रिबेट (Rebate)

रिबेट का अर्थ है एजेंट का आपने कमीशन में से एक हिस्सा ग्राहक को देना यह जीवन बीमा के लिए एक खून की तरह है और बहुत ही विवाद का विषय है कानूनन रिबेट लेना और देना दोनों ही अपराध है रिबेट लेने और देने वाले दोनों ही पक्ष के लोगों का स्वार्थ इस से जुड़ा होता है इसलिए कोई इसकी शिकायत नहीं करता है और यह प्रैक्टिस चलती रहती है पहली बात तो यह है कि रिबेट देना या ना देना आपका अपना निर्णय है किसी और का इसमें दखल नहीं हो सकता यह किसी भी और चीज में डिस्काउंट देने जैसा ही है यह बात तय है कि जो दुकानदार कम डिस्काउंट देकर समान बेचता है वह बाकी दुकानदारों से अलग कुछ सेवा ग्राहकों को देता है जो दूसरे दुकानदार नहीं देते उसकी दुकान पर वैरायटी ज्यादा होगी सेल्समैन पढ़े लिखे होंगे सामान घर तक छुड़वाने की सुविधा होगी क्रेडिट कार्ड भी स्वीकार करता होगा सामान में शिकायत आने पर उसे बदलने में आनाकानी नहीं करेगा आदि आप यदि बिना रैबिट के या कम से कम रेबेट के पॉलिसी बेचना चाहते हैं तो आप अपने अंदर झांक कर देखें कि आप ग्राहक को क्या अलग सर्विस दे रहे हैं जो दूसरे एजेंट नहीं दे रहे हैं क्या आप ज्यादा प्रोफेशनल एजेंट हैं आपकी बीमा के बारे में जानकारी ज्यादा है आपका व्यक्तित्व ज्यादा प्रभावशाली है आप सिर्फ एक पॉलिसी ना बता कर ग्राहक की फाइनेंसियल प्लानिंग कर रहे हैं आप इनकम टैक्स के नियम और दूसरे फाइनेंशियल प्रोडक्ट के बारे में दूसरे एजेंट से ज्यादा जानते हैं आपके पास ग्राहक की पुरानी सब पॉलिसी का रिकॉर्ड है क्या आप लैपटॉप साथ लेकर चलते हैं क्या आप ग्राहक को पहले 1 मिनट में प्रभावित कर सकते हैं यदि आप इन सब मायनों में बाकी एजेंट से अलग है और ग्राहक भी इस बात का अनुभव कर रहा है तो रिबेट का मुद्दा आपकी पॉलिसी के आड़े नहीं आएगा अक्सर समस्या यही रहती है कि हम अपने आपको बाकी एजेंट से अलग नहीं साबित कर पाते और ग्राहक के पास हमें तोलने का एक ही नजरिया रहता है कि हम रिबेट कितनी दे रहे हैं एक उदाहरण ने यदि आपको अपने घर में पेंट करवाना हो तो आप मिस्त्री तलाशने के लिए कहां जाएंगे हर नगर में एक ऐसा चौराहा या बाजार होता है जहां हर सुबह सब मिस्त्री लोग इकट्ठे होते हैं आपके नगर में ऐसी जो भी जगह है आप वही जाएंगे और जो भी सबसे कम रेट मांग रहा है उसे ले आएंगे अपने घर वहां जो भी मिस्त्री खड़ा है वह सिर्फ रेट पर ही बिकता है उसके काम की क्वालिटी हमें मालूम नहीं है अब यदि आपको एक बढ़िया मिस्त्री खोजना है क्योंकि आप की कोठी बहुत महंगी है पेंट भी महंगा ही करवाना है तो कोई भी मिस्त्री नहीं चलेगा आपको मालूम है कि नगर में लालचंद नाम का मिस्त्री बहुत ही बढ़िया है आप उसे खोजते हुए पहुंचते हो और वह कहता है कि 1 महीने तक वह व्यस्त है उसके बाद ही वह आपकी कोठी पर आ सकता है क्या आप उससे यह उम्मीद करेंगे कि वह सबसे सस्ता भी होगा आपके लिए चुनौती यही है कि आप अपने आप को बेहतर दूसरों से अलग एजेंट साबित करें जिससे रिबेट का मुद्दा बहुत बड़ा होकर सामने ना आए यदि आप भीड़ के हिस्से वाले एजेंट है तो आपका मूल्यांकन ऐसे ही होगा कि आप कितनी ज्यादा से ज्यादा रिबेट दे सकते हैं बैंक से मुकाबला आजकल प्रायः सभी बैंक किसी ना किसी कंपनी का बीमा भेजते हैं बैंक में घुसने वाले हर ग्राहक को यह अंदेशा रहता है कि अभी कोई आकर उससे बीमे की बात करेगा यदि आपका कोई ग्राहक बैंक से बीमा लेने की प्लानिंग कर रहा है तो आप उसे समझा सकते हैं कि बैंक में जो अधिकारी आज आपको बीमा बेच रहा है वह पॉलिसी के मैच्योरिटी के समय यहां नहीं होगा और जब वह यहां भी आपकी पॉलिसी की सर्विसिंग जैसे की किस्त जमा करवाना रसीद पहुंचाना लोन दिलवा ना फंड बदलना आदि किसी भी काम में उसकी कोई भूमिका है ही नहीं उसका काम है सिर्फ आपको पॉलिसी बेचना और एक और हो जाना आप ग्राहक से पूछे कि क्या वह चाहेगा कि एक बार पॉलिसी लेने के बाद अगले 10 साल तक पॉलिसी का सारा ध्यान उसे ही रखना पड़े या फिर आप जैसे किसी प्रोफेशनल एजेंट से पॉलिसी ले और सदा के लिए निश्चिंत हो जाए बैंक के लोग यह कहकर पॉलिसी बेचते हैं कि अकेला एजेंट तो पता नहीं कब तक एजेंसी चलाएगा पर बैंक तो सदा यही बना रहेगा आप ग्राहक को बताएं कि पॉलिसी की सर्विस बैंक ने नहीं बल्कि बैंक के लोगों ने देनी है 5 साल बाद वहां बैठे मैनेजर की रुचि इस बात में क्यों होगी कि वह आपकी पॉलिसी का ध्यान रखें बैंक हमेशा सर्विसिंग की बात आते ही ग्राहक को बीमा कंपनी के दफ्तर में भेजता भेज देता है। आपकी व्यक्तिगत सेवाओं में और बैंक की सेवा में बहुत अंतर है, ग्राहक को इस बात का एहसास करवाएं।

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