि उसे आज ही इनकम टैक्स की रिटर्न भरनी है और बीमे की रसीद नहीं मिल रही। अब तुरंत आपको डुप्लीकेट रसीद तैयार करनी पड़ेगी। एक जनरल बीमा का एजेंट किसी जरूरी सेल्स कॉल पर जा रहा है और किसी ग्राहक का फोन आ गया कि उसकी कार का एक्सीडेंट हो गया है, आप तुरंत उसकी मदद करें। जितना ज्यादा समय इन कामों में जाएगा, उतना ही सार्थक कामों में कम जाएगा।

अर्जेंट है, महत्वपूर्ण है

यह वे सभी काम हैं जिनको करना तुरंत जरूरी है और वे महत्वपूर्ण भी हैं। इनमें वे काम गिनें जा सकते हैं जो एक निश्चित तिथि तक ही पूरे करने हैं और वह तिथि आ गई है। किसी ग्राहक की किस्त आपको आज लेनी थी, ना जमा होने पर पॉलिसी लैप्स हो जाएगी। आपको एक क्लब मेंबरशिप करनी थी, 10 पॉलिसी करनी अभी रहती है और दो ही दिन बचे हैं। आपको किसी ग्राहक को उसकी रसीद देनी थी, आप समय पर दे नहीं पाए, अब उसे रसीद पहुंचाने के लिए स्पैशली उनके घर जाना पड़ेगा। यह वह काम है जो आप चाहते तो पहले कर सकते थे, परंतु समय पर ना किए जाने से वे अर्जेंट हो गए हैं। 

जो लोग इस तरह से काम करते हैं वह बहुत ही दबाव में काम करते हैं। अंतिम समय में काम करने से गलतियां करते हैं, खर्च ज्यादा करते हैं, तनाव भी झेलते हैं, और सफलता की संभावना उतनी ही कम कर लेते हैं। आखिरी दिन बिजली का बिल भरने के लिए लाइन में लगना या रेलगाड़ी पकड़ने के लिए घर से देरी से निकलना इसी तरह के कुछ उदाहरण हो सकते हैं।

अर्जेंट नहीं, महत्वपूर्ण है

यह वे काम है जो हमारे लिए बहुत मायने रखते हैं, पर अभी जरूरी नहीं हैं। काम का महत्व है, पर उसे तभी कर लिया गया जब वह एकदम अर्जेंट नहीं हो गया। यह वह काम हैं जो समय रहते नहीं किए जाते तो अर्जेंट वाली श्रेणी में चले जाते, एमरजेंसी बन जाते। यदि टेलीफोन का बिल भरना है, अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना आपने भर दिया तो वह इस श्रेणी में है, अंतिम तिथि तक रुके रहे तो वह जरूरी हो जाएगा, जिस पर आपको ज्यादा भागदौड़ करनी है, जुर्माना देना है। यदि क्लब मेंबरशिप करनी है तो पहले से ही प्लानिंग है कि कितना बिजनेस किस महीने करना है, कितना प्रीमियम कहां से लेना है, कितने नए ग्राहकों से मिलना है, किससे रेफरेंस लेना है, किससे कब मनी बैक का फॉर्म भरकर मंगवाना है, आदि। 

ये सभी विकास के काम होते हैं, जैसे आप बीमार होने से पहले ही स्वास्थ्य का ध्यान रख रहे हो। यह करने से एमरजेंसी की स्थिति से बचाव होता है। इसमें प्लानिंग का काम है, नई संभावनाएं खोजने का काम है। इसलिए सफल लोग इस श्रेणी में ज्यादा से ज्यादा काम करते हैं। 

बीमा एजेंट इसके अलावा जो टाइम मैनेजमेंट कर सकता है, वह है एक निश्चित इलाके में ही पॉलिसी बेचना। यदि आप दिल्ली, मुंबई जैसे महानगर में रहते हैं और आपने इस तरह से पॉलिसी बेच रखी है कि आपका एक ग्राहक दूसरे ग्राहक से 30 किलोमीटर की दूरी पर है, तो आपको ज्यादा समय सड़क पर ही गुजारना पड़ेगा। यदि एक ग्राहक से मिलने जाने के लिए आपको 1 घंटे से ज्यादा का समय लगता है तो इसका अर्थ है कि आपको नया बिजनेस करने के लिए कम से कम समय मिल रहा है। आपका ज्यादा समय तो पॉलिसी की सर्विसिंग में ही जा रहा है, और बहुत सा खर्च भी। 

आपको तय कर लेना चाहिए कि आप एक निश्चित एरिया में ही पॉलिसी बेचेंगे। इससे बाहर आप तभी निकलेंगे जब आपको बहुत बड़ी पॉलिसी मिलने की आशा हो या एक ही जगह से बहुत सी पॉलिसी मिलने वाली हों। ऐसा करने से आप एक ही दिन में अनेक ग्राहकों से मिल सकते हो, नई पॉलिसी के लिए भी और सर्विसिंग के लिए भी। 

टाइम मैनेजमेंट के लिए एक और साधन भी आप अपना सकते हैं। अक्सर बीमा एजेंट को ग्राहक का इंतजार करना पड़ता है, उसके घर या दफ्तर में पहुंचकर इस खाली समय को आप अपनी प्लानिंग करने के लिए, मिलने वाले लोगों की लिस्ट बनाने के लिए, दूसरे कोई और नोट्स बनाने के लिए उपयोग कर सकते हो। इस दौरान आप अपने प्लान के ब्रॉशर या रेडी रेकनर के शुरू वाले पेज पढ़ सकते हो। यह वह समय होता है जब आप कुछ और नहीं कर सकते। इस तरह से आप समय का सदुपयोग भी करेंगे और आपकी बोरियत भी कम होगी।

रिबेट (Rebate)

रिबेट का अर्थ है एजेंट का आपने कमीशन में से एक हिस्सा ग्राहक को देना यह जीवन बीमा के लिए एक खून की तरह है और बहुत ही विवाद का विषय है कानूनन रिबेट लेना और देना दोनों ही अपराध है रिबेट लेने और देने वाले दोनों ही पक्ष के लोगों का स्वार्थ इस से जुड़ा होता है इसलिए कोई इसकी शिकायत नहीं करता है और यह प्रैक्टिस चलती रहती है पहली बात तो यह है कि रिबेट देना या ना देना आपका अपना निर्णय है किसी और का इसमें दखल नहीं हो सकता यह किसी भी और चीज में डिस्काउंट देने जैसा ही है यह बात तय है कि जो दुकानदार कम डिस्काउंट देकर समान बेचता है वह बाकी दुकानदारों से अलग कुछ सेवा ग्राहकों को देता है जो दूसरे दुकानदार नहीं देते उसकी दुकान पर वैरायटी ज्यादा होगी सेल्समैन पढ़े लिखे होंगे सामान घर तक छुड़वाने की सुविधा होगी क्रेडिट कार्ड भी स्वीकार करता होगा सामान में शिकायत आने पर उसे बदलने में आनाकानी नहीं करेगा आदि आप यदि बिना रैबिट के या कम से कम रेबेट के पॉलिसी बेचना चाहते हैं तो आप अपने अंदर झांक कर देखें कि आप ग्राहक को क्या अलग सर्विस दे रहे हैं जो दूसरे एजेंट नहीं दे रहे हैं क्या आप ज्यादा प्रोफेशनल एजेंट हैं आपकी बीमा के बारे में जानकारी ज्यादा है आपका व्यक्तित्व ज्यादा प्रभावशाली है आप सिर्फ एक पॉलिसी ना बता कर ग्राहक की फाइनेंसियल प्लानिंग कर रहे हैं आप इनकम टैक्स के नियम और दूसरे फाइनेंशियल प्रोडक्ट के बारे में दूसरे एजेंट से ज्यादा जानते हैं आपके पास ग्राहक की पुरानी सब पॉलिसी का रिकॉर्ड है क्या आप लैपटॉप साथ लेकर चलते हैं क्या आप ग्राहक को पहले 1 मिनट में प्रभावित कर सकते हैं यदि आप इन सब मायनों में बाकी एजेंट से अलग है और ग्राहक भी इस बात का अनुभव कर रहा है तो रिबेट का मुद्दा आपकी पॉलिसी के आड़े नहीं आएगा अक्सर समस्या यही रहती है कि हम अपने आपको बाकी एजेंट से अलग नहीं साबित कर पाते और ग्राहक के पास हमें तोलने का एक ही नजरिया रहता है कि हम रिबेट कितनी दे रहे हैं एक उदाहरण ने यदि आपको अपने घर में पेंट करवाना हो तो आप मिस्त्री तलाशने के लिए कहां जाएंगे हर नगर में एक ऐसा चौराहा या बाजार होता है जहां हर सुबह सब मिस्त्री लोग इकट्ठे होते हैं आपके नगर में ऐसी जो भी जगह है आप वही जाएंगे और जो भी सबसे कम रेट मांग रहा है उसे ले आएंगे अपने घर वहां जो भी मिस्त्री खड़ा है वह सिर्फ रेट पर ही बिकता है उसके काम की क्वालिटी हमें मालूम नहीं है अब यदि आपको एक बढ़िया मिस्त्री खोजना है क्योंकि आप की कोठी बहुत महंगी है पेंट भी महंगा ही करवाना है तो कोई भी मिस्त्री नहीं चलेगा आपको मालूम है कि नगर में लालचंद नाम का मिस्त्री बहुत ही बढ़िया है आप उसे खोजते हुए पहुंचते हो और वह कहता है कि 1 महीने तक वह व्यस्त है उसके बाद ही वह आपकी कोठी पर आ सकता है क्या आप उससे यह उम्मीद करेंगे कि वह सबसे सस्ता भी होगा आपके लिए चुनौती यही है कि आप अपने आप को बेहतर दूसरों से अलग एजेंट साबित करें जिससे रिबेट का मुद्दा बहुत बड़ा होकर सामने ना आए यदि आप भीड़ के हिस्से वाले एजेंट है तो आपका मूल्यांकन ऐसे ही होगा कि आप कितनी ज्यादा से ज्यादा रिबेट दे सकते हैं बैंक से मुकाबला आजकल प्रायः सभी बैंक किसी ना किसी कंपनी का बीमा भेजते हैं बैंक में घुसने वाले हर ग्राहक को यह अंदेशा रहता है कि अभी कोई आकर उससे बीमे की बात करेगा यदि आपका कोई ग्राहक बैंक से बीमा लेने की प्लानिंग कर रहा है तो आप उसे समझा सकते हैं कि बैंक में जो अधिकारी आज आपको बीमा बेच रहा है वह पॉलिसी के मैच्योरिटी के समय यहां नहीं होगा और जब वह यहां भी आपकी पॉलिसी की सर्विसिंग जैसे की किस्त जमा करवाना रसीद पहुंचाना लोन दिलवा ना फंड बदलना आदि किसी भी काम में उसकी कोई भूमिका है ही नहीं उसका काम है सिर्फ आपको पॉलिसी बेचना और एक और हो जाना आप ग्राहक से पूछे कि क्या वह चाहेगा कि एक बार पॉलिसी लेने के बाद अगले 10 साल तक पॉलिसी का सारा ध्यान उसे ही रखना पड़े या फिर आप जैसे किसी प्रोफेशनल एजेंट से पॉलिसी ले और सदा के लिए निश्चिंत हो जाए बैंक के लोग यह कहकर पॉलिसी बेचते हैं कि अकेला एजेंट तो पता नहीं कब तक एजेंसी चलाएगा पर बैंक तो सदा यही बना रहेगा आप ग्राहक को बताएं कि पॉलिसी की सर्विस बैंक ने नहीं बल्कि बैंक के लोगों ने देनी है 5 साल बाद वहां बैठे मैनेजर की रुचि इस बात में क्यों होगी कि वह आपकी पॉलिसी का ध्यान रखें बैंक हमेशा सर्विसिंग की बात आते ही ग्राहक को बीमा कंपनी के दफ्तर में भेजता भेज देता है। आपकी व्यक्तिगत सेवाओं में और बैंक की सेवा में बहुत अंतर है, ग्राहक को इस बात का एहसास करवाएं।

कुछ भी आपत्ति से परे नही है

कुछ बीमा एजेंटों की शिकायत यह रहती है कि बीमा खरीदते समय लोग बहुत से सवाल पूछते हैं और बहुत सारे ऑब्जेक्शन खड़े करते हैं यह एक सामान्य बात है वास्तव में यदि आप देखें तो दुनिया में कुछ भी बेचना आपत्ति से परे नहीं है यानी ऐसा कोई भी बिक्री नहीं होती है जिसमें सवाल खड़े ना किए जा सकें इसे एक उदाहरण से समझें यदि आप एक कार के सेल्समैन है तो आप देखेंगे कि ग्राहक ऐसी कार खरीदना चाहेंगे जो देखने में बहुत खूबसूरत हो सकती हो कम खर्च में चलती हो अंदर जगह बहुत ज्यादा हो स्टेटस सिंबल हो पार्किंग में जगह कम गिरे वगैरह अब आप सोच कर देखें दुनिया में क्या ऐसी कोई कार है यह हो सकती है जिसमें यह सब खूबियां हो ऐसी कार होना संभव ही नहीं है क्योंकि इसमें जिन गुणों को हम ढूंढ रहे हैं वे परस्पर विरोधी हैं सस्ती कार का स्टेटस सिंबल होना अंदर से ज्यादा जगह होने पर भी पार्किंग में कम जगह घेर ना सब सुविधाएं और लग्जरी फीचर्स होने पर भी देखने का खर्च कम होना बहुत पावरफुल इंजन होने पर भी पेट्रोल का खर्च कम होना आदि ऐसे विरोधाभास हैं जो किसी भी एक कार में संभव नहीं है अब यदि ऐसी आदर्श कार दुनिया में बनी ही नहीं है या बनना संभव ही नहीं है तो ऐसा तो नहीं है कि लोग कार नहीं खरीदते हैं ग्राहक को सब कुछ किसी भी कार में नहीं मिलता है मतलब उसके हाथ से कुछ तो छूटना ही है और जो छूटना है उस पर आपत्ति तो ग्राहक को करनी ही है यदि आप सस्ती छोटे साइज की कार बेचेंगे तो ग्राहक को स्टेटस सिंबल नहीं दिखाई देगा यदि बड़ी कार दिखाएंगे तो पार्किंग की समस्या आड़े आएगी इस स्थिति में ग्राहक को आप उसके चुने हुए गुणों के आधार पर कार भेजते हैं इसका सार यही है कि ग्राहक जो कुछ चाहता है वह सब उसे एक प्रोडक्ट में नहीं मिल सकता है उसे कुछ चीजें छोड़ने ही पड़ेगी और सेल्समेन चाहे किसी भी चीज का हो उसका काम ग्राहक को यही समझाना है कि उसे सब कुछ नहीं मिल सकता ग्राहक के लिए जो बातें जो गुण सबसे महत्वपूर्ण है वह उनके हिसाब से सामान खरीद लेता है बीमा एजेंट के रूप में आप ग्राहक को किसी भी ऐसी चीज का उदाहरण दे सकते हैं जो वह पहले से प्रयोग कर रहा है जैसे की तान्या घड़ी अब घड़ी सस्ती है तो स्टेटस सिंबल नहीं है स्टेटस सिंबल है तो महंगी है यह सिद्धांत वित्तीय चीजों पर भी लागू होता है जब भी कोई व्यक्ति निवेश करना चाहता है तो वह तीन चीजें देखता है पैसे की सुरक्षा लिक्विडिटी और बेहतर रिटर्न वास्तव में दुनिया में ऐसा कोई भी निवेश नहीं है जिसमें तीनों चीजें हो आपके पैसे की सबसे बेहतर सुरक्षा बैंक में फिक्स डिपॉजिट में हो सकती है लेकिन उसमें सबसे कम होगा शेयर मार्केट में पैसा ज्यादा तेजी से बढ़ सकता है लेकिन वहां पैसे की सुरक्षा की गारंटी नहीं होती प्रॉपर्टी में पैसे कुछ हद तक हो सकती है और रिटर्न भी आने की संभावना रहती है लेकिन उसमें लिक्विडिटी नहीं होती यानी आप जब चाहे उसे बेचकर पैसा प्राप्त नहीं कर सकते इसका अर्थ है कि ग्राहक को इन तीनों में से कोई एक ही छोड़नी होगी हर ग्राहक अपनी सोच के अनुसार अलग-अलग चीज छोड़ना चाहेगा इसलिए बैंकों में बेहिसाब पैसा फिक्स डिपाजिट में रखा जाता है तो दूसरी और प्रॉपर्टी और शेयर मार्केट में भी लोग खूब निवेश करते हैं इस सारी चर्चा का अर्थ यही है कि कुछ भी खरीदने से पहले ग्राहक गतिरोध उत्पन्न करता ही है क्योंकि जो उसे छोड़ना पड़ रहा है उसे वह आसानी से छोड़ना नहीं चाहता बीमा बेचते हुए इस गतिरोध को सामान्य समझें जितनी बड़ी खरीद उतना बड़ा गतिरोध अक्सर बीमा एजेंट यह शिकायत करते हैं कि जीवन बीमा में ग्राहक निर्णय लेने में बाकी चीजों की अपेक्षा बहुत ज्यादा समय लगाता है दो या तीन बार डालने के बाद ही ग्राहक पॉलिसी लेने का निर्णय लेता है यह बात बिल्कुल सही है और हमें इसका तर्क समझना होगा ग्राहक को जितनी महंगी चीज खरीदनी होती है उतना ही ज्यादा समय वह निर्णय लेने में लगाता है आप जितने समय में एक छोटा केलकुलेटर खरीद लेते हैं उतनी देर में कंप्यूटर नहीं खरीदते आप तो पेस्ट खरीदने में जितना समय लगाते हैं साइकिल खरीदने में उससे ज्यादा समय लगाते हैं कार खरीदने में उससे ज्यादा और मकान खरीदने में उससे भी ज्यादा जहां टूथपेस्ट खरीदने में 10 मिनट लगते हैं वहीं मकान में कुछ महीने या साल भी लग सकते हैं यह सिद्धांत जीवन बीमा पर भी लागू होता है बीमा एजेंट को लगता है कि ग्राहक 20000 का प्रीमियम देने में इतनी आनाकानी कर रहा है ग्राहक के लिए यह निर्णय 20000 का नहीं है यदि उसे 20000 की सालाना किश्त 20 साल तक देनी है तो उसके लिए यह निर्णय ₹400000 का है और इसके लिए वह तुरंत निर्णय नहीं ले सकता इस चर्चा से यह स्पष्ट है कि जीवन बीमा बेचने में ज्यादा समय और श्रम लगना स्वाभाविक ही है आपके लिए जो पॉलिसी 20000 की है वह ग्राहक के लिए चार लाख की है यदि ग्राहक को आप ऐसी पॉलिसी बेचते बेचते जिसमें उसे एक ही बार ₹20000 देना होता तो है निर्णय लेने में इतना समय नहीं लगा था क्योंकि तब उसके लिए यह 20000 की ही खरीद होती

तकनीक का प्रयोग

आजकल सब मियां कंपनियां कंप्यूटर और तकनीक का प्रयोग करती हैं अक्सर देखा गया है कि ग्राहक को बीमा कंपनी जो सुविधा देती है उनकी उसे जानकारी ही नहीं होती आप का प्रयास यह होना चाहिए कि ग्राहक के प्रपोजल फॉर्म में ग्राहक का मोबाइल नंबर और ईमेल जरूर लिखें ग्राहक को कष्ट कब जमा करवानी है मनी बैक कब मिलना है आदि अनेक सूचनाएं कंपनियां सीधे ग्राहक को भेजती हैं यदि उनके मोबाइल नंबर और ईमेल कंपनी के पास हो दूसरे सब कंपनी अपने ग्राहकों को सुविधा देती है क एक एजेंट के रूप में आपका कर्तव्य है कि आप ग्राहक के साथ बैठकर उसका पासवर्ड बनवाएं ताकि वह इस तरह की सारी डिटेल खुद ही कंपनी की वेबसाइट पर देख सके साथ ही आप उसे इसका उपयोग करना भी सिखाए आपके पास भी लैपटॉप और ईमेल की सुविधा होनी बहुत जरूरी है आप इसका उपयोग अपने ग्राहकों को उनसे संबंधित कोई भी जानकारी भेजने के लिए कर सकते हैं ईमेल एक बहुत ही सस्ते सुविधा है जिससे आप एक बार में ही सैकड़ों ग्राहकों को कोई सूचना भेज सकते हो यदि उनके पास भी ईमेल है आपकी कोई नई पॉलिसी आई कोई अच्छा बोनस दिया गया कोई प्लान बंद होने वाला है किसी अखबार ने आपके प्लान को या अपनी कंपनी को दूसरों से बेहतर बताया तो आप चाहेंगे कि यह खबर सब ग्राहकों तक पहुंचे ई-मेल से तेज और सस्ता कोई भी संचार माध्यम नहीं है आप अपने ग्राहकों को एक ग्रुप एड्रेस बनाकर रखें और एक बार में ही उन सब को मेल भेजते रहें जब आप अपने ग्राहकों को एक मेल भेजें तो ध्यान रहे कि सबके पति बीसीसी में ही लिखें जिससे उनका दुरुपयोग ना हो सके साथ ही ध्यान रहे कि मेल बहुत भारी ना हो यानी उसमें फोटो वगैरह ना हो मेल इतनी जल्दी-जल्दी भी ना भेजें कि ग्राहक आपके नाम को ब्लॉक कर दे।

रेफ्रेंस (Reference)

जीवन बीमा का बिजनेस है रेफरेंस पर ही चलता है रेफरेंस का अर्थ है किसी ग्राहक से दूसरे संभावित ग्राहक का नाम पूछना यह अत्यधिक महत्वपूर्ण बात है किसी भी एजेंट का अपना जान पहचान का दायरा सीमित ही होता है कोई भी एजेंट हजार लोगों को सीधे नहीं जान सकता है फिर भी आप देखेंगे कि किसी बड़े एजेंट के 2000 ग्राहक हैं यह इसलिए संभव है कि ग्राहकों से उनके परिचितों के रेफरेंस लिए गए एक जानने योग्य बात है कि रेफरेंस आप उन लोगों उन दोनों तरह से लोगों से लैस जिन्होंने आपसे पॉलिसी ली है या नहीं ली यदि कोई ग्राहक आपसे कहता है कि उसे आप अभी पैसे नहीं है कोई दूसरी देनदारी है या उसने पिछले सप्ताह ही नहीं बीमा पॉलिसी खरीदी है तो इसका अर्थ यह नहीं है कि वह आपके विरुद्ध है आपके अनुरोध पर वह आपको अपने जानने वाले लोगों के नाम तो दे ही सकता है हो सकता है कि उसका कोई परिचित अभी पॉलिसी लेने की स्थिति में ना हो यदि कोई ग्राहक आपसे कहे कि आप फलां आदमी से बात कर ले लेकिन मेरा नाम ना लें तो बैलेंस नहीं है आप उस ग्राहक से कहें कि यदि मुझे एक अपरिचित आदमी की तरह से बात करनी है तो मैं फोन डायरेक्टरी उठाकर किसी से बात कर ही सकता हूं मुझे तो ऐसे नाम चाहिए जिनसे मैं आपका नाम लेकर बात कर सकूं इस तरह से दिया गया नाम आपके लिए कोल्ड कॉलिंग का डाटा तो हो सकता है रेफरेंस नहीं विश्व प्रसिद्ध सेल्समैन एक जिगलर लिखते हैं कि आप ग्राहक के घर बैठकर उसे कुछ बेच रहे हैं जब है खरीदने की स्थिति में आ जाए तो आप उससे पूछे कि यदि अभी आपका कोई खास मित्र यहां आ जाए तो क्या आप मुझे उस से मिलवा आएंगे मेरा परिचय उससे करवाएंगे पूरी संभावना है कि वह हां कहेगा तब आप उसकी राख से कहे कि आप इसलिए मिल पाएंगे क्योंकि आपको लगता है कि जो सामान आप खरीद रहे हैं उसकी उसे भी जरूरत हो सकती है अब यदि वह दोस्त यहां नहीं आया है तो इससे उसकी जरूरत तो खत्म नहीं हो गई है इसलिए मैं उसके घर जाकर उससे मिल लेता हूं आप मुझे उसका नाम और फोन नंबर दीजिए रेफरेंस लेने के लिए जरूरी है कि ग्राहक को यह विश्वास हो कि जिसका रेफरेंस दिया जा रहा है यह एजेंट उसका अनावश्यक रूप से पीछा करके उसे तंग नहीं करेगा यदि आप किसी को बार-बार पॉलिसी के लिए फोन करेंगे तो वह उसे फोन करके आपकी शिकायत करेगा जिसने आपको उसका रेफरेंस दिया था इसलिए आप रेफरेंस लेते समय ग्राहक को विश्वास दिलाया कि आप उसे मित्र को सिर्फ एक बार फोन करके पूछेंगे कि उसकी आपसे मिलने में रूचि है या नहीं यदि इच्छुक नहीं होगा तो आप बार-बार उसे फोन नहीं करेंगे यदि ग्राहक आपकी इस बात से सहमत हो गया तो फिर आपको कई रेफरेंस मिलने की संभावना है प्रायः ऐसा होता है कि आप ग्राहक से वापस मांगे तो वह कहेगा कि चलिए किसी ने बीमा पॉलिसी के लिए पूछा तो आपका नाम बता दूंगा आप उससे कहे कि यदि आपके किसी मित्र को बीमा पॉलिसी की जरूरत है तो वह आपसे आकर क्यों कहेगा आपसे आज तक किसी ने आकर नहीं कहा होगा कि बीमा चाहिए जिसे बीमा चाहिए उसे मुझ जैसा कोई एजेंट चाहिए इसलिए आपसे अपेक्षा है कि आप मुझे कुछ परिचित लोगों के नाम बता दें जिन्हें मैं ही अपनी ओर से फोन करके पूछ लूंगा कि उनकी कोई बीमा संबंधित जरूरत है क्या इसके बाद ग्राहक आपको बोल सकता है कि अच्छा कुछ नाम सोच कर बताऊंगा प्रायः हर ग्रह के पास मोबाइल फोन होता है जिसमें बहुत से नाम और नंबर डाल रखे होते हैं आप अपने मोबाइल में कोई ऐसा नाम नहीं रखते जिसे आप जानते ना हो गिरा के फोन में जो नाम है वह सब उसके परिचित लोगों के ही हैं इसलिए आप ग्राहक से कहे कि श्रीमान जी आप अपने मोबाइल में से देखकर ही कुछ नाम बताइए ना मान लीजिए कि ग्राहक ने मोबाइल में से देखकर आपको पहला नाम बताया अजय कुमार और उसका नंबर दिया अब आपने पूछा कि यह कहां रहते हैं क्या करते हैं कितना कमाते हैं कितने की पॉलिसी ले सकते हैं आदि अब है आपको और नाम नहीं देगा ग्राहक समझ जाएगा कि आप हर एक नाम के बाद उससे इतने ही सवाल पूछेंगे इसलिए जब ग्राहक आपको नाम और नंबर बता रहा है तो आप और कुछ नहीं पहुंचे जब है आपको जितने नाम देना चाहता है वह दे चुके तब आप उससे पूछें कि अजय कुमार कहां रहते हैं क्या करते हैं आदि अब ग्राहक उन नामों से मुकर नहीं सकता है जो वह पहले ही आपको दे चुका है जितने नाम ग्राहक ने दिए हैं यदि संभव हो तो आप उनमें से कुछ खास लोगों को ग्राहक से फोन करवा दें फोन करने के साथ दिए गए रेफरेंस से वहां आपकी पॉलिसी बिकने की संभावना बहुत बढ़ जाएगी आप ऐसा भी कर सकते हैं कि ग्राहक से पूछे कि इनमें से सबसे पहले किसको फोन करूं संभावना है कि वह ग्राहक आपको कोई एक ऐसा नाम बताएगा और उसको चलने का कारण भी उदाहरण के लिए मैं आपको बता सकता है कि आप राधे रमण को सबसे पहले फोन करें अभी उसका प्रमोशन हुआ है या उसने जमीन बेची है जिसका पैसा उसे निवेश करना है इससे आपको काम और भी आसान हो जाएगा जगजीत लिखते हैं कि जो रेफरेंस आपको मिले हैं उन्हें उसी दिन फोन करें साथ ही फोन करके दो-तीन दिन बाद जो भी स्थिति हो पॉलिसी बीके या ना बीके रेफरेंस देने वाले को जरूर बताएं इससे एक तो उसे लगे लगता है कि उसने जो सहयोग दिया था वह व्यर्थ नहीं गया और एजेंट बहुत होशियार है जो तुरंत ही सब से मिल लिया दूसरा लाभ है कि यदि आपके ग्राहक के घर से निकलने के बाद उसे कोई अन्य नाम याद आ गया हो तो वह आपको अब बता सकता है यह नाम बताने के लिए वह आपको फोन नहीं करेगा लेकिन यदि आपने फोन किया तो वह आपको यह नाम बता देगा कौन ग्राहक आपको रेफरेंस देता है और कौन नहीं या उसकी अपनी आदत और रूचि पर निर्भर करता है यदि किसी ग्राहक ने एक बार आपको चार रेफरेंस दिए हैं तो आप बाद में उसी से और नाम पूछे ऐसा नहीं कि वह केवल चार ही लोगों को जानता है उसके पास और नाम भी हैं और मैं आपको रेफरेंस देखकर मदद नहीं करना चाहता है रेफरेंस कैसे प्रयोग करें जब आप पहले ग्राहक के रेफरेंस से दूसरे के पास गए हो तो बातचीत में तीन चार बार पहले ग्राहक का नाम जरूर लें जो उसका ख़ास दोस्त या रिश्तेदार होगा दूसरा ग्राहक आपको जानता नहीं है परंतु पहले ग्राहक का नाम उसे आपके बारे में आश्वस्त करता है जब आप पहले ग्रह का नाम ले रहे हैं तो उसकी व्यक्तिगत जानकारी दो से ग्राहक को ना दें यदि आप यह बता दें कि पहले ग्राहक ने ₹80000 का चेक दिया है 20 लाख का बीमा खरीदने के लिए तो दूसरे ग्रह को लगता है यह एजेंट अपने ग्राहकों के बारे में ऐसे ही बना दी करता है इसलिए इससे पॉलिसी क्यों यदि खुद पूछे पहले ग्राहक के बारे में तो आप शालीनता से कह दें कि यह प्रोफेशनल एथिक्स हैं जिनके चलते आप एक की जानकारी दूसरे को नहीं देते हो

साइन का महत्व

पॉलिसी लेने के लिए ग्राहक जो प्रपोजल फॉर्म भरता है वह पॉलिसी का आधार होता है ग्राहक और बीमा कंपनी के बीच जो अनुबंध है वही उसी फॉर्म में दी गई जानकारी पर आधारित है कानूनन यह फॉर्म ग्राहक के द्वारा ही भरा जाना चाहिए सामान्यता इस फॉर्म को एजेंट ही भरता है क्योंकि ग्राहक को यह जानकारी नहीं होती कि इसे कैसे भरना है ध्यान रहे कि जब एजेंट इस फॉर्म को ग्राहक के लिए भरता है तो वह कंपनी के एजेंट के तौर पर नहीं बल्कि ग्राहक के एजेंट के तौर पर काम कर रहा होता है फॉर्म के अंत में ग्राहक के द्वारा एक घोषणा की जाती है कि वह इस फॉर्म में सब कुछ सही सही सूचना दे रहा है और वह जानता है कि उसके द्वारा खरीदी जा रही पॉलिसी का आधार इस फॉर्म में दी गई सूचनाएं ही है इस घोषणा में यह भी लिखा होता है कि इसकी सूचनाओं को गलत पाए जाने पर यह पॉलिसी अवैध हो जाएगी और दिया गया प्रीमियम भी जप्त कर लिया जाएगा जब आप एजेंट के रूप में इस फॉर्म को भर रहे होते हैं तो आपको चाहिए कि ग्राहक को इस घोषणा के बारे में बता दें ताकि उसे इस फॉर्म में दी जा रही सूचना का महत्व पता रहे कोई भी ग्राहक जब पॉलिसी लेता है तो उसका मकसद प्रीमियम देना नहीं है मैं चाहता है कि कोई अनहोनी होने पर दिए गए प्रीमियम के बदले में उसके परिवार को बीमा राशि बिना हिचक मिल जाए यदि ग्राहक को पता हो कि उसके द्वारा दी गई गलती गलत जानकारी के आधार पर उसका क्लेम रिजेक्ट हो सकता है तो वह कभी गलत या अधूरी जानकारी नहीं देगा यदि आपने अपना हित देखते हुए ग्राहक को इस बात से अवगत नहीं करवाया और उसने गलत या अधूरी जानकारी के आधार पर पॉलिसी ले ली तो आपके लिए दो तरह की समस्या है पहली समस्या तो यह कि यदि क्लेम आया और गलत जानकारी आधार पर रिजेक्ट हो गया तो उस ग्रह का परिवार आपको इसका जिम्मेवार मानेगा दूसरी स्थिति वह है जब ग्राहक के जीते जी कोई दूसरा एजेंट उसे सही जानकारी दे दें दोनों ही स्थित तीनों में लोग आपसे बीमा लेने में कतरा ने लगेंगे किसी भी एजेंट के लिए यह अपने पैस को खत्म करने वाली स्थिति होती है आजकल ज्यादातर बीमा कंपनियां प्रपोजल फॉर्म की फोटो कॉपी भी पॉलिसी डॉक्युमेंट में लगा कर भेजती हैं अतः यदि आपने फॉर्म में कोई सूचना ग्राहक द्वारा दी गई जानकारी के विपरीत भर्ती फॉर्म बदल कर उस पर ग्राहक के नकली दस्तखत कर दिए तो आप कभी भी पकड़े जा सकते हैं एक और बात आप ग्राहक को बता दें कि यदि वह कोई अधूरी या गलत सूचना फॉर्म में दे रहा है तो उसे इस बात का अहसास होना चाहिए कि भविष्य में कभी क्लेम लेने की नौबत आ गई तो उसकी पत्नी को यह सब सही साबित करना होगा स्वभाविक है उसके लिए सही सूचना देना आसान है बजाय इसके कि उसकी पत्नी को संकट की घड़ी में क्लेम लेने के लिए अदालतों के चक्कर लगाने पड़े इसलिए जरूरी है कि ग्राहक सारी जानकारी ठीक ठीक दे और आप उसे वैसे ही फॉर्म में भरें।

एजेंट के साइन का महत्व

किसी भी जगह हस्ताक्षर करने का अर्थ है कुछ वचन देना जिम्मेवारी लेना जब ग्राहक प्रपोजल फॉर्म भरता है तो उसके साथ आप अपनी गोपनीय एजेंट रिपोर्ट लगाते हैं जिसे एजेंट रिपोर्ट मोरल हजार्ड रिपोर्ट यानी एमएचआर भी कहा जाता है क्या आपने कभी पढ़ा है कि आप जहां साइन कर रहे हैं वहां क्या लिखा है हम अपने जीवन की पहली पॉलिसी बेचने से लेकर अंत तक यह काम करते हैं लेकिन यह नहीं देखते कि हम किस चीज की जिम्मेवारी लेते हुए अपने हस्ताक्षर कर रहे हैं।

आप कौन से 4 प्लान बेचते हैं

अक्सर देखा गया है कि हर एजेंट तीन या चार प्लान ही भेजता है और उसका 90% भी माइन 4 प्लान में ही आ जाता है यह जरूरी नहीं है कि हर एजेंट वही 4 प्लान बेचता है एक एजेंट के प्लान दूसरे से बिल्कुल अलग हो सकते हैं या दो एक जैसे और दो अलग इसमें कुछ भी गलत नहीं है एक एजेंट सामान्यता वही भेजता है जो उसे पसंद होता है अब आप सोच कर देखें कि यदि आपको 4 प्लान भेजते हो संभव है सैकड़ों पॉलिसी भेज चुके हो पर क्या आपने कभी उन पॉलिसियों का डाक्यूमेंट्स कॉन्ट्रैक्ट पड़ा है यदि आप इसे अच्छे से पड़ेंगे तो पाएंगे कि इनमें अनेक नियम और शर्ते लिखी हैं जो आपको आज तक मालूम ही नहीं थी पॉलिसी लैप्स होने और पुनः चालू करवाने से संबंधित जानकारी ग्रेस पीरियड की जानकारी मेच्योरिटी वैल्यू लेने के विकल्प लोन लेने के विकल्प आदि बहुत सी चीजें वहां इतने विस्तार से होती हैं जितनी बाकी जगह नहीं होती वैसे भी जो प्लान आप इतने आत्मविश्वास से बेच रहे हैं अपने परिचित लोगों को उसके डॉक्यूमेंट को एक बार पढ़ना बनता ही है

बिजनेस की प्लानिंग

एजेंट सामान्य था अकेले काम करता है उसे यह अंदाजा नहीं होता कि कंपनियों में किस तरह से बिजनेस प्लैनिंग की जाती है इसीलिए अक्सर बीमा एजेंट अपने बीमा की प्लानिंग नहीं करते प्लानिंग यह तय करने के लिए होती है कि हमें कहां तक पहुंचना है कब तक पहुंचना है और कैसे पहुंचना है एक बीमा एजेंट के लिए जरूरी है कि वह तय करेगी उसे कहां तक पहुंचना है यानी वह अपना लक्ष्य निर्धारित करें लक्ष्य इस प्रकार से हो सकता है कि उसे 1 वर्ष में 100 पॉलिसी बेचनी है या 20 लाख का प्रीमियम करना है या अमुक क्लब के लिए क्वालीफाई करना है या एमडीआरटी करना है कहने का अर्थ यह है कि आपको यह तय करना है कि कितने समय में आपको कितनी पॉलिसी का प्रीमियम करना है यदि आप क्लब मेंबरशिप की प्लानिंग कर रहे हैं तो प्राय सभी कंपनियों में यह अप्रैल से मार्च तक होता है यदि आप एमडीआरटी की बात करते हैं तो यह जनवरी से दिसंबर तक होता है प्लानिंग करना इसलिए जरूरी है कि आपको इससे एक साधन जुटाने हैं इसके हिसाब से आपको प्रयास करना है यदि एक आदमी दो मंजिल भवन बनाना चाहता है तो थोड़े सामान की जरूरत होगी यदि 4 मंजिल बनानी है तो उसके लिए धन और सामान की व्यवस्था करनी है और वैसा ही नक्शा बनाना पड़ेगा यदि भवन और ऊंचा बनाना है तो सारी प्लानिंग बदल जाएगी क्योंकि आपको लिफ्ट भी चाहिए भूकंप रोधी इंतजाम भी चाहिए पानी के लिए बड़ी टंकी चाहिए नीचे बड़ी पार्किंग चाहिए और बहुत सी व्यवस्था चाहिए एक बीमा एजेंट के लिए प्लानिंग की आवश्यकता यह है कि यदि वह साल की 30 40 पॉलिसी भेजता है तो ज्यादा प्लानिंग नहीं चाहिए यदि उसे साल में 200 पॉलिसी बेचनी है तो उसे देखना पड़ेगा कि वह 1 महीने में कितनी पॉलिसी भेज सकता है उसे और ज्यादा बढ़ाने के लिए क्या करना पड़ेगा 200 पॉलिसी के लिए कितने लोगों से मिलना पड़ेगा यह भी अनुमान लगाना पड़ेगा कि पुराने ग्राहकों से कितनी पॉलिसी साल भर में आ सकती है और बाकी के लिए ग्राहक कहां से खोजे जाएंगे इसके लिए वह कहीं स्टाल लगाए किसी कंपनी में जाकर लोगों से बात करें या पुराने ग्राहकों से ही नए फैसले एक एजेंट पहले साल भर में 1000000 का प्रेम करता है इसी बेचता है यदि इस साल 2000000 करना चाहता है तो उसे सोचना होगा कि उसका जो औसत प्रीमियम ₹10000 प्रति पॉलिसी है उसे वह कितना बड़ा सकता है मान ले कि वह ऐसे 12000 तक लेकर जा सकता है अब उसे 2000000 प्रीमियम तक पहुंचने के लिए लगभग 165 पॉलिसी बेचनी होगी 100 की बजाय 165 पॉलिसी बेचने के लिए उसे कहां से नए ग्राहक खोजने पड़ेंगे दूसरे शहर में जाना पड़ेगा नए सर्कल में घोषणा होगा पुराने दोस्तों और रिश्तेदारों को टटोलना पड़ेगा टेली कॉलिंग करनी पड़ेगी कहीं से डाटा खरीदना पड़ेगा किसी होम लोन के एजेंट सेटिंग करनी पड़ेगी जिससे वे हर लोन लेने वाले को एजेंट से मिलवा सके आदि मंजिल पहले से तय नहीं है तो यात्रा में क्या-क्या चाहिए इसका प्रबंध नहीं हो सकता है 1 साल के लिए तय किए गए लक्ष्य को प्लानिंग नहीं कह सकते जब तक कि उस लक्ष्य को महीनों में नहीं तोड़ा गया यदि आप ने तय किया कि साल में 200 पॉलिसी करनी है तो आपको सोचना पड़ेगा कि आप मार्च में कितनी पॉलिसी भेज पाएंगे फरवरी में कितनी और इस तरह से सीजनल उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए किस महीने में कितनी पॉलिसी आपको बेचनी है फिर आपको इस टारगेट को हफ्तों में तोड़ना है किस महीने के बचे हुए 2 हफ्तों में आपको कितनी कितनी पॉलिसी बेचनी है मान ले कि आपको इस सप्ताह चार पॉलिसी बेचनी है तो आप को कम से कम 12 लोगों से मिलना है इसका अर्थ हुआ कि आपको आज कम से कम 2 लोगों से मिलना ही है यदि टारगेट यानी लक्ष्य को आज तक में नहीं तोड़ा गया तो पूरी प्लानिंग बेमानी है प्लानिंग का उद्देश्य है कि हमें हर रोज पता रहे कि कहां तक पहुंचना है कहां तक पहुंचे हैं और यदि कमी है तो उसे कल कैसे पूरा कर सकते हैं प्लानिंग करते समय ध्यान रहे कि आपको केवल नॉर्मल पॉलिसी के लिए प्लानिंग करनी है यदि आपने पिछले साल एक पॉलिसी ₹200000 प्रीमियम की बेटी जिससे आप की प्रति पॉलिसी प्रीमियम औसत 16000 की हो गई तो आज आप 16000 प्रति पॉलिसी की औसत मान कर प्लानिंग नहीं कर सकते आपको वह बड़ी पॉलिसी जो कि एक अपवाद की तरह थी को हटाकर बाकी की औसत निकालनी होगी और उसी के हिसाब से प्लानिंग करनी होगी आप पूरे दावे से नहीं कह सकते कि इस साल भी आपको एक पॉलिसी में 200000 का प्रीमियम मिलेगा यदि बड़ी पॉलिसी इस साल भी मिल गई तो मान ले कि वह बोनस है पर आप उसके आधार पर प्लानिंग नहीं कर सकते आपको यह भी देखना है कि आप लक्ष्य के पीछे भागे ग्राहक के नहीं इसका अर्थ यह है कि आपको प्लानिंग यह करनी है कि इसमें आपको 10 पॉलिसी बेचनी है यह नहीं कि इस ग्राहक को पॉलिसी बेचनी है कोई भी एजेंट यह चुनौती नहीं ले सकता कि वह जिसे चाहे उसको पॉलिसी पेज ही देगा आपके 50,000 प्रेम का अर्थ सिर्फ 50,000 है चाहे वह किसी भी ग्राहक से आए यदि एक ग्राहक आपको जरूरत से ज्यादा चक्कर लगवा रहा है तो उसे छोड़कर किसी अन्य की तरफ बढ़े

एक से ज्यादा एजेंसी

कुछ एजेंट एक बार में एक से ज्यादा जीवन बीमा कंपनी की एजेंसी लिए रखते हैं मेरा मानना है कि एक एजेंट जब तक कि वह बहुत ही बड़ा एजेंट ना बन जाए उसे एक ही कंपनी की एजेंसी में काम करना चाहिए इसी से ज्यादा कामयाबी की गुंजाइश होती है आप एक ही कंपनी से जुड़े हैं तो जाहिर है कि आपकी सारी ऊर्जा उसी कंपनी के प्लान बेचने में लगी है यदि आप ग्राहक के सामने दो तीन कंपनियों की चॉइस देकर पूछे कि उसे कौन सा प्लान चाहिए तो संभावना है कि वह आपको डाल देगा उसे एक ही पॉलिसी लेनी है और निर्णय के लिए मैं आप पर निर्भर करता है यदि आप कई कंपनियों की पॉलिसी बेच रहे हैं तो आप पूरे विश्वास से नहीं कह सकते कि इस एक कंपनी के प्लान बढ़िया हैं ऐसा करने के लिए आपको अपनी दूसरी कंपनी के प्लान को हल्का बताना पड़ेगा जो कठिन काम होगा यदि आपको किसी समय दूसरी कंपनी की एजेंसी लेने की जरूरत भी लगे तो आपको एक भारतीय जीवन बीमा निगम और एक प्राइवेट कंपनी की ज्वैलरी लेनी चाहिए ऐसा करने से आप उन ग्राहक को संतुष्ट कर पाएंगे जो सरकारी कंपनी की ओर झुकाव रखते हैं और उन्हें भी जो किसी प्राइवेट कंपनी की पॉलिसी खरीदना चाहते हैं बाजार में सभी तरह की सोच के ग्राहक आपको मिलेंगे

जनरल इंश्योरेंस की एजेंसी

जीवन बीमा के साथ हैं जनरल बीमा की एजेंसी एक अच्छा जोड़ बन सकता है यदि आप फुल टाइम बीमा एजेंट है जनरल बीमे में आपको ग्राहक ज्यादा मिल सकते हैं जिन्हें आप बाद में जीवन बीमा में भी उपयोग कर सकते हैं साथ ही आपको यह भी ध्यान रखना होगा कि जीवन बीमा की तुलना में साधारण बीमा में क्लेम बहुत ज्यादा होते हैं यदि किसी ग्राहक को क्लेम ना मिले तो वह इसका जिम्मेवार आपको मानते हुए आपसे जीवन बीमा लेना भी बंद कर सकता है।

स्कीम की गणना कैसे करें

बीमा कंपनियां समय-समय पर अपने एजेंटों के लिए स्कीम निकालती रहती है जिसमें उन्हें ज्यादा से ज्यादा बिजनेस करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है इसमें उन्हें कमीशन के अलावा कुछ पुरस्कार दिए जाते हैं हमें मालूम होना चाहिए उसका उद्देश्य क्या है। 

एक उदाहरण लें यदि एक कंपनी अपने एजेंटों के लिए एक स्कीम निकालें कि 1 महीने में एक लाख का प्रीमियम करने पर उन्हें ₹1000 का पुरस्कार मिलेगा तो यह कितने प्रतिशत की स्कीम है हम सबको लगता है कि यह 1% की स्कीम है वास्तव में ऐसा नहीं है यदि एक एजेंट पैनास्किन के इस महीने सिर्फ 10 15000 का ही प्रीमियम करता तो अब वह स्कीम के कारण 100000 का प्रीमियम नहीं कर सकता है एक लाख का प्रीमियम उसी एजेंट के लिए करना संभव होगा जो बिना स्कीम के भी 70000 का बिजनेस करता यदि बीमा कंपनी को यह मालूम हो कि जो एजेंट 70000 का प्रेम करता है वह स्कीम के बावजूद 17000 ही करेगा तो कंपनी उसे कोई भी इनाम नहीं देगी पुरस्कार का उद्देश्य है कि आप 70000 से 100000 तक पहुंचे यानी इनाम सिर्फ उस बिजनेस के लिए है जो आप स्कीम के कारण ज्यादा करेंगे इस उदाहरण में आपको 30000 का ज्यादा बीमा करने पर 1000 की स्कीम मिल रही है। यह स्कीम वास्तव में 1% की ना होकर 3% की है। कि सिर्फ सामान्य से ज्यादा बिजनेस के लिए है।


कितनी बडी पॉलिसी ग्राहक को दें

किसी ग्राहक को उसकी फाइनेंशियल कैपेसिटी से छोटी पॉलिसी देना(बेचना) ग्राहक और एजेंट दोनों के लिए गुनाह है। ग्राहक के लिए तो इसलिए कि उसे जरूरत से छोटी पॉलिसी मिली और आपके लिए नुकसान यह है कि आपको इस पॉलिसी से कमीशन कम मिलेगा। इसी तरह अगर ग्राहक को उसकी क्षमता से बड़ी पॉलिसी बेची गई होती तो नुकसान यह होगा कि पॉलिसी बंद हो सकती है, जो दोनों के लिए ही हानिकारक होगा। 

मैंने जब बीमा एजेंसी ली तो एक परिचित के पास भी में के लिए गया उसने बताया कि उसका पॉलिसी खरीदने से का पहला अनुभव बहुत कटु रहा था उसकी किसी पड़ोसी नहीं जैसी ली थी और उसे बीमा के लिए मिला इस भाई ने उससे यह कह दिया कि मैं ₹8000 सालाना की किस्त दे सकता हूं तुम जो भी पॉलिसी ठीक समझते हो कर दो पॉलिसी बन कर आ गई और इसने उठाकर अलमारी में रख दी जब अगले साल कष्ट के लिए कंपनी का नोटिस आया तो वह ₹16000 का था इसने उस एजेंट से बात की तो उसने बताया कि उसने पहले से ही 16000 साल आना की पॉलिसी बनाई थी जिसमें ₹8000 अपनी और से कमीशन के मिलाकर डाल दिए थे ग्राहक 16000 साल आना नहीं दे सकता था तो पॉलिसी बंद हो गई और दोनों का ही नुकसान हुआ इसलिए जरूरी है कि ग्राहक को उसकी क्षमता अनुसार ही पॉलिसी बेची जाए ना जरूरत से कम और ना ज्यादा इसके लिए पहली जरूरत जरूरी बात है वह यह कि आप ग्राहक के सामने ठीक सा इसका उदाहरण लें जब मैंने बीमा एजेंसी ली तो पहले साल में मेरा औसत प्रीमियम था ₹6000 प्रति पॉलिसी मैंने जब विचार किया तो एहसास हुआ कि ग्राहक दे तो ज्यादा भी सकता है परंतु मैं उदाहरण ही एक लाख बीमा धन की पॉलिसी काट लेता हूं ऐसा मैं इसलिए करता था क्योंकि जब मुझे पॉलिसी सिखाई गई थी तो एक लाख के उदाहरण से ही बताई गई थी और मैंने उसी को अपनी आदत बना लिया इसके बाद मैंने 200000 की पॉलिसी का उदाहरण लेना शुरू किया तो बिजनेस पढ़ने लगा अब या तो ग्राहक 200000 की पॉलिसी ले लेता या बोलता कि 12000 की किस्त थोड़ी ज्यादा है इससे औसत प्रीमियम 8 से 9000 के बीच हो गया 2011 2012 के समय के हिसाब से यह राशि कम नहीं थी इसलिए ठीक सा इसका उदाहरण लिए इस बात की संभावना कम है कि ग्राहक एक लाख की पॉलिसी का उदाहरण देखें और 500000 की पॉलिसी खरीद ल बहुत छोटी पॉलिसी बेच कर आ जाते हैं क्योंकि वे उसकी क्षमता का ठीक से आकलन नहीं कर पाते ग्राहक का सही मूल्यांकन करना बहुत जरूरी है एक भारतीय आदमी जापान में गया वह वहां के एक अत्यधिक प्रसिद्ध वैज्ञानिक की प्रयोगशाला देखने चला जाता है उसने वैज्ञानिक से कहा कि कोई नई चीज दिखाएं वैज्ञानिक ने अपनी मुट्ठी बंद की और बोला बताओ इसमें क्या है उस भारतीय ने आसपास निगाह घुमा कर देखा तो पाया कि कुछ टेलीविजन के मॉडल और फोटोग्राफ रखे थे उसे लगा कि इस जापानी ने कोई छोटी छोटा टीवी बना लिया लगता है जो उसकी मुट्ठी में बंद कर लिया है उसने कहा मुट्ठी में टीवी है वैज्ञानिक बोला बिल्कुल ठीक अब बताओ कितने एमडीआरटी दिल्ली की मीटिंग में एक एजेंट ने बताया कि वह किसी ग्रह के पास गया और उसे अपनी पॉलिसी बताई उसकी बात से संतुष्ट होने पर ग्राहक ने कहा एक लाख की दे दो उस एजेंट है उसे एक लाख की बीमा राशि की पॉलिसी जिसका प्रेम ₹6000 था दे दी पॉलिसी लेने के बाद ग्राहक ने कहा कि वह एक लाख का प्रीमियम देना चाहता था पर एजेंट ने उसकी हैसियत का मूल्यांकन 6000 के प्रीमियम के बराबर ही किया तो उसे इतना ही प्रीमियम दिया सबसे बढ़िया तरीका ग्राहक की क्षमता का अनुमान लगाने का कि आप उससे पूछा कि आपको इस प्लान में लगभग कितनी मेच्योरिटी वैल्यू चाहिए इस बात की संभावना कम है कि कोई ग्राहक आपको यह बोले कि उसे 15 साल के बाद ₹100000 ही चाहिए जब आप प्रेम की बात करते हैं तो उसे लगता है कि यह तो पैसा मांग रहे हैं इसलिए चौकन्ना रहता है जब आप मैच्योरिटी की बात करते हैं तो आप उसे पैसा देने की बात कर रहे हैं इसलिए मैं ज्यादा सहज रहता है ग्राहक आपको बोलता है कि 15 साल के बाद लगभग 1500000 रुपए तो मिलना ही चाहिए अब हम ग्राहक से कहेंगे कि आपने बिल्कुल ठीक अनुमान लगाया 1500000 तो मिलना ही चाहिए यदि आप ₹1000000 की पॉलिसी लेते हैं तो आपको लगभग 1500000 मिलेगा 1000000 के लिए आप की किस्त बनेगी लगभग ₹5000 महीना यदि आप सीधे ₹60000 सालाना की बात करते तो उसके लिए इसे स्वीकार करना कठिन हो सकता था पर अब आप जिस तरीके से समझा रहे हैं यह एक बेहतर तरीका है उसे अपनी बात समझाने का।

कितना रिस्क कवर चाहिए

जब हम ग्राहक से यह कहते हैं कि आपकी पुरानी पॉलिसी आपकी फाइनैंशल प्लानिंग का हिस्सा नहीं है तो ग्राहक हम से कह सकता है कि चलिए अब आप बताएं कि मुझे कितने का बीमा लेना चाहिए आप मेरी फाइनैंशल प्लानिंग करें क्या आप जानते हैं कि किसी आदमी का कितना बीमा होना चाहिए एक प्रोफेशनल तरीके से इसे कैसे जुड़ेंगे अक्सर हमारी ट्रेनिंग क्लास में जब यह सवाल एजेंटों से पूछा जाता है तो एक एजेंट बोलता है सालाना आमदनी का 10 गुना तो दूसरा बोलता है ढाई सौ गुना दोनों एजेंट ठीक नहीं हो सकते हैं इसका अर्थ है कि लोगों की समझ में कहीं ना कहीं कमी है एक सिद्धांत आता है ह्यूमन लाइफ वैल्यू का जिसमें यह गणना की जाती है कि यह आदमी अपने जीवन में कुल कितना धन कम आएगा और इसे उतना ही बीमा देना चाहिए इस सिद्धांत में समस्या यह है कि यह अनुमान लगाना संभव ही नहीं है कि आदमी अगले 20 साल में कितनी तरक्की करेगा कितना सफल होगा कितना कम आएगा इसलिए यह सिद्धांत व्यवहारिक नहीं है दूसरा सिद्धांत है इनकम रिप्लेसमेंट का यानी यह आदमी सालाना कितना कमाता है और इसे उतना ही बीमा दिया जाए जिससे इसके जाने के बाद परिवार का पहले जैसा स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग बना रहे यानी उन्हें घर खर्च के लिए पहले जैसी आमदनी उपलब्ध रहे यह ज्यादा व्यवहारिक है क्योंकि इसकी गणना संभव है हम किसी आदमी को उतना ही बीमा देंगे जिससे कि उसके ना रहने पर परिवार को उसकी वर्तमान आमदनी के बराबर मासिक आमदनी मिल सके इसकी गणना इस प्रकार से करेंगे कि सालाना आमदनी का 12 गुना बीमा कर दें यदि एक आदमी साल में तीन तीन लाख कमाता है तो उसे हमें हम 36 लाख का बीमा देंगे अब यदि परिवार का मुखिया चल बसे तो परिवार को 3600000 का जो क्लेम मिलेगा उसे किसी भी सुरक्षित जगह पर जमा करवाने से जहां 8% का ब्याज मिले तीन लाख सालाना की आमदनी हो जाएगी इससे परिवार को वह सब साधन मिलते रहेंगे जो आज मिल रहे हैं यदि परिवार पर कोई कर्ज है जैसे मकान या कार का लोन तो उसे भी 3600000 में जोड़ देंगे ताकि उसे चुकाने के बाद परिवार 3600000 निवेश कर सके कहा तो यह जाता है कि सालाना आमदनी में से ग्राहक का व्यक्तिगत खर्च जैसे सिगरेट शराब आदि घटाकर उसका 12 गुणा करना चाहिए क्योंकि ग्राहक के जाने के बाद इस खर्च की जरूरत नहीं होगी मेरा मानना यह है कि हमें व्यक्तिगत खर्च घटाएं बिना ही 12 गुणा करना चाहिए क्योंकि घर खर्च हर साल बढ़ता रहेगा जबकि ब्याज से होने वाली आमदनी स्थिर रहेगी इसलिए थोड़ा ज्यादा बीमा क्लेम ही चाहिए यदि ग्राहक अपनी आमदनी बताने को राजी ना हो तो हम उससे उसका मासिक खर्च पूछेंगे जो कि ग्राहक आसानी से बता देता है ऐसी अवस्था में हम आमदनी का 12 गुणा करके खर्च का 12 गुना करेंगे इस प्रकार जोरासी निकले उसमें सारे कर्ज को जोड़ दें तो यह बीमा राशि यार इस कवर की राशि निकल आएगी जो ग्राहक को लेना चाहिए इसे एक उदाहरण से ठीक समझ पाएंगे यदि किसी ग्रह की सालाना खर्च रुपए है तो उसे कितना रिस्क कवर देंगे इस चार लाख की रकम को हम 12 से गुना करेंगे यानी 4800000 का कवर देंगे जिससे आने की स्थिति में परिवार को 8% की दर से ₹400000 सालाना का ब्याज मिल सके अब यदि उसके ऊपर 500000 का कर्ज है तो उसे इस 4800000 में जोड़ देंगे यानी 53 लाख का बीमा देंगे यदि क्लेम आया तो लोन चुकाने के बाद परिवार के पास 4800000 ही बचेंगे यदि उसके पास पहले से ही 300000 की सुरक्षित सेविंग है तो उस रकम को 53 लाख से घटा देंगे यानी 50 लाख का रिस्क कवर चाहिए।
 

बीमा बेचने मे मोबाइल फोन का प्रयोग

जीवन बीमा टेलीफोन पर बेचना असंभव तो नहीं पर बहुत कठिन जरूर है एजेंट को सामान्यता एक पॉलिसी बेचने के लिए तीन बार ग्रह के पास जाना पड़ता है ऐसे में यह संभव नहीं है कि फोन पर ही कोई पॉलिसी खरीद ले फोन पर सिर्फ वही प्लान बिकेंगे बिकने की संभावना है जिनमें ज्यादा समझाने की जरूरत नहीं जैसे टर्म प्लान इसलिए टेलीफोन का प्रयोग हमें सिर्फ अपॉइंटमेंट लेने के लिए करना चाहिए ऐसा अनेक बार देखा गया है कि किसी के पूछने पर हम उसे फोन पर ही पॉलिसी समझाने लगते हैं इसका सीधा सा अर्थ है कि सामने वाला व्यक्ति मिलने से बचना चाहता है ऐसे व्यक्ति को हम फोन पर ही पॉलिसी से संतुष्ट कर के भेज पाएंगे इसकी संभावना बहुत कम है इसलिए प्रयास करें कि फोन पर वह आपको मिलने के लिए समय दें यदि कोई व्यक्ति जानने के लिए ज्यादा ही जिद करे तो उसे मात्र इतना ही बता दें कि मैं सलाह कंपनी से बोल रहा हूं और हमारे पास लगभग सब प्रकार का बीमा है और कोई भी पॉलिसी संबंधित जानकारी केवल आमने-सामने बैठकर उसकी जरूरत समझ कर ही अच्छे से दी जा सकती है यदि और ज्यादा जानना चाहे तो बता दें कि आपके पास एंडोमेंट मनी बैंक चाइल्ड प्लान पेंशन प्लान आदि सब कुछ है यदि कोई ग्राहक कहे कि उससे मिलने का समय ही नहीं है फोन पर ही सारी जानकारी चाहिए तो नम्रता पूर्वक कह दे कि बाद में कभी मुलाकात हो सकती है मेरे विचार से फोन पर पॉलिसी समझाने का प्रयास अपने समय की बर्बादी ही है फोन पर पॉलिसी वही लोग भेज पाते हैं जिनको टेली कॉलिंग की ट्रेनिंग मिली हो जिनका कम्युनिकेशन बहुत अच्छा हो और जो प्रायः इसी तरह से पॉलिसी बेचने का काम करते हो जब अपॉइंटमेंट लेने के लिए ग्राहक को फोन करें तो उसे दोस्त समय का विकल्प दें यदि आप यह पूछते हैं कि मैं आपसे मिलूं या नहीं तो आप ग्राहक को हां या ना कहने का विकल्प दे रहे हैं बेहतर होगा कि आप ग्राहक से पूछे कि मैं आपसे कल शाम को मिलूं या परसों सुबह ऐसी स्थिति में आप उसे दो समय में से एक को चुनने का मौका दे रहे हैं ध्यान रहे कि आप इस तरीके से ना पूछे कि कल शाम को मिलूं या परसो शाम को यदि ग्राहक का काम ऐसा है कि वह हर रोज शाम को व्यस्त ही होता है तो वह आपको कल या परसों क्या कभी भी शाम को नहीं मिल पाएगा इसलिए उसे दो विकल्प अलग-अलग समय के लिए जैसे सुबह और शाम ऐसे ही यदि आप किसी से पूछे कि मैं आपसे इस रविवार को मिलूं या अगले रविवार को तो वह भी उचित नहीं है हो सकता है ग्राहक हर रविवार को मंदिर या गुरुद्वारे में जाता हो और उस दिन मिलना कभी भी संभव ना हो एक बात और ध्यान में रखने की है जब ग्राहक ने हमें मिलने का समय दिया है तब जाने से पहले उसे पुनः फोन ना करें दोबारा फोन करने का अर्थ है कि अपनी पहली की हुई मेहनत पर पानी फेर देना हो सकता है कि जब आप कॉल पर जाने से पहले दोबारा फोन करें तो ग्राहक आपसे कहे कि अरे हां अच्छा किया कि फोन कर लिया दरअसल में एक बच्चे के जन्मदिन पर जाने वाला हूं और आप कल फोन करके बाद में मिलने यदि आप बिना फोन किए पहले से तय किए गए समय पर पहुंच जाएं तो ग्राहक आप से मिलेगा इस बात की संभावना ज्यादा है जो उदाहरण हमने लिया है उसी के आधार पर बात करें तो यह तय है कि यदि ग्राहक को किसी बच्चे के जन्मदिन की पार्टी में जाना है तो मैं उसका अपना बच्चा तो नहीं है यदि अपने घर में किसी के जन्मदिन की पार्टी होती तो उसे 2 दिन पहले भी पता होता जब उसने आपको मिलने का समय दिया यदि किसी पड़ोसी आने परिचित के यहां पार्टी है तो वह उसमें आधा घंटा देरी से भी जा सकता है संभावना है कि यदि आप उसके सामने पहुंच ही गए तो आपसे वह मिलेगा और यदि जाने से पहले दोबारा फोन करेंगे तो डाल देगा बिना दोबारा फोन किए सीधा वहां पहुंच जाने में दिक्कत यह हो सकती है ग्राहकी अपॉइंटमेंट भूल गया है तो घर पर ना मिले मेरा मानना है कि आपको यह रसके उठाना ही चाहिए इसमें हानि की अपेक्षा लाभ की संभावना ज्यादा है यदि ऐसा हुआ कि ग्राहक आपको समय देकर भी नहीं मिला तो संभव है कि अब नरम स्थिति में रहेगा और दोबारा आपको जल्दी ही मिलने का समय देगा और उसके पॉलिसी लेने की संभावना भी बढ़ जाएगी

अंडरराइटिंग (Underwriting)

अंडरराइटिंग का अर्थ होता है ग्राहक के प्रस्ताव को कंपनी द्वारा स्वीकार या अस्वीकार किया जाना ग्राहक पॉलिसी खरीदने के लिए बीमा कंपनी में आवेदन करता है और कंपनी उसे पॉलिसी देने या ना देने का निर्णय लेती है अंडरराइटिंग करते समय दो चीजें मुख्यता देखी जाती हैं एक है फाइनेंस सिलेंडर राइटिंग और दूसरी है मेडिकल अंडरराइटिंग फाइनेंसियल अंडरराइटिंग का अर्थ है कि कंपनी इस बात को तय करें कि ग्राहक की आर्थिक स्थिति ऐसी है भी या नहीं कि उसे इतना बीमा दिया जा सके बीमा कभी भी लाभ के लिए प्रयोग नहीं हो सकता है यह सिर्फ नुकसान की भरपाई करता है इसे समझने के लिए कार बीमा का उदाहरण लें यदि कार की कीमत 300000 है तो उसका 500000 का बीमा नहीं हो सकता भले ही ग्राहक 500000 के हिसाब से किस्त देने को तैयार हो इसका कारण है कि यदि ऐसा किया गया तो क्लेम आना निश्चित है ग्राहक लाभ कमाने के लिए कभी भी कार को खुद ही नष्ट कर देगा मकान दुकान जहाज कार का बीमा करना हो तो फाइनेंस सिलेंडर राइटिंग आसान है क्योंकि इन चीजों की कीमत की जानकारी प्राप्त करना आसान है जीवन बीमा में यह काम कठिन हो जाता है आप यह नहीं कह सकते कि वह आदमी ₹500000 का है इसलिए आम आदमी की कीमत का अनुमान नहीं लगाते बल्कि उसकी कमाने की क्षमता का अनुमान लगाते हैं आदमी जीते जी जितना कमा रहा है उसके मरने के बाद परिवार को उससे ज्यादा नहीं मिलना चाहिए इसलिए ऐसा संभव नहीं है कि एक आदमी जो ₹20000 महीना कमाता है वह चाहेगी उसका 10000000 रुपए का बीमा हो जाए भले ही वह किस्त पूरी देने को तैयार हो इसलिए किसी ग्रह की आर्थिक स्थिति का अनुमान लगाने के लिए उसकी इनकम टैक्स रिटर्न की कॉपी या अन्य संपत्ति का ब्यौरा चाहिए होता है यह सब कागजात ग्राहक को ही देने होते हैं मैं जब सेल्स में था तो एक बार अपने क्लिक के साथ उसके एक ग्राहक के पास गया उस ग्राहक ने जितने भी में के लिए आवेदन किया था उसके हिसाब से कागजों में उसकी आमदनी बहुत कम थी हमें उसके केस को पुष्ट करने के लिए उसकी इनकम टैक्स रिटर्न के अलावा उसकी संपत्ति के प्रमाण भी चाहिए थे दिल्ली की आजादपुर सब्जी मंडी के इस व्यापारी ने इसका बहुत बुरा माना और तर्क दिया कि पिछले साल ही उसने बैंक में फिक्स डिपॉजिट दिया था उस समय यदि बैंक वालों ने यह सब डिटेल नहीं मांगी तो अब बीमा कंपनी क्यों मांग रही है हमने उसे स्पष्ट शब्दों में समझाएं कि यदि वह कहीं पर भी अपना पैसा सिर्फ ब्याज कमाने के हिसाब से जमा करवाएगा तो बैंक या कोई और संस्था यह सब प्रमाण नहीं मांगेगी अब भी बीमा कंपनी उससे यह कागजात इसलिए नहीं मांग रही कि उसने पैसा जमा करवाया है आया संपत्ति का प्रमाण इसलिए मांगा जा रहा है क्योंकि बहुत थोड़े से प्रीमियम के बदले कंपनी उससे 20 से 25 * रिस्क कवर देने का निर्णय कर रही है अब यदि एक लाख के बदले कंपनी की देनदारी 2000000 की है तो यह सब मांगना और अपने आप को संतुष्ट करना कंपनी का हक है ग्राहक को बात समझ में आ गई और उसने सब कागजात देकर अपनी पॉलिसी जारी करवा ली तो किसी भी तरह की आयत संपत्ति का ब्यौरा मांगना एजेंट के लिए शर्मिंदगी या गुनाह का काम नहीं है यह कैसी आवश्यक जानकारी है जो दुनिया की कोई भी बीमा कंपनी उसे बीमा देते समय मांगेगी यदि ग्राहक को यह समझ में आ जाएगी यह जानकारी उसकी तहकीकात करने के लिए नहीं मांगी जा रही बल्कि हर बीमा कंपनी में यह नियम ही होता है तो उसे यह सब कागजात देते समय हिचक नहीं होगी साथ ही आप ग्राहक से पूछे कि क्या वह चाहेगा कि उसकी पॉलिसी में फर्जी कागज लगा दिए जाएं क्योंकि पॉलिसी जारी करने के लिए जो पेपर चाहिए उनसे छूट तो मिल ही नहीं सकती आप कहे कि आप चाहते हैं कि ईमानदारी से पॉलिसी जारी हो इसीलिए सारे पेपर उससे ही मांग रहे हैं कोई भी ग्राहक यह नहीं चाहेगा कि उसकी पॉलिसी फर्जी कागजात के आधार पर बनकर आए

मेडिकल अंडरराइटिंग

मेडिकल अंडरराइटिंग में होती है जब बीमा कंपनी या निर्णय लेती है कि यह आदमी शारीरिक रूप से इस योग्य है कि नहीं कि इसका इतनी रकम का बीमा किया जा सके ऐसा नहीं कि कोई भी व्यक्ति जो किस्त भर सकता है उसका बीमा हो ही जाएगा स्वास्थ्य को जांचने के लिए ग्राहक को डॉक्टर के पास भेजा जाता है अलग-अलग तरह के टेस्ट करवाने के लिए एजेंट के लिए सुविधाजनक स्थिति उस समय होती है जब बीमा पॉलिसी के लिए ग्राहक की डॉक्टरी जांच करवानी होती है अक्सर एजेंट इस मानसिकता से ग्राहक के पास जाता है जैसे कि वह कोई गलत काम कर रहा हो या ग्राहक के साथ धोखाधड़ी कर रहा हो एजेंट को चाहिए कि वह सीधे जाकर साफ तौर से ग्राहक को बताएं कि इस पॉलिसी के लिए उसके मेडिकल चेकअप की जरूरत है यदि ग्राहक यह तर्क दे कि कोई दूसरा एजेंट तो इसके बिना भी पॉलिसी करने को तैयार है तो उसे समझाएं कि मेडिकल टेस्ट करवाने या ना करवाने का निर्णय एजेंट के हाथ में नहीं है बल्कि बीमा कंपनी के नियमों के तहत ही है यदि कोई एजेंट इसके बिना बीमा करने को तैयार है तो इसका यही अर्थ है कि वह नकली मेडिकल रिपोर्ट पॉलिसी के साथ लगा कर भेजेगा अब ग्राहक से पूछे कि क्या वह चाहेगा कि किसी अनहोनी की स्थिति में उसका क्लेम इस कारण से खारिज हो जाए कि मेडिकल रिपोर्ट सही नहीं थी संभवत कोई भी ग्राहक इसके लिए सहमत नहीं होगा और मेडिकल के लिए मान जाएगा एक दूसरा तरीका ग्राहक को समझाने का यह है कि उससे कहे कि जो भी बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो पूर्ण रूप से स्वस्थ ना होने के बावजूद पॉलिसी लेना चाहते हैं आप तो फिर भी स्वास्थ्य बीमा कंपनी को ऐसे लोगों के लिए मेडिकल का नियम बनाना पड़ता है पर क्योंकि नियम सबके लिए बनते हैं तो आपको भी थोड़ी तकलीफ देनी होगी ग्राहक को यह सुनकर अच्छा लगेगा कि वह तो स्वस्थ है और दूसरे लोगों के लिए बनाए गए नहीं एम के कारण ही उसे मेडिकल करवाना है अब यदि ग्रह की मेडिकल रिपोर्ट ठीक आ जाए तो पॉलिसी तुरंत जारी कर दी जाएगी यदि मेडिकल रिपोर्ट में गड़बड़ दिखाई दी तो ग्राहक आप से यह शिकायत नहीं करेगा कि आपने उसे स्वस्थ बताया था मेडिकल रिपोर्ट के बारे में यह जानना बहुत जरूरी है कि प्राइस तब कंपनियां इस नियम से काम करती हैं कि यह रिपोर्ट उनके पास सीलबंद लिफाफे में ही पहुंचने चाहिए खुली हुई रिपोर्ट मान्य नहीं होती है कुछ कंपनियां यह सुविधा देती है कि यदि ग्राहक चाहे तो पॉलिसी जारी होने के बाद कंपनी से अपने मेडिकल रिपोर्ट की कॉपी मंगवा सकता है यदि रिपोर्ट में कुछ असामान्य हो तो कंपनी सीधे ग्राहक को ना भेजकर रिपोर्ट की कॉपी उसके डॉक्टर को भेज सकती है एक बात और ध्यान देने योग्य है कि यदि किसी ग्राहक से बीमा कंपनी मेडिकल जांच की मांग करती है और वह ग्राहक चाहे कि उसका बीमा कम कर दिया जाए जिससे उसे मेडिकल जांच ना करवानी पड़े तो ऐसा संभव नहीं है यदि एक बार मेडिकल जांच की मांग कर ली गई तो फिर वह ग्राहक इतना भी छोटा बीमा करवाना चाहिये बजाज तो करवानी ही पड़ेगी बीमा कंपनी को यह अधिकार है कि वह नॉन मेडिकल लिमिट वाले क्ति से भी मेडिकल मांग कर सकती है कंपनी के ऐसा करने का कारण अक्सर यह रहता है कि फॉर्म में लिखी ग्राहक की ऊंचाई और वजन में अनुपात असामान्य है या कोई ऐसी पारिवारिक बीमारी लिखी है जिससे ग्राहक के भी प्रभावित होने की आशंका है या फिर फॉर्म में लिखा है कि ग्राहक को शराब सिगरेट या कोई और नशा करने की ऐसी आदत है जिससे उसके स्वास्थ्य के खराब होने की आशंका है या ग्राहक किसी ऐसे देश की यात्रा करके आया है जहां कोई महामारी फैली हुई है अब ग्राहक को यदि बीमा करवाना है तो वह जांच करवानी ही पड़ेगी कंपनी बिना किसी कारण से भी नॉन मेडिकल वाले ग्राहक को मेडिकल जांच करवाने के लिए कह सकती है क्योंकि कंपनी का अधिकार है

अंडरराइटिंग निर्णय

मेडिकल एंड राइटिंग के निर्णय चार प्रकार से हो सकते हैं पहला तो यह कि मेडिकल रिपोर्ट की जांच के बाद कंपनी सीधे पॉलिसी जारी कर दे इसे कहते हैं स्टैंडर्ड रेट पर पॉलिसी जारी करना दूसरा निर्णय हो सकता है कि कंपनी ग्राहक को उतना ही लाभ देने के लिए कुछ ज्यादा प्रीमियम चार्ज करें ऐसा तब होता है जब यह मान लिया जाए कि वह अपनी आयु के सामान्यता स्वस्थ आदमी जितना स्वस्थ नहीं है तीसरी स्थिति होती है जब कुछ समय पहले ही हुए किसी ऑपरेशन आदि के कारण बीमा कंपनी के लिए तुरंत निर्णय लेना कठिन हो तब वह ग्राहक का पैसा वापस लौट आते हुए पॉलिसी को 6 महीने या साल भर के लिए पोस्टपोन कर देती है चौथा निर्णय हो सकता है जब कंपनी ग्राहक का पैसा लुटाते हुए बता दें कि वह इस ग्राहक का कभी भी बीमा नहीं करना चाहेंगे पहला निर्णय यानी पॉलिसी का स्टैंडर्ड रेट पर जारी होना तो कोई समस्या है ही नहीं दूसरे केस में जब एक्स्ट्रा प्रीमियम लग जाए तो ग्राहक को समझाना कठिन हो सकता है आइए चर्चा करते हैं कि इस स्थिति में हम ग्राहक को कैसे समझाएं सामान्यतः ग्राहक की पहली प्रतिक्रिया होती है कि आपकी कंपनी उसके साथ नाजायज कर रही है और दूसरी कोई भी कंपनी उसे सामान्य रेट में ही पॉलिसी दे देगी हम ग्राहक से बात करेंगे कि सब कंपनियों के अंडरराइटिंग के नियम लगभग एक जैसे होते हैं इसलिए यदि एक कंपनी ने जांच कर एक्स्ट्रा प्रीमियम लगाया है तो पूरी संभावना है कि दूसरी कम कोई भी कंपनी ऐसा ही करेगी हालांकि एक्स्ट्रा प्रीमियम में थोड़ा बहुत अंतर हो सकता है दूसरे हम ग्राहक को समझाएंगे कि यदि उसने हमारी पॉलिसी में एक्स्ट्रा प्रीमियम ना देकर किसी और कंपनी में बीमा के लिए आवेदन किया तो वह उस कंपनी के फॉर्म में वहां क्या लिखेगा जहां पूछा होता है कि आप के आवेदन पर किसी बीमा कंपनी ने एक्स्ट्रा प्रीमियम तो नहीं लगाया यदि वह इसमें हां लिखेगा तो हमारे निर्णय का हवाला देगा तो वह कंपनी ज्यादा चुकाने होकर जांच करेगी और पूरी संभावना है कि वह भी ज्यादा प्रीमियम की मांग करेगी यदि उसने वहां ना लिखा तो पॉलिसी पहले दिन से ही फर्जी हो गई ऐसी पॉलिसी जो गलत जानकारी देकर खरीदी गई है उसमें किसी क्लेम के रिजेक्ट होने की संभावना बहुत ज्यादा है इसलिए ग्राहक के पक्ष में यही बेहतर है कि वह सच्चाई को स्वीकार करें और जो भी ज्यादा प्रीमियम मांगा गया है उसे दे और बेफिक्र हो कर रहे यदि मेडिकल के बाद किसी ग्रह की पॉलिसी कंपनी द्वारा नकार दी जाए तो यह सीधे-सीधे बिजनेस का नुकसान है एजेंट के लिए स्थिति में आप ग्राहक को समझाएं कि महोदय हमने पॉलिसी के लिए पांच 10 साल देरी से आवेदन किया यदि यह आवेदन पहले किया गया होता तो यह स्थिति नहीं आती हम आपके लिए बीमा खरीदने का विकल्प बंद हो चुका है अच्छी बात यह है कि वह विकल्प परिवार में बाकी लोगों के लिए तो खुला है इसलिए बेहतर होगा कि आप इसी पैसे से परिवार के बाकी लोगों के लिए पॉलिसी ले ले परिवार में पत्नी बेटे बेटी के नाम से पॉलिसी खरीद कर खुद प्रीमियम देकर भी वह टैक्स छूट तो ले ही सकता है

मेडिकल टेस्ट कैसे करवाएं

जब आपको किसी पॉलिसी के लिए ग्राहक की मेडिकल जांच करवानी हो तो आप किन किन बातों का ध्यान रखेंगे सबसे पहली बात तो यह है कि क्या आपको मालूम है कि वह टेस्ट किस चीज का है और उसमें क्या जांच की जाती है एक प्रोफेशनल एजेंट के रूप में आप से यह अपेक्षा की जाती है कि आपको इसकी जानकारी होनी चाहिए यदि पहले से नहीं जानते हैं तो ग्राहक को बताने से पहले इसके बारे में पता करके जाएं बेहतर होगा आप इन सब टेस्ट की डिटेल अपनी फाइल में लगाएं आपको यह भी ज्ञात होना चाहिए कि इस टेस्ट के लिए खाली पेट ही जाना जरूरी है या कुछ खाकर जा सकते हैं यदि टेस्टिंग खाली पेट होनी है तो ग्राहक को स्पष्ट बताएं कि खाली पेट का मतलब है सिर्फ पानी पी सकते हैं अक्सर लोग यह समझते हैं कि चाय पी कर भी हम खाली पेट ही कहलाते हैं चाय पीने से भी खून की जांच होने से उसमें शुगर बड़ी हुई आती है यदि खाकर जाना है तो कितनी देर पहले क्या खा सकते हैं यह अवश्य बताएं ध्यान रहे कि मेडिकल करवाने के लिए ग्राहक को डॉक्टर के यहां अकेले नहीं भेजे ग्राहक के अकेले जाने से पहले नुकसान तो यह हो सकता है कि यदि वहां दो और ग्राहक आए हुए हैं जिनके एजेंट उनके साथ हैं तो ग्राहक को लगता है कि आप वैसे प्रोफेशनल एजेंट नहीं है जैसे दूसरे एजेंट हैं दूसरा नुकसान होने की आशंका यह है कि जो दो और एजेंट वहां आए हुए हैं उनके सामने आपका ग्राहक खुला खड़ा है जिसे वे अपनी पॉलिसी बेचने की कोशिश कर सकते हैं वैसे भी ग्राहक जब हाल में जाता है तो उसे नहीं मालूम वहां किस से बात करनी है कहां वजन करवाना है कहां खून की जांच करवानी है किस फॉर्म पर साइन करने हैं आपके लिए हर रोज का काम हो सकता है यदि आप साथ रहेंगे तो ग्राहक को लगता है कि समय भी कम लगा और वह कुछ तनाव से बच गया मेडिकल टेस्ट करवाते समय ग्राहक को एक पहचान पत्र और उसकी फोटो कॉपी भी साथ लेकर जानी चाहिए प्रयास करें कि सारी मेडिकल जांच एक ही बार में हो कुछ कंपनियां मेडिकल जांच घर पर भी करवाने की सुविधा देती है जिसका उपयोग किया जा सकता है

प्रोस्पैक्टिंग (Prospecting)

प्रोस्पेक्टिंग का मतलब है नए ग्राहकों को ढूढंना। पॉलिसी को बेचना इतना मुश्किल कार्य नहीं है जितना कि नए ग्राहकों को ढूंढना जिनको पॉलिसी बेची जा सके। इसके लिए हर बीमा विशेषज्ञ के पास अपना-अपना एक समाधान हो सकता है। मैं बिल्कुल साधारण तरीके से आपको प्रोस्पेक्टिंग के बारे मे बताने वाला हूं, मुझे लगता है कि आप आसानी से इन सभी बातों को समझकर ज्यादा लाभ उठा सकते हैं।  

आप सभी अभिकर्ता अपने सभी जानने वालों की एक लिस्ट बनाएं। हमारी ट्रेनिंग क्लास में जब एजेंट से यह पूछा जाता है कि इस तरह की लिस्ट बनाने में कितना समय लगेगा तो कोई एजेंट बोलता है 2 घंटे, कोई कहता है 2 दिन, कोई 1 सप्ताह की बात करता है। फिर उनसे पूछा जाता है कि क्या इसके बाद कोई भी ऐसा आदमी नहीं बचेगा जिसको आप जानते हों और जिसका नाम लिस्ट में नहीं है, तो वे सोच में पड़ जाते हैं। ध्यान रहे कि हमें अपने सभी जानने वालों की लिस्ट बनानी है, कंप्यूटर पर या कागज पर। मेरा मानना यह है कि यह एक ऐसी लिस्ट है जो कभी समाप्त नहीं होगी। आप आज यदि दो सौ नाम इसमें लिख भी लेंगे तो कल आपको कुछ और नाम याद आएंगे और हर रोज नए नाम याद आते ही रहेंगे। इस सूची में निरंतर नाम जुड़ते रहेंगे। 

आप इस लिस्ट को जितना बड़ा कर लेंगे आप की पॉलिसी बेचने की संभावना उतनी ही बढ़ती चली जाएगी। इस सूची को बढ़ाने का बढ़िया तरीका यह है कि आप उसे सेगमेंट के अनुसार बनाएं, एक-एक वर्ग के अनुसार। उदाहरण के लिए आप एक वर्ग(segment) बनाएं रिश्तेदार। उसमें फिर ऊपवर्ग(sub segment) बनाएं, अपनी और के रिश्तेदार यानी आपके भाई, चाचा, मामा, नाना आदि। दूसरा उप वर्ग बनेगा आपके ससुराल पक्ष के लोग यानी आपके साले, सालियां, साडू, चाचा ससुर, मामा ससुर, आदि। एक वर्ग बनेगा आपके सहपाठी यानी आपके साथ स्कूल और कॉलेज में पड़े हुए लोग, जिनका आज आपको अता-पता मालूम है। हर स्कूल और कॉलेज में आपकी कक्षा के छात्र, आपसे एक साल सीनियर और जूनियर, वहां आपके साथ नाटक करने वाले और आपके साथ खेलने वाले छात्र, 10 साल पहले कॉलेज में आप से झगड़ा करने वाले छात्र को आज अपना मित्र ही मानें। स्कूल, कॉलेज के किसी अध्यापक से भी यदि आप संपर्क में हैं तो उनका भी नाम लिखें। यदि आप हॉस्टल में रहे तो आपके साथ रहने वाले छात्रों के नाम भी लिखें, यदि आप आज उनका अता-पता जानते हैं चाहे वह आपकी कक्षा में ना पढे हों। 

इसके बाद आप वर्ग बनाएं पड़ोसी। आप जहां भी रहे, आपके अडोस-पड़ोस में रहने वाले सब लोगों के नाम लिखें। पड़ोसी आपके घर और दफ्तर दोनों के हो सकते हैं। इसी में आप अपने मकान मालिक और किराएदार का नाम भी लिखें। अगला वर्ग हो सकता है दोस्तों का। इसमें वे नाम लिखें जिनसे आपकी मित्रता हुई, कहीं भी। किसी क्लब में, होटल में, सुबह सैर के समय, रात को पान खाने के समय, कहीं सिनेमा देखते समय, किसी मित्र के घर पार्टी में, आदि जिन लोगों से आपके संबंध बने, वे लोग इस सूची में डालें। वे लोग जो आपको गुरुद्वारे में, मंदिर में मिलते हैं, आपके साथ दूसरे धार्मिक व सामाजिक कार्य करते हैं, उनके नाम भी इसमें लिखें। 

एक वर्ग हो सकता है आपके साथ काम किए हुए लोगों का। ये वे लोग हैं जिन्होंने आपके साथ किसी भी दफ्तर में काम किया। उस दफ्तर में आपके साथ काम करने वाले लोग ही नहीं, बल्कि वे लोग भी जिनसे आप वहां कुछ खरीदते या बेचते थे। उनमें से कुछ लोग जरूर होंगे जिन से आप आज संपर्क कर सकते हो।

एक सूची बन सकती है उन लोगों की जिनसे आप आज कुछ खरीदते हो। इसमें नाम होगा आपके राशन वाले का, दूध सप्लाई करने वाले का, आपकी कार रिपेयर करने वाले का, आपके ड्राई क्लीन वाले का, आपके सिक्योरिटी वाले का, आपके कार बीमा करने वाले का, आपके बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने वाले का, आपके माली का, चौकीदार का, आपके यहां अखबार बांटने वाले का, आपका टेलर, आपका मोबाइल रिपेयर करने वाला, उस रेस्तरां का मालिक या मैनेजर जहां आप अक्सर डिनर करने जाते हो, मंदिर का पुजारी, आदि। 

एक सूची बन सकती है आपके बच्चों के दोस्तों के माता-पिता की  जिन्हें आप जानते हैं। आपके कुछ पेरेंट्स से तो संबंध होंगे, जो आपको बच्चों के स्कूल में मिलते हैं, या जिनके बच्चे आपके बच्चे के जन्मदिन पर आते हैं और अपने जन्मदिन पर आपके बच्चों को बुलाते हैं। वे बच्चे जो आपके बच्चों के साथ खेलते हैं, उनके माता-पिता को भी आप इसी सूची में रखें। 

इसके बाद एक वर्ग आप बना सकते हैं उन लोगों का जो आपके शहर में अलग-अलग कॉलोनी में रहते हैं, जैसे नेहरू नगर, कमला विहार, ज्ञान कुंज, रेलवे रोड, मॉडल टाउन, वगैरह। आपके परिचित वे लोग जो आसपास के दूसरे नगरों में रहते हैं, उनके नाम भी इसी में जोड़ें। 

इसी तरह से आप एक वर्ग बनाएं जिसमें उन तमाम डॉक्टरों के नाम लिखें जिन्हें आप जानते हैं, एक वर्ग हो सकता है केमिस्ट, एक वर्ग किराना दुकानदार, एक वर्ग वकील, एक वर्ग स्कूल के अध्यापक, और इस तरह से आप प्रोफेशन के हिसाब से अलग-अलग सूची बना सकते हैं। 

आप एक सूची में अपनी पत्नी की सहेलियों के पतियों को रख सकते हैं यदि आपकी पत्नी विवाह से पहले आप ही के शहर में रहती थी और वे आपकी बीमा एजेंसी में आपको सहयोग करने को तैयार हूं तो आप उनके साथ पड़ी लड़कियों के नाम उनके दूसरे परिचित पड़ोसी आदि के नाम भी लिख सकते हैं इसी तरह से अनेक वर्ग के हिसाब से सूची बनाने का लाभ यह है कि आपको बहुत से नाम याद आते रहेंगे या सूची कभी न समाप्त होने वाली सूची होगी जिसमें आप निरंतर नाम जुड़ते ही रहेंगे एक बात का ध्यान रहे कि आपको लिस्ट बनाते समय यह नहीं सोचना है कि कौन आदमी आपसे पॉलिसी खरीदेगा कौन नहीं इस प्रकार पहले दो-तीन दिन में सूची जितनी तैयार हो जाए उसके बाद आप सोचें कि क्या इन सब लोगों को मालूम है कि आप जीवन बीमा के एजेंट हैं और आपकी इस क्षेत्र में क्या उपलब्धियां है आपको लगेगा कि इस सूची में ज्यादातर लोग ऐसे हैं जिन्हें यह सब चीजें पता ही नहीं है क्या आपको नहीं लगता कि इन लोगों को बीमे के लिए टटोलना सबसे आसान काम हो सकता है मेरा मानना यह है कि जिन लोगों को आप जानते हैं और जो आपको जानते हैं उनसे भी मैं की बात करके पॉलिसी बेचना सबसे आसान काम होता है सुझाव है कि आप इस तरह की सूची बनाना तुरंत तैयार करें और उन सब लोगों से मिलना शुरू करें मेरा मानना है कि इससे जो परिणाम निकलेगा वह आपकी आशा से बहुत बेहतर होगा आपका पहला काम होना चाहिए कि आप इन सब लोगों को इस बात की सूचना दें कि अपने-अपने फल आम बीमा कंपनी की एजेंसी ले ली है और आप जल्दी ही उनसे संपर्क करेंगे इससे लाभ यह होगा कि आपके परिचित लोगों को मालूम हो जाएगा कि आप इस व्यवसाय से जुड़ चुके हैं हो सकता है कि वह आजकल में ही कोई बीमा पॉलिसी खरीदने वाले हो तो मैं आपसे बात किए बिना निर्णय नहीं लेंगे आप के लिए चुनौती यह है कि यदि आपकी बीमा कंपनी का कोई और एजेंट उनसे पॉलिसी बेचने के लिए संपर्क करें तो उन्हें तुरंत याद आना चाहिए कि आप भी उसी कंपनी के एजेंट हैं आप लोगों को सूचना देने के लिए ईमेल टेलीफोन s.m.s. या पत्र का प्रयोग कर सकते हैं।

नहीं सर कल में घुसे

सामान्यतः एक एजेंट एक निश्चित दायरे में ही काम करता है वह या तो सरकारी नौकरी वालों को जानता है या सब्जी मंडी के व्यापारियों को या किराना के दुकानदारों को या स्कूल के अध्यापकों को या किसी और सर्कल के लोगों को जाहिर है कि वह इन्हीं लोगों को ज्यादा पॉलिसी भेजता है आपको चाहिए कि आप चेस्टा करके किसी नए सर्कल में घुसे आपको विशेष प्रयास करके दूसरे सर्कल के एक या दो नए लोगों को पॉलिसी बेचनी है जिससे उस सर्कल के ही आपको रेफरेंस मिलने चालू हो एक नया सर्कल चालू करने से आपके प्रोस्पेक्ट की संख्या बहुत तेजी से बढ़ सकती है कोई भी नया सर कल आपके पुराने सर्कल में जुड़ाव का ही काम करेगा

स्टॉल

इसके अलावा आप कहना पिया स्टार लगा सकते हैं किसी भी चहल-पहल वाले बाजार में किसी शॉपिंग मॉल में किसी सड़क के किनारे किसी स्कूल में पेरेंट्स मीटिंग के दिन किसी दिवाली मेले में कहीं होली मिलन में कहीं किसी प्रतियोगिता में किसी कॉन्फ्रेंस में और ऐसे ही किसी अन्य स्थान पर ध्यान रहे कि इस तरह के स्टाल पर पॉलिसी बिकती नहीं है सिर्फ पॉलिसी के बारे में पूछताछ होती है यहां आपको ग्राहक का सिर्फ नाम और फोन नंबर लेना है फिर उसके सुझाए गए समय पर उससे मुलाकात करनी है स्टाल पर आपको सिर्फ यह बताना है कि आपके पास सभी प्रकार के प्लान है जो आप उस ग्राहक की आवश्यकता अनुसार बता सकते हैं कोई भी ग्राहक अपने साथ चेक आयु प्रमाण पत्र पहचान पत्र पुरानी पॉलिसी की डिटेल नहीं लेकर घूमता कि आप से पॉलिसी समझकर आपको वही सब कुछ थमा दे

नया पड़ोसी

जब कोई आदमी किसी नए इलाके में जाकर बसता है तो उसे वहां के बारे में कुछ भी मालूम नहीं होता उस समय यदि कोई आगे बढ़ कर खुद ही उससे संबंध बना ले तो वे संबंधित ज्यादा गहरे होते हैं यदि आपके पड़ोस में कोई नया परिवार आकर बसे और आप स्वयं उनसे मिलकर उन्हें बता दें कि यहां गैस की एजेंसी कहां है बिजली और पानी के दफ्तर कहां है डॉक्टर कहां है स्कूल कौन से अच्छे हैं दूध कहां से ताजा मिलता है घरेलू नौकरानी कौन सी बेहतर है आदि अन्य बातें हैं जिनकी उन्हें अभी बहुत जरूरत है तो उनके आपसी संबंध नजदीकी हो जाएंगे कुछ समय बाद आप पूछ सकते हैं कि उनकी कोई बीमा पॉलिसी दूसरे शहर से यहां ट्रांसफर करवानी है क्या यह सर्विस आप उन्हें मुफ्त में देते हैं जब आपके उनसे निकट के संबंध बन गए हैं तो यह तय है कि उनको जब भी बीमा की आवश्यकता होगी वह आपकी और ही देखेंगे

म्युनिसिपालिटी से जानकारी

यदि आपके लिए संभव हो तो जन्म मृत्यु विभाग से पता करें कि किस के परिवार में बच्चे का जन्म हुआ है और किस के परिवार में दुखद घटना हुई है जहां जन्म हुआ है वहां आप एक बधाई पत्र भेज सकते हैं और साथ ही बच्चे के लिए प्लान की जानकारी हो सके तो इसके साथ उस प्लान का ब्रोशर भी भेज दें ध्यान रहे कि आप बच्चे के सेविंग प्लान की बात ही करें रिस्क कवर कि नहीं जिस परिवार में किसी का निधन हुआ है उन्हें आप शोक संदेश भेज सकते हैं और साथ ही है पत्र कि यदि उन्हें किसी बीमा क्लेम से संबंधित मदद चाहिए तो आपने कार्य बिना किसी शुल्क के कर सकते हैं यहां ऐसा नहीं लगना चाहिए कि आप सीधे तौर पर किसी आर्थिक लाभ के लिए ऐसा कर रहे हैं यदि वे लोग पुरानी पॉलिसी में क्लेम के लिए आपकी मदद लेते हैं तो स्वाभाविक है कि उनके परिवार को बाद में बीमा पॉलिसी आप ही बेचेंगे यदि उनका वर्तमान एजेंट अच्छा होता तो इस प्लेन को वही दिलवा रहा होता

अखबार में शोक समाचार

ऐसे ही यदि आपको समाचार पत्र में किसी का शोक समाचार नजर आए तो वहां पत्र लिखकर क्लेम के लिए अपनी सेवाएं निशुल्क ऑफर कर सकते हैं इस तरह से बनाए गए संबंधित दीर्घकाल में व्यापारिक रूप से बहुत लाभदायक साबित होते हैं

बच्चों के स्कूल में प्रतियोगिता

आजकल हर गली मोहल्ले में छोटे-छोटे स्कूल खुले होते हैं यदि आप किसी स्कूल में 50 बच्चों का एक ड्राइंग कंपटीशन करवाएं तो यह ज्यादा खर्च का काम नहीं है इसमें निर्णय का काम आप वहां के अध्यापकों को ही सौंप दे दो या तीन बच्चों को छोटे पुरस्कार भी दे दे उन बच्चों के माता-पिता को आप स्कूल से उनके फोन नंबर लेकर या उन बच्चों के माध्यम से ही बच्चों के प्लान के ब्रॉशर और अपना विजिटिंग कार्ड भेज दें तो वहां पॉलिसी बिकने की संभावना हो सकती है

साहस

आपका प्रयास यह होना चाहिए कि जो भी काम इनमें से आपको नया लग रहा है उसे करें यदि आरंभिक झिझक है तो उसे दूर करें जो काम करने में डर लगे उसे करने का नाम ही साहस है इसे एक रोचक घटना के माध्यम से समझें फौज के एक मेजर और एक पुलिस कमिश्नर में बहस छिड़ गई मेजर ने कहा कि उनके फौजी ज्यादा साहसी होते हैं और कमिश्नर ने कहा उनके सिपाही ज्यादा साहसी हैं अपनी बात साबित करने के लिए मेजर ने एक फौजी को बुलाया और आदेश दिया कि सामने 15 फीट ऊंची दीवार पर चढ़कर कूद जाओ फौजी तुरंत चढ़कर कूद गया तो मेजर बोला इसे कहते हैं साहब पुलिस कमिश्नर ने अपने एक सिपाही को बुलाकर उसे उसी दीवार से कूदने को कहा सिपाही बोला तेरा दिमाग खराब हो गया है क्या कमिश्नर ने कहा इसे कहते हैं साहस

ग्राहक के प्रति आपकी सोच

यह बात बहुत ही महत्वपूर्ण है कि आप ग्राहक के पास क्या सोचकर जा रहे हैं आपके लिए इस ग्राहक के पास यह पहली सेल है या आखरी सेल यह विचार आपकी सारी कार्यप्रणाली को बदल देगा यदि आप आखरी सेल के लिए जा रहे हो तो आपका मकसद किसी भी तरीके से एक पॉलिसी का चेक उठाना है इसके लिए आप कुछ भी झूठ सच बोल सकते हैं सफल बीमा एजेंट इस तरह से काम नहीं करते उनके लिए कोई भी सैलरी नहीं होती हर नहीं ग्राहक को सेल उनके लिए यह एक नई श्रृंखला की शुरुआत होती है वे जानते हैं कि हर संतुष्ट ग्राहक आपके लिए सब एजेंट की तरह होता है यदि एजेंट यह जानता है कि हर नया ग्राहक एक चेन की पहली कड़ी है तो वह ग्राहकों कुछ भी गलत नहीं बता सकता है वह जानता है कि वह जो कह रहा है उस बात को पांच 10 बरस के बाद भी उसे ही संभालना है वह जिस घर में घुस रहा है वहां यह स्थाई रूप से रहने वाला है जो एजेंट 3 बरस से पुराना हो गया है उसका दो तिहाई बीमा पुराने ग्राहकों से ही आता है आप जितने पुराने होते जाते हैं आपके बिजनेस में पुराने ग्राहकों का हिस्सा बढ़ता जाता है यह तभी संभव है जब आप ग्राहकों को पूरी संतुष्टि दें

ग्राहक को जानकारी ना होने का लाभ

यह बात तय है कि किसी भी सेल्समैन को जितनी जानकारी अपने सामान के बारे में होती है उतनी खरीदने वाले को नहीं होती ग्राहक को जिन बातों की जानकारी नहीं है यदि सेल्समैन उनका लाभ उठाना शुरू कर दे तो वह एक बार समान तो भेज सकता है पर अपनी अलग पहचान नहीं बना सकता ग्राहक को हमेशा के लिए अपना नहीं बना सकता यदि आप किसी फर्नीचर की दुकान पर सोफा सेट खरीदने के लिए जाएं तो आप दुकानदार से यह अपेक्षा करते हैं कि वह आपको वह सब बातें भी बताएं जो आप सोफा के बारे में नहीं जानते हैं उसमें लकड़ी है क्वेश्चन है स्प्रिंग है और कपड़ा है दिखाई दे रहा है सिर्फ कपड़ा बाकी सब सामान उसके नीचे छिपा है उन चीजों के बारे में आप नहीं जान सकते हैं वही जानता है क्योंकि उसने बनाया है यदि वह आपको सब कुछ अच्छा अच्छा बता कर दे दे तो आपको किसी भी कमी का पता नहीं चलेगा 6 महीने के बाद जब लकड़ी सो कर उठने लगेगी तो सोफा चटकने लगेगा उस समय आप उस दुकान द्वारका भले ही कुछ ना बिगाड़ पाए लेकिन एक काम तो आप कर ही सकते हैं यदि कोई मित्र आपसे पूछे की बहन की शादी के लिए फर्नीचर खरीदना है कहां से खरीदें तो आप सीधे यही कहेंगे कि फला दुकान को छोड़कर कहीं से भी खरीद लो वह दुकानदार आपको जानकारी ना होने का लाभ उठाकर आप के माध्यम से ग्राहकों की एक चेन नहीं बना पाया यदि आप उसके सामान से संतुष्ट होते तो यह जवाब देते कि श्याम फर्नीचर स्टोर से ही खरीद लो और निश्चिंत हो जाओ ऐसी दुकान से सामान खरीदने के लिए अगर 5% ज्यादा भी खर्च करना पड़े तो लोग खुशी से कर देते हैं क्योंकि उस से मानसिक शांति तो मिल ही रही है ना कहीं आप भी ग्राहक को बीमा की जानकारी ना होने का लाभ तो नहीं उठा रहे बीमा बेचना आपका पैसा है बीमा खरीदना उसका पैसा नहीं है जो काम आप हर रोज करते हो वह कभी-कभी करता है अतः आप ही इसके बारे में ज्यादा जानते हो और ग्राहक आप पर भरोसा करता है आपने अपने लाभ के लिए उसका नुकसान कर दिया तो आपने चैन को पहली कड़ी पर ही समाप्त कर दिया।

मुकाबला अगले एजेंट से है

ग्राहक राय पूछता है कि इतना रुपया सारा ना देने पर 20 साल बाद कितना रुपया मिलेगा प्रायः एजेंट को लगता है कि आज कुछ भी प्रोजेक्शन ग्राहक को दे दो क्या फर्क पड़ता है यदि पॉलिसी मैच्योर होने से पहले यह ग्राहक चल बसा तो किसी को क्या मालूम होगा कि मैंने क्या कहकर पॉलिसी बेची थी यदि यह जिंदा रहा तो मैच्योरिटी पर इसे क्या याद रहेगा कि मैंने 15 साल पहले इसे क्या बताया था कहां पर है मानकर चलें कि आपका मुकाबला इस ग्रह के पास आने वाले अगले एजेंट से है जो कल एक महीने बाद या 1 साल के बाद कभी भी इसके पास आ सकता है कल्पना करें कि कोई एजेंट इस्क्रा के पास आए और बीमा की बात करें यह ग्राहक उससे कहे कि उसे तो अपने लिए एक मनी बैक प्लान चाहिए था जो उसने एक महीना पहले ही आपसे लिया फिर वह ग्राहक उस एजेंट को अपनी पॉलिसी दिखाएं दूसरा एजेंट उसे देखते ही बता दें कि इस प्लान में तो मनी बैंक है ही नहीं यह तो टर्म प्लान है या पेंशन प्लान है तो आपकी क्या विश्वसनीयता रहेगी ग्राहक के दिमाग में ऐसा नहीं है कि जो कुछ आपने उसे पॉलिसी बेचने के लिए बताया वह बात 15 साल के बाद ही खुलेगी। वे पत्ते कभी भी खुल सकते हैं। इसलिए ध्यान रहे कि जल्दी अंडे के लिए मुर्गी को ना काटे आजकल वैसे भी हर पॉलिसी में 15 दिन का फ्री लुक पीरियड रहता है यानी ग्राहक चाहे तो इस दौरान पॉलिसी वापस करके कंपनी से पूरे पैसे ले सकता है यदि ग्राहक को किसी दूसरे एजेंट के माध्यम से असलियत इसी दौरान पता लग गई तो पॉलिसी वापस भी हो सकती है

कितना समय ग्राहक के साथ

एक एजेंट के रूप में आपका जो भी काम है जैसे पॉलिसी बेचना क्रिस्टल लेना कंपनी में जमा करवाना नसीब ग्राहक को पहुंचाना आदि इनमें से सिर्फ एक काम ऐसा है जो आप ही को करना है वह है पॉलिसी बेचने का बाकी के सब काम तो आप किसी थोड़ी सी तनख्वाह वाले कर्मचारी से करवा भी सकते हैं पॉलिसी बेचने का काम ऐसा है जो आप ही को करना है आप सोच कर देखिए प्रतिदिन आप कितना समय ग्राहकों को नई पॉलिसी बताने में लगाते हो 1 साल में 200 पॉलिसी बेचने वाले एजेंट भी बताते हैं कि 1 दिन में 1 घंटे से ज्यादा समय में इस काम में नहीं लगाते आप जानते हैं कि आप ज्यादा समय लगाएं और ज्यादा लोगों से मिले तो ज्यादा पॉलिसी भेज सकते हैं क्या कारण है कि आप ज्यादा लोगों से नहीं मिलते हो इसका प्रमुख कारण है कि लोग आपको मिलने का समय नहीं देते हैं आप कहेंगे कि यदि लोग मिलने को तैयार हो जाएं तो आप 1 दिन में 5 लोगों से भी मिल सकते हैं आपको लगता है कि आपके काम की गति का लीवर किसी और के हाथ में है एक अलग तरीके की बात करते हैं जिससे आप ही तय कर पाएंगे कि कितने लोगों से 1 दिन में मिलना है मान ले कि आपका कोई दोस्त आपसे मिलने के लिए 2 महीने के बाद आया वह प्रॉपर्टी खरीदने बेचने का काम करता है वह आपके पास आकर बैठ गया और अपनी ओर से कोई बात नहीं कर रहा है तो आप उससे क्या बात करेंगे आप की स्थिति में ज्यादातर लोग ऐसे ही बात करेंगे और बताओ आपका प्रॉपर्टी मार्केट कैसा चल रहा है माल ले वह कहे कि आजकल रामनगर की प्रॉपर्टी मार्केट में बड़ा उछाल आ रहा है ऐसी प्राप्ति उपलब्ध है जिसमें 2 साल में अच्छा मुनाफा आ सकता है मैं भी आजकल ऐसे ही सौदे करवाने में व्यस्त हूं यह सुनकर क्या आप चुप बैठेंगे वह यदि अपनी ओर से रुचि ना भी दिखाई तो भी आप उससे पूछें लगेंगे ऐसी कोई प्रॉपर्टी है क्या उसने सिर्फ एक काम किया कि आप की उत्सुकता जगा दी और आप खुद ही उससे कुरेद कुरेद कर पूछ रहे हैं क्या ऐसा काम हम जीवन बीमा में नहीं कर सकते हैं आप किसी ऐसे ग्रह के पास बिना समय लिए चले जाएं जो जानता है कि आप बीमा एजेंट हैं आप भी में की बात अपनी ओर से उससे नहीं करें हम अपनी ट्रेनिंग में है प्रयोग करते हैं एजेंट आकर बताते हैं कि 5 मिनट में ही सामने वाले पूछने लगता है तुम्हारी एजेंसी कैसी चल रही है बीमा कंपनी कैसी चल रही है आप उससे कहीं कि आजकल बहुत ज्यादा प्रेशर है हर रोज नए प्लान आ रहे हैं जिन्हें पहले से ज्यादा लाभ है ग्राहकों को पता नहीं हम हम से पहले कैसे यह मालूम हो जाता है कि ऐसा एक प्लान आया है और वे खुद फोन करके बुलाने लगते हैं सुबह से तीन से तो मिल चुका हूं आपके यहां तो बस चाय पीने के लिए आया हूं यह कह कर आपने उस की उत्सुकता खड़ी कर दी क्या आपको लगता है कि अब ग्राहक बैठेगा आप यदि अपनी ओर से कुछ ना भी कहे तो तो भी चाय आने तक वह खुद आपसे तीन बार पूछ लेगा कि नया प्लान क्या है इसे भी एजेंट के लिए इतना असर तो बहुत है जब ग्राहक खुद आपसे पॉलिसी के बारे में पूछ रहा है एजेंट गलती यही करता है कि वह ग्राहक की ओर से सवाल आने का तो इंतजार ही नहीं करता सीधा अपनी और से पॉलिसी के बारे में बताना शुरू करता है ग्राहक उसे टालने की कोशिश करता है यदि हम उसकी उत्सुकता को इतना बढ़ा दे कि वह खुद हमें कुरेदना चालू कर दें तो हम कितने भी लोगों से मिल सकते हैं और पॉलिसी भेज सकते हैं यदि 1 दिन में हम तीन लोगों से इस तरह से मिलने लगे तो मान कर चलें कि एक पॉलिसी हर रोज आप भेज सकते हैं यदि आप ऐसा करने में सफल हो गए तो आप की गिनती देश के चोटी के एजेंट्स में होने लगेगी आप उन लोगों से तो मिलेंगे ही जो आपको मिलने का अपॉइंटमेंट ले रहे हैं और इस नए तरीके से आप कितने लोगों से मिलेंगे यह आप ही तय कर रहे हैं क्योंकि इसके लिए आपको कोई अपॉइंटमेंट लेना ही नहीं है इस तरह से मिलने का एक लाभ और भी होगा अब क्योंकि आप ही तय कर रहे हैं कि आप किससे मिलेंगे तो आप एक ही इलाके में रहने वाले लोगों से 1 दिन में मिले जिससे आने जाने में ज्यादा समय ना लगे और आप ज्यादा से ज्यादा लोगों से मिल पाए यदि आप अपना समय नई पॉलिसी बेचने में लगाने लगे तो बाकी रूटीन वाले काम आपका एक असिस्टेंट संभाल सकता है मेरा सुझाव है कि आप आज से ही इस तरह लोगों से मिले अपने दायरे को बढ़ाएं और स्वयं अनुभव करें कि आप कितनी बड़ी सफलता की ओर जा रहे हैं यदि मुझे इस पुस्तक के सबसे बढ़िया नुस्खे को चुनना हो तो मैं इसी 1 तरके को चुनूंगा

क्या आप सबसे अच्छी स्थिति मे हैं?

जब एजेंट के हाथ से कोई पॉलिसी छूट जाती है तो उसे लगता है कि उसकी कंपनियां उसकी पॉलिसी में ही कोई कमी है उसे लगता है कि उसकी कंपनी से बेहतर दूसरी कंपनी है जिसका नाम ज्यादा बिकता है किसी को लगता है दूसरी कंपनियों के प्लान उसके प्लान से ज्यादा बेहतर है या कमीशन बेहतर है या पुरस्कार राशि से बेहतर है या कुछ और खुफिया उनमें है जो उसके पास नहीं है कोई भी कंपनी पूर्ण नहीं होती है जिसमें कोई कमी नहीं निकाली जा सके हर कंपनी की अपनी ताकत और कमजोरी होती है कोई भी कंपनी तभी पूर्ण कही जा सकती है जब उसके बारे में ग्राहक किसी भी प्रकार का सवाल ना उठा सके यदि ऐसा हो जाए तो पूरे देश के लोग उसी कंपनी से पॉलिसी लेंगे और सारी प्रतिस्पर्धा समाप्त हो जाएगी ऐसा होना संभव ही नहीं है ऐसे ही कोई प्लान इतना पूर्ण हो कि कोई ग्राहक उसके बारे में कोई प्रश्न ही नहीं बचे तो वह स्थिति सेल्समैन के लिए सर्वश्रेष्ठ होगी क्योंकि पूरा कंपटीशन समाप्त हो जाएगा इसका मतलब बाकी सब प्लान बंद पर यह संभव नहीं है एक क्षण के लिए मान ले कि ऐसी स्थिति आ गई कि आपकी कंपनी पूर्ण हो गई आपके प्लान भी पूर्ण हो गए और आपके प्लान में रिटर्न 20 सबसे ज्यादा हो गया वह स्थिति आ गई जब आप जिस के पास जाएंगे उसे पॉलिसी लेनी ही पड़ेगी क्योंकि ग्राहक के पास कोई विकल्प है ही नहीं ऐसा भी हो सकता है कि आपको लोगों के पास जाना ही ना पड़े और लोग खुद आपके पास लेने के लिए आ रहे हो क्या आपको लगता है कि आपके यह स्थिति सबसे बेहतर है यदि आपको ऐसा लगता है तो यह एक भ्रम है यदि ऐसा हो गया तो क्या आपकी एजेंसी बचेगी जब कंपनी सबसे बढ़िया हो गई प्लान सबसे बढ़िया हो गए लोग लाइन लगाकर खरीदने के लिए आ रहे हैं सारा कंपटीशन समाप्त हो गया तो फिर एजेंट की क्या जरूरत होगी एजेंट की जरूरत किसी भी माल को बेचने के लिए तभी तक है जब तक ग्राहक को उसके लिए समझाने की जरूरत है इन चीजों के बारे में समझाने की जरूरत नहीं होती उनके लिए एजेंट नहीं कुछ थोड़ी तनख्वाह वाले एग्जीक्यूटिव होते हैं क्या कभी बिजली विभाग से कोई आपके पास आता है कनेक्शन के बारे में समझा कर बेचने के लिए क्या कमी जल विभाग के एजेंट आते हैं आपको जल के फायदे समझाने के लिए क्या कभी आप रेल के टिकट बेचने वाला बाबू आपको डिस्काउंट ऑफर करता है और क्या आपको लगता है कि बिजली जलिया रेल का कोई बाबू इतना कमाता है जितना एक बीमा एजेंट कमाता है यदि जीवन बीमा ऐसे ही दिखने लगा तो सब की एजेंसी गई समझो और यदि लोगों को ऐसी स्थिति आने के बाद भी कोई कंपनी एजेंट को रखें तो किन्हे एजेंसी देगा सबसे बढ़िया कंपनी सबसे बढ़िया एजेंट को ही रखेगी क्या आपको लगता है कि आप देश के सबसे बढ़िया एजेंट्स में से एक हैं कंपनी तब यह नियम भी बना सकती है कि वही आदमी एजेंट बनेगा जो एमबीए है या 2 साल का बीमा का कोर्स करके आया है जो कंपटीशन वाली एक परीक्षा पास करेगा फुल टाइम यही काम करेगा या जो ₹200000 के सिक्योरिटी देने को तैयार है आप पता करके देखें कि मारुति या दूसरी बड़ी कार कंपनी अपनी एजेंसी किन लोगों को देती है और किन किन शर्तों पर देती है माल जितनी आसानी से बिकता है एजेंसी उतनी ही मुश्किल से मिलती है इसका अर्थ यही है कि आपका और आपकी कंपनी का एक आदर्श रिश्ता है आप चाहे तो कम अपनी कंपनी के प्लान में बहुत सारी कमियां निकाल सकते हैं और कंपनी चाहे तो आपके काम में उससे भी ज्यादा कमियां निकाल सकती है बेहतर यही है कि आप इस सच्चाई को स्वीकार करें कि ग्राहक से मिलने वाली ना मैं आप का आपकी पॉलिसी का और आपकी कंपनी का तीनों का ही योगदान है आप किसी भी अन्य कंपनी के साथ जुड़े होते तो भी आप ऐसी ही दिक्कतें झेल रहे होते क्योंकि कोई भी कंपनी या प्लान पूर्ण हो ही नहीं सकते

प्रीमियम कैसे बढ़ाएं?

आपके दो या तीन बार ग्राहक के पास जाने के बाद जब यह पॉलिसी के लिए तैयार हो गया और फार्म भरकर चेक काट रहा है उस समय हम ग्राहक से पॉलिसी का साइज कैसे बढ़ा सकते हैं इसकी चर्चा यहां करेंगे एक बात तो तय है कि ग्राहक जितना पैसा बचाता है और जितना वह निवेश कर सकता है वह सारा जीवन बीमा में नहीं देता है यदि वह सारी बचत हमें देता तो फिर प्रीमियम बढ़ाने की बात ही नहीं होती सामान्यता ग्राहक पूरी बचत का 25 से 30% ही देता है इसलिए क्रिस्ट बढ़ाने की पूरी संभावना रहती है 15 से 20% तक कृष्ण आसानी से बढ़ाई जा सकती है इतनी किस्त बढ़ाने का मतलब है उतने ही प्रयास में 15 से 20% आपकी आमदनी बढ़ना पहला प्रयास तो हम इस दिशा में यह करेंगे कि ग्राहक से पूछेंगे कि मासिक किस्त कितनी हो जाए जाहिर सी बात है कि ग्राहक आपसे कहेगा कि उसे तो मासिक नहीं सालाना या छमाही किस्त देनी है हम उससे कहेंगे की किस्त चाहे कैसे भी दे पर महीने की लागत का तो पता चले होता यह है कि जब आप सालाना या छमाही किसकी बात करते हैं तो ग्राहक एक छोटी राशि की ही बात करता है जिसका उसकी आमदनी से कोई संबंध नहीं होता जब यह महीने की लागत के बारे में सोचता है तो वह अपनी आय की तुलना में उस राशि से करता है जो वह दे सकता है इसलिए यदि वह महीने के हिसाब से किस्त बताएगा तो उस राशि की तुलना में बड़ी रकम की बात ही करेगा जो है सालाना बताने में देता अब आप इस रकम को अपने पक्ष में राउंड ऑफ करेंगे राउंड ऑफ का अर्थ है किनारों को ठोक पीटकर गोल करना यदि ग्राहक आपसे कहे कि मुझे डेढ़ हजार रुपए महीना देना है तो हम उस से कहेंगे कि इसका मतलब हुआ ₹18000 सालाना जो आपके लिए याद रखने में मुश्किल होगा इससे हम सीधा 20,000 रखते हैं ना इस बात की संभावना कम है कि ग्राहक इसके लिए मना करेगा क्योंकि यदि ई वह 18000 दे सकता है तो साल का 20,000 भी बिना किसी तकलीफ के दे सकता है।
यह तो हुआ राउंडअप करना अपने पक्ष में राउंड आफ का मतलब इससे एक कदम और आगे हैं एक घटना मुझे याद आ रही है मैं जब mb&f में पढ़ता था जो हमारा पहला क्लास टेस्ट हुआ जिसमें अधिकतम अंक थे 15 यानी साडे सात सात अंक के 2 प्रश्न पास अंक थे 15 मैसेज 7:30 जब प्रश्नपत्र जांचे जाने के बाद हमें मिले तो सब छात्र एक दूसरे से पूछ रहे थे उसके अंक एक सहपाठी से जब हमने उसके अंक पूछे तो वह बोला लॉजिकली फर्स्ट डिवीजन है अब यह बात थोड़ी कन्फ्यूजन करने वाली थी फर्स्ट डिवीजन तो ठीक है पर यह लॉजिक क्या है वह बोला मैंने एक ही प्रश्न का उत्तर लिखा था जिसमें साडे चार अंक आए हैं 7:30 में से 4:30 यानी प्रथम श्रेणी लेकिन वास्तव में देखें तो श्रीमान जी फेल थे आज वैसे पार्टी एक बहुत बड़ी कंपनी में जनरल मैनेजर के पद पर हैं हमें ऐसे लॉजिक भी आने चाहिए यदि ग्राहक आपसे कहे कि मुझे ₹5000 तिमाही देने हैं या 20000 साल आना देने हैं तो यह अपने आप में एक राउंड फिगर है अब हम ग्राहक से कहेंगे कि 20000 सालाना का मतलब है ₹1 महीना यह रकम आपके याद रखने के लिए कठिन होगी तो आप सीधा सा हिसाब रखें कि ₹2000 महीना ऐसा करने से सालाना प्रीमियम 24000 हो गया जो आपको 20% ज्यादा आमदनी देगा यदि आप ट्रेडिशनल प्लान बेच रहे हैं तो आप बीमा राशि और प्रीमियम के बीच के संबंध बनाकर भी पॉलिसी का साइज बढ़ा सकते हैं मान ले कि ग्राहक कहता है कि उसे ₹200000 की पॉलिसी चाहिए जिसका प्रीमियम आपने देखकर बताया कि ₹12614 है आप ग्राहक से कहीं कि यह रकम याद रखने मुश्किल होगी तो आप इसे सीधा ₹15000 कर दें ऐसा करने से आप की बीमा राशि 235000 हो जाएगी लेकिन उससे आपको और ग्राहक को कोई फर्क नहीं पड़ता यदि ग्राहक खुद ही आपसे कहे कि इस पॉलिसी का प्रीमियम ₹15000 कर दे तो आप उसे बताएं कि इससे बीमा राशि बिगड़ जाएगी तो बेहतर है ढाई लाख की बीमा राशि के हिसाब से पॉलिसी बनाई जो याद रखने में आसान रहे आपको यह देखना है कि पॉलिसी का साइज किस तरह से बढ़ सकता है एक बार पॉलिसी जारी होने के बाद किसी को याद रखने की जरूरत नहीं है कि बीमा राशि कितनी थी और किस्त कितनी यह सब चीजें लिखित में रहेंगी या किस टू होने पर कंपनी के नोटिस से आप दोनों को पता चल जाएंगी