प्रोस्पैक्टिंग (Prospecting)

प्रोस्पेक्टिंग का मतलब है नए ग्राहकों को ढूढंना। पॉलिसी को बेचना इतना मुश्किल कार्य नहीं है जितना कि नए ग्राहकों को ढूंढना जिनको पॉलिसी बेची जा सके। इसके लिए हर बीमा विशेषज्ञ के पास अपना-अपना एक समाधान हो सकता है। मैं बिल्कुल साधारण तरीके से आपको प्रोस्पेक्टिंग के बारे मे बताने वाला हूं, मुझे लगता है कि आप आसानी से इन सभी बातों को समझकर ज्यादा लाभ उठा सकते हैं।  

आप सभी अभिकर्ता अपने सभी जानने वालों की एक लिस्ट बनाएं। हमारी ट्रेनिंग क्लास में जब एजेंट से यह पूछा जाता है कि इस तरह की लिस्ट बनाने में कितना समय लगेगा तो कोई एजेंट बोलता है 2 घंटे, कोई कहता है 2 दिन, कोई 1 सप्ताह की बात करता है। फिर उनसे पूछा जाता है कि क्या इसके बाद कोई भी ऐसा आदमी नहीं बचेगा जिसको आप जानते हों और जिसका नाम लिस्ट में नहीं है, तो वे सोच में पड़ जाते हैं। ध्यान रहे कि हमें अपने सभी जानने वालों की लिस्ट बनानी है, कंप्यूटर पर या कागज पर। मेरा मानना यह है कि यह एक ऐसी लिस्ट है जो कभी समाप्त नहीं होगी। आप आज यदि दो सौ नाम इसमें लिख भी लेंगे तो कल आपको कुछ और नाम याद आएंगे और हर रोज नए नाम याद आते ही रहेंगे। इस सूची में निरंतर नाम जुड़ते रहेंगे। 

आप इस लिस्ट को जितना बड़ा कर लेंगे आप की पॉलिसी बेचने की संभावना उतनी ही बढ़ती चली जाएगी। इस सूची को बढ़ाने का बढ़िया तरीका यह है कि आप उसे सेगमेंट के अनुसार बनाएं, एक-एक वर्ग के अनुसार। उदाहरण के लिए आप एक वर्ग(segment) बनाएं रिश्तेदार। उसमें फिर ऊपवर्ग(sub segment) बनाएं, अपनी और के रिश्तेदार यानी आपके भाई, चाचा, मामा, नाना आदि। दूसरा उप वर्ग बनेगा आपके ससुराल पक्ष के लोग यानी आपके साले, सालियां, साडू, चाचा ससुर, मामा ससुर, आदि। एक वर्ग बनेगा आपके सहपाठी यानी आपके साथ स्कूल और कॉलेज में पड़े हुए लोग, जिनका आज आपको अता-पता मालूम है। हर स्कूल और कॉलेज में आपकी कक्षा के छात्र, आपसे एक साल सीनियर और जूनियर, वहां आपके साथ नाटक करने वाले और आपके साथ खेलने वाले छात्र, 10 साल पहले कॉलेज में आप से झगड़ा करने वाले छात्र को आज अपना मित्र ही मानें। स्कूल, कॉलेज के किसी अध्यापक से भी यदि आप संपर्क में हैं तो उनका भी नाम लिखें। यदि आप हॉस्टल में रहे तो आपके साथ रहने वाले छात्रों के नाम भी लिखें, यदि आप आज उनका अता-पता जानते हैं चाहे वह आपकी कक्षा में ना पढे हों। 

इसके बाद आप वर्ग बनाएं पड़ोसी। आप जहां भी रहे, आपके अडोस-पड़ोस में रहने वाले सब लोगों के नाम लिखें। पड़ोसी आपके घर और दफ्तर दोनों के हो सकते हैं। इसी में आप अपने मकान मालिक और किराएदार का नाम भी लिखें। अगला वर्ग हो सकता है दोस्तों का। इसमें वे नाम लिखें जिनसे आपकी मित्रता हुई, कहीं भी। किसी क्लब में, होटल में, सुबह सैर के समय, रात को पान खाने के समय, कहीं सिनेमा देखते समय, किसी मित्र के घर पार्टी में, आदि जिन लोगों से आपके संबंध बने, वे लोग इस सूची में डालें। वे लोग जो आपको गुरुद्वारे में, मंदिर में मिलते हैं, आपके साथ दूसरे धार्मिक व सामाजिक कार्य करते हैं, उनके नाम भी इसमें लिखें। 

एक वर्ग हो सकता है आपके साथ काम किए हुए लोगों का। ये वे लोग हैं जिन्होंने आपके साथ किसी भी दफ्तर में काम किया। उस दफ्तर में आपके साथ काम करने वाले लोग ही नहीं, बल्कि वे लोग भी जिनसे आप वहां कुछ खरीदते या बेचते थे। उनमें से कुछ लोग जरूर होंगे जिन से आप आज संपर्क कर सकते हो।

एक सूची बन सकती है उन लोगों की जिनसे आप आज कुछ खरीदते हो। इसमें नाम होगा आपके राशन वाले का, दूध सप्लाई करने वाले का, आपकी कार रिपेयर करने वाले का, आपके ड्राई क्लीन वाले का, आपके सिक्योरिटी वाले का, आपके कार बीमा करने वाले का, आपके बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने वाले का, आपके माली का, चौकीदार का, आपके यहां अखबार बांटने वाले का, आपका टेलर, आपका मोबाइल रिपेयर करने वाला, उस रेस्तरां का मालिक या मैनेजर जहां आप अक्सर डिनर करने जाते हो, मंदिर का पुजारी, आदि। 

एक सूची बन सकती है आपके बच्चों के दोस्तों के माता-पिता की  जिन्हें आप जानते हैं। आपके कुछ पेरेंट्स से तो संबंध होंगे, जो आपको बच्चों के स्कूल में मिलते हैं, या जिनके बच्चे आपके बच्चे के जन्मदिन पर आते हैं और अपने जन्मदिन पर आपके बच्चों को बुलाते हैं। वे बच्चे जो आपके बच्चों के साथ खेलते हैं, उनके माता-पिता को भी आप इसी सूची में रखें। 

इसके बाद एक वर्ग आप बना सकते हैं उन लोगों का जो आपके शहर में अलग-अलग कॉलोनी में रहते हैं, जैसे नेहरू नगर, कमला विहार, ज्ञान कुंज, रेलवे रोड, मॉडल टाउन, वगैरह। आपके परिचित वे लोग जो आसपास के दूसरे नगरों में रहते हैं, उनके नाम भी इसी में जोड़ें। 

इसी तरह से आप एक वर्ग बनाएं जिसमें उन तमाम डॉक्टरों के नाम लिखें जिन्हें आप जानते हैं, एक वर्ग हो सकता है केमिस्ट, एक वर्ग किराना दुकानदार, एक वर्ग वकील, एक वर्ग स्कूल के अध्यापक, और इस तरह से आप प्रोफेशन के हिसाब से अलग-अलग सूची बना सकते हैं। 

आप एक सूची में अपनी पत्नी की सहेलियों के पतियों को रख सकते हैं यदि आपकी पत्नी विवाह से पहले आप ही के शहर में रहती थी और वे आपकी बीमा एजेंसी में आपको सहयोग करने को तैयार हूं तो आप उनके साथ पड़ी लड़कियों के नाम उनके दूसरे परिचित पड़ोसी आदि के नाम भी लिख सकते हैं इसी तरह से अनेक वर्ग के हिसाब से सूची बनाने का लाभ यह है कि आपको बहुत से नाम याद आते रहेंगे या सूची कभी न समाप्त होने वाली सूची होगी जिसमें आप निरंतर नाम जुड़ते ही रहेंगे एक बात का ध्यान रहे कि आपको लिस्ट बनाते समय यह नहीं सोचना है कि कौन आदमी आपसे पॉलिसी खरीदेगा कौन नहीं इस प्रकार पहले दो-तीन दिन में सूची जितनी तैयार हो जाए उसके बाद आप सोचें कि क्या इन सब लोगों को मालूम है कि आप जीवन बीमा के एजेंट हैं और आपकी इस क्षेत्र में क्या उपलब्धियां है आपको लगेगा कि इस सूची में ज्यादातर लोग ऐसे हैं जिन्हें यह सब चीजें पता ही नहीं है क्या आपको नहीं लगता कि इन लोगों को बीमे के लिए टटोलना सबसे आसान काम हो सकता है मेरा मानना यह है कि जिन लोगों को आप जानते हैं और जो आपको जानते हैं उनसे भी मैं की बात करके पॉलिसी बेचना सबसे आसान काम होता है सुझाव है कि आप इस तरह की सूची बनाना तुरंत तैयार करें और उन सब लोगों से मिलना शुरू करें मेरा मानना है कि इससे जो परिणाम निकलेगा वह आपकी आशा से बहुत बेहतर होगा आपका पहला काम होना चाहिए कि आप इन सब लोगों को इस बात की सूचना दें कि अपने-अपने फल आम बीमा कंपनी की एजेंसी ले ली है और आप जल्दी ही उनसे संपर्क करेंगे इससे लाभ यह होगा कि आपके परिचित लोगों को मालूम हो जाएगा कि आप इस व्यवसाय से जुड़ चुके हैं हो सकता है कि वह आजकल में ही कोई बीमा पॉलिसी खरीदने वाले हो तो मैं आपसे बात किए बिना निर्णय नहीं लेंगे आप के लिए चुनौती यह है कि यदि आपकी बीमा कंपनी का कोई और एजेंट उनसे पॉलिसी बेचने के लिए संपर्क करें तो उन्हें तुरंत याद आना चाहिए कि आप भी उसी कंपनी के एजेंट हैं आप लोगों को सूचना देने के लिए ईमेल टेलीफोन s.m.s. या पत्र का प्रयोग कर सकते हैं।

नहीं सर कल में घुसे

सामान्यतः एक एजेंट एक निश्चित दायरे में ही काम करता है वह या तो सरकारी नौकरी वालों को जानता है या सब्जी मंडी के व्यापारियों को या किराना के दुकानदारों को या स्कूल के अध्यापकों को या किसी और सर्कल के लोगों को जाहिर है कि वह इन्हीं लोगों को ज्यादा पॉलिसी भेजता है आपको चाहिए कि आप चेस्टा करके किसी नए सर्कल में घुसे आपको विशेष प्रयास करके दूसरे सर्कल के एक या दो नए लोगों को पॉलिसी बेचनी है जिससे उस सर्कल के ही आपको रेफरेंस मिलने चालू हो एक नया सर्कल चालू करने से आपके प्रोस्पेक्ट की संख्या बहुत तेजी से बढ़ सकती है कोई भी नया सर कल आपके पुराने सर्कल में जुड़ाव का ही काम करेगा

स्टॉल

इसके अलावा आप कहना पिया स्टार लगा सकते हैं किसी भी चहल-पहल वाले बाजार में किसी शॉपिंग मॉल में किसी सड़क के किनारे किसी स्कूल में पेरेंट्स मीटिंग के दिन किसी दिवाली मेले में कहीं होली मिलन में कहीं किसी प्रतियोगिता में किसी कॉन्फ्रेंस में और ऐसे ही किसी अन्य स्थान पर ध्यान रहे कि इस तरह के स्टाल पर पॉलिसी बिकती नहीं है सिर्फ पॉलिसी के बारे में पूछताछ होती है यहां आपको ग्राहक का सिर्फ नाम और फोन नंबर लेना है फिर उसके सुझाए गए समय पर उससे मुलाकात करनी है स्टाल पर आपको सिर्फ यह बताना है कि आपके पास सभी प्रकार के प्लान है जो आप उस ग्राहक की आवश्यकता अनुसार बता सकते हैं कोई भी ग्राहक अपने साथ चेक आयु प्रमाण पत्र पहचान पत्र पुरानी पॉलिसी की डिटेल नहीं लेकर घूमता कि आप से पॉलिसी समझकर आपको वही सब कुछ थमा दे

नया पड़ोसी

जब कोई आदमी किसी नए इलाके में जाकर बसता है तो उसे वहां के बारे में कुछ भी मालूम नहीं होता उस समय यदि कोई आगे बढ़ कर खुद ही उससे संबंध बना ले तो वे संबंधित ज्यादा गहरे होते हैं यदि आपके पड़ोस में कोई नया परिवार आकर बसे और आप स्वयं उनसे मिलकर उन्हें बता दें कि यहां गैस की एजेंसी कहां है बिजली और पानी के दफ्तर कहां है डॉक्टर कहां है स्कूल कौन से अच्छे हैं दूध कहां से ताजा मिलता है घरेलू नौकरानी कौन सी बेहतर है आदि अन्य बातें हैं जिनकी उन्हें अभी बहुत जरूरत है तो उनके आपसी संबंध नजदीकी हो जाएंगे कुछ समय बाद आप पूछ सकते हैं कि उनकी कोई बीमा पॉलिसी दूसरे शहर से यहां ट्रांसफर करवानी है क्या यह सर्विस आप उन्हें मुफ्त में देते हैं जब आपके उनसे निकट के संबंध बन गए हैं तो यह तय है कि उनको जब भी बीमा की आवश्यकता होगी वह आपकी और ही देखेंगे

म्युनिसिपालिटी से जानकारी

यदि आपके लिए संभव हो तो जन्म मृत्यु विभाग से पता करें कि किस के परिवार में बच्चे का जन्म हुआ है और किस के परिवार में दुखद घटना हुई है जहां जन्म हुआ है वहां आप एक बधाई पत्र भेज सकते हैं और साथ ही बच्चे के लिए प्लान की जानकारी हो सके तो इसके साथ उस प्लान का ब्रोशर भी भेज दें ध्यान रहे कि आप बच्चे के सेविंग प्लान की बात ही करें रिस्क कवर कि नहीं जिस परिवार में किसी का निधन हुआ है उन्हें आप शोक संदेश भेज सकते हैं और साथ ही है पत्र कि यदि उन्हें किसी बीमा क्लेम से संबंधित मदद चाहिए तो आपने कार्य बिना किसी शुल्क के कर सकते हैं यहां ऐसा नहीं लगना चाहिए कि आप सीधे तौर पर किसी आर्थिक लाभ के लिए ऐसा कर रहे हैं यदि वे लोग पुरानी पॉलिसी में क्लेम के लिए आपकी मदद लेते हैं तो स्वाभाविक है कि उनके परिवार को बाद में बीमा पॉलिसी आप ही बेचेंगे यदि उनका वर्तमान एजेंट अच्छा होता तो इस प्लेन को वही दिलवा रहा होता

अखबार में शोक समाचार

ऐसे ही यदि आपको समाचार पत्र में किसी का शोक समाचार नजर आए तो वहां पत्र लिखकर क्लेम के लिए अपनी सेवाएं निशुल्क ऑफर कर सकते हैं इस तरह से बनाए गए संबंधित दीर्घकाल में व्यापारिक रूप से बहुत लाभदायक साबित होते हैं

बच्चों के स्कूल में प्रतियोगिता

आजकल हर गली मोहल्ले में छोटे-छोटे स्कूल खुले होते हैं यदि आप किसी स्कूल में 50 बच्चों का एक ड्राइंग कंपटीशन करवाएं तो यह ज्यादा खर्च का काम नहीं है इसमें निर्णय का काम आप वहां के अध्यापकों को ही सौंप दे दो या तीन बच्चों को छोटे पुरस्कार भी दे दे उन बच्चों के माता-पिता को आप स्कूल से उनके फोन नंबर लेकर या उन बच्चों के माध्यम से ही बच्चों के प्लान के ब्रॉशर और अपना विजिटिंग कार्ड भेज दें तो वहां पॉलिसी बिकने की संभावना हो सकती है

साहस

आपका प्रयास यह होना चाहिए कि जो भी काम इनमें से आपको नया लग रहा है उसे करें यदि आरंभिक झिझक है तो उसे दूर करें जो काम करने में डर लगे उसे करने का नाम ही साहस है इसे एक रोचक घटना के माध्यम से समझें फौज के एक मेजर और एक पुलिस कमिश्नर में बहस छिड़ गई मेजर ने कहा कि उनके फौजी ज्यादा साहसी होते हैं और कमिश्नर ने कहा उनके सिपाही ज्यादा साहसी हैं अपनी बात साबित करने के लिए मेजर ने एक फौजी को बुलाया और आदेश दिया कि सामने 15 फीट ऊंची दीवार पर चढ़कर कूद जाओ फौजी तुरंत चढ़कर कूद गया तो मेजर बोला इसे कहते हैं साहब पुलिस कमिश्नर ने अपने एक सिपाही को बुलाकर उसे उसी दीवार से कूदने को कहा सिपाही बोला तेरा दिमाग खराब हो गया है क्या कमिश्नर ने कहा इसे कहते हैं साहस

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