अंडरराइटिंग (Underwriting)

अंडरराइटिंग का अर्थ होता है ग्राहक के प्रस्ताव को कंपनी द्वारा स्वीकार या अस्वीकार किया जाना ग्राहक पॉलिसी खरीदने के लिए बीमा कंपनी में आवेदन करता है और कंपनी उसे पॉलिसी देने या ना देने का निर्णय लेती है अंडरराइटिंग करते समय दो चीजें मुख्यता देखी जाती हैं एक है फाइनेंस सिलेंडर राइटिंग और दूसरी है मेडिकल अंडरराइटिंग फाइनेंसियल अंडरराइटिंग का अर्थ है कि कंपनी इस बात को तय करें कि ग्राहक की आर्थिक स्थिति ऐसी है भी या नहीं कि उसे इतना बीमा दिया जा सके बीमा कभी भी लाभ के लिए प्रयोग नहीं हो सकता है यह सिर्फ नुकसान की भरपाई करता है इसे समझने के लिए कार बीमा का उदाहरण लें यदि कार की कीमत 300000 है तो उसका 500000 का बीमा नहीं हो सकता भले ही ग्राहक 500000 के हिसाब से किस्त देने को तैयार हो इसका कारण है कि यदि ऐसा किया गया तो क्लेम आना निश्चित है ग्राहक लाभ कमाने के लिए कभी भी कार को खुद ही नष्ट कर देगा मकान दुकान जहाज कार का बीमा करना हो तो फाइनेंस सिलेंडर राइटिंग आसान है क्योंकि इन चीजों की कीमत की जानकारी प्राप्त करना आसान है जीवन बीमा में यह काम कठिन हो जाता है आप यह नहीं कह सकते कि वह आदमी ₹500000 का है इसलिए आम आदमी की कीमत का अनुमान नहीं लगाते बल्कि उसकी कमाने की क्षमता का अनुमान लगाते हैं आदमी जीते जी जितना कमा रहा है उसके मरने के बाद परिवार को उससे ज्यादा नहीं मिलना चाहिए इसलिए ऐसा संभव नहीं है कि एक आदमी जो ₹20000 महीना कमाता है वह चाहेगी उसका 10000000 रुपए का बीमा हो जाए भले ही वह किस्त पूरी देने को तैयार हो इसलिए किसी ग्रह की आर्थिक स्थिति का अनुमान लगाने के लिए उसकी इनकम टैक्स रिटर्न की कॉपी या अन्य संपत्ति का ब्यौरा चाहिए होता है यह सब कागजात ग्राहक को ही देने होते हैं मैं जब सेल्स में था तो एक बार अपने क्लिक के साथ उसके एक ग्राहक के पास गया उस ग्राहक ने जितने भी में के लिए आवेदन किया था उसके हिसाब से कागजों में उसकी आमदनी बहुत कम थी हमें उसके केस को पुष्ट करने के लिए उसकी इनकम टैक्स रिटर्न के अलावा उसकी संपत्ति के प्रमाण भी चाहिए थे दिल्ली की आजादपुर सब्जी मंडी के इस व्यापारी ने इसका बहुत बुरा माना और तर्क दिया कि पिछले साल ही उसने बैंक में फिक्स डिपॉजिट दिया था उस समय यदि बैंक वालों ने यह सब डिटेल नहीं मांगी तो अब बीमा कंपनी क्यों मांग रही है हमने उसे स्पष्ट शब्दों में समझाएं कि यदि वह कहीं पर भी अपना पैसा सिर्फ ब्याज कमाने के हिसाब से जमा करवाएगा तो बैंक या कोई और संस्था यह सब प्रमाण नहीं मांगेगी अब भी बीमा कंपनी उससे यह कागजात इसलिए नहीं मांग रही कि उसने पैसा जमा करवाया है आया संपत्ति का प्रमाण इसलिए मांगा जा रहा है क्योंकि बहुत थोड़े से प्रीमियम के बदले कंपनी उससे 20 से 25 * रिस्क कवर देने का निर्णय कर रही है अब यदि एक लाख के बदले कंपनी की देनदारी 2000000 की है तो यह सब मांगना और अपने आप को संतुष्ट करना कंपनी का हक है ग्राहक को बात समझ में आ गई और उसने सब कागजात देकर अपनी पॉलिसी जारी करवा ली तो किसी भी तरह की आयत संपत्ति का ब्यौरा मांगना एजेंट के लिए शर्मिंदगी या गुनाह का काम नहीं है यह कैसी आवश्यक जानकारी है जो दुनिया की कोई भी बीमा कंपनी उसे बीमा देते समय मांगेगी यदि ग्राहक को यह समझ में आ जाएगी यह जानकारी उसकी तहकीकात करने के लिए नहीं मांगी जा रही बल्कि हर बीमा कंपनी में यह नियम ही होता है तो उसे यह सब कागजात देते समय हिचक नहीं होगी साथ ही आप ग्राहक से पूछे कि क्या वह चाहेगा कि उसकी पॉलिसी में फर्जी कागज लगा दिए जाएं क्योंकि पॉलिसी जारी करने के लिए जो पेपर चाहिए उनसे छूट तो मिल ही नहीं सकती आप कहे कि आप चाहते हैं कि ईमानदारी से पॉलिसी जारी हो इसीलिए सारे पेपर उससे ही मांग रहे हैं कोई भी ग्राहक यह नहीं चाहेगा कि उसकी पॉलिसी फर्जी कागजात के आधार पर बनकर आए

मेडिकल अंडरराइटिंग

मेडिकल अंडरराइटिंग में होती है जब बीमा कंपनी या निर्णय लेती है कि यह आदमी शारीरिक रूप से इस योग्य है कि नहीं कि इसका इतनी रकम का बीमा किया जा सके ऐसा नहीं कि कोई भी व्यक्ति जो किस्त भर सकता है उसका बीमा हो ही जाएगा स्वास्थ्य को जांचने के लिए ग्राहक को डॉक्टर के पास भेजा जाता है अलग-अलग तरह के टेस्ट करवाने के लिए एजेंट के लिए सुविधाजनक स्थिति उस समय होती है जब बीमा पॉलिसी के लिए ग्राहक की डॉक्टरी जांच करवानी होती है अक्सर एजेंट इस मानसिकता से ग्राहक के पास जाता है जैसे कि वह कोई गलत काम कर रहा हो या ग्राहक के साथ धोखाधड़ी कर रहा हो एजेंट को चाहिए कि वह सीधे जाकर साफ तौर से ग्राहक को बताएं कि इस पॉलिसी के लिए उसके मेडिकल चेकअप की जरूरत है यदि ग्राहक यह तर्क दे कि कोई दूसरा एजेंट तो इसके बिना भी पॉलिसी करने को तैयार है तो उसे समझाएं कि मेडिकल टेस्ट करवाने या ना करवाने का निर्णय एजेंट के हाथ में नहीं है बल्कि बीमा कंपनी के नियमों के तहत ही है यदि कोई एजेंट इसके बिना बीमा करने को तैयार है तो इसका यही अर्थ है कि वह नकली मेडिकल रिपोर्ट पॉलिसी के साथ लगा कर भेजेगा अब ग्राहक से पूछे कि क्या वह चाहेगा कि किसी अनहोनी की स्थिति में उसका क्लेम इस कारण से खारिज हो जाए कि मेडिकल रिपोर्ट सही नहीं थी संभवत कोई भी ग्राहक इसके लिए सहमत नहीं होगा और मेडिकल के लिए मान जाएगा एक दूसरा तरीका ग्राहक को समझाने का यह है कि उससे कहे कि जो भी बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो पूर्ण रूप से स्वस्थ ना होने के बावजूद पॉलिसी लेना चाहते हैं आप तो फिर भी स्वास्थ्य बीमा कंपनी को ऐसे लोगों के लिए मेडिकल का नियम बनाना पड़ता है पर क्योंकि नियम सबके लिए बनते हैं तो आपको भी थोड़ी तकलीफ देनी होगी ग्राहक को यह सुनकर अच्छा लगेगा कि वह तो स्वस्थ है और दूसरे लोगों के लिए बनाए गए नहीं एम के कारण ही उसे मेडिकल करवाना है अब यदि ग्रह की मेडिकल रिपोर्ट ठीक आ जाए तो पॉलिसी तुरंत जारी कर दी जाएगी यदि मेडिकल रिपोर्ट में गड़बड़ दिखाई दी तो ग्राहक आप से यह शिकायत नहीं करेगा कि आपने उसे स्वस्थ बताया था मेडिकल रिपोर्ट के बारे में यह जानना बहुत जरूरी है कि प्राइस तब कंपनियां इस नियम से काम करती हैं कि यह रिपोर्ट उनके पास सीलबंद लिफाफे में ही पहुंचने चाहिए खुली हुई रिपोर्ट मान्य नहीं होती है कुछ कंपनियां यह सुविधा देती है कि यदि ग्राहक चाहे तो पॉलिसी जारी होने के बाद कंपनी से अपने मेडिकल रिपोर्ट की कॉपी मंगवा सकता है यदि रिपोर्ट में कुछ असामान्य हो तो कंपनी सीधे ग्राहक को ना भेजकर रिपोर्ट की कॉपी उसके डॉक्टर को भेज सकती है एक बात और ध्यान देने योग्य है कि यदि किसी ग्राहक से बीमा कंपनी मेडिकल जांच की मांग करती है और वह ग्राहक चाहे कि उसका बीमा कम कर दिया जाए जिससे उसे मेडिकल जांच ना करवानी पड़े तो ऐसा संभव नहीं है यदि एक बार मेडिकल जांच की मांग कर ली गई तो फिर वह ग्राहक इतना भी छोटा बीमा करवाना चाहिये बजाज तो करवानी ही पड़ेगी बीमा कंपनी को यह अधिकार है कि वह नॉन मेडिकल लिमिट वाले क्ति से भी मेडिकल मांग कर सकती है कंपनी के ऐसा करने का कारण अक्सर यह रहता है कि फॉर्म में लिखी ग्राहक की ऊंचाई और वजन में अनुपात असामान्य है या कोई ऐसी पारिवारिक बीमारी लिखी है जिससे ग्राहक के भी प्रभावित होने की आशंका है या फिर फॉर्म में लिखा है कि ग्राहक को शराब सिगरेट या कोई और नशा करने की ऐसी आदत है जिससे उसके स्वास्थ्य के खराब होने की आशंका है या ग्राहक किसी ऐसे देश की यात्रा करके आया है जहां कोई महामारी फैली हुई है अब ग्राहक को यदि बीमा करवाना है तो वह जांच करवानी ही पड़ेगी कंपनी बिना किसी कारण से भी नॉन मेडिकल वाले ग्राहक को मेडिकल जांच करवाने के लिए कह सकती है क्योंकि कंपनी का अधिकार है

अंडरराइटिंग निर्णय

मेडिकल एंड राइटिंग के निर्णय चार प्रकार से हो सकते हैं पहला तो यह कि मेडिकल रिपोर्ट की जांच के बाद कंपनी सीधे पॉलिसी जारी कर दे इसे कहते हैं स्टैंडर्ड रेट पर पॉलिसी जारी करना दूसरा निर्णय हो सकता है कि कंपनी ग्राहक को उतना ही लाभ देने के लिए कुछ ज्यादा प्रीमियम चार्ज करें ऐसा तब होता है जब यह मान लिया जाए कि वह अपनी आयु के सामान्यता स्वस्थ आदमी जितना स्वस्थ नहीं है तीसरी स्थिति होती है जब कुछ समय पहले ही हुए किसी ऑपरेशन आदि के कारण बीमा कंपनी के लिए तुरंत निर्णय लेना कठिन हो तब वह ग्राहक का पैसा वापस लौट आते हुए पॉलिसी को 6 महीने या साल भर के लिए पोस्टपोन कर देती है चौथा निर्णय हो सकता है जब कंपनी ग्राहक का पैसा लुटाते हुए बता दें कि वह इस ग्राहक का कभी भी बीमा नहीं करना चाहेंगे पहला निर्णय यानी पॉलिसी का स्टैंडर्ड रेट पर जारी होना तो कोई समस्या है ही नहीं दूसरे केस में जब एक्स्ट्रा प्रीमियम लग जाए तो ग्राहक को समझाना कठिन हो सकता है आइए चर्चा करते हैं कि इस स्थिति में हम ग्राहक को कैसे समझाएं सामान्यतः ग्राहक की पहली प्रतिक्रिया होती है कि आपकी कंपनी उसके साथ नाजायज कर रही है और दूसरी कोई भी कंपनी उसे सामान्य रेट में ही पॉलिसी दे देगी हम ग्राहक से बात करेंगे कि सब कंपनियों के अंडरराइटिंग के नियम लगभग एक जैसे होते हैं इसलिए यदि एक कंपनी ने जांच कर एक्स्ट्रा प्रीमियम लगाया है तो पूरी संभावना है कि दूसरी कम कोई भी कंपनी ऐसा ही करेगी हालांकि एक्स्ट्रा प्रीमियम में थोड़ा बहुत अंतर हो सकता है दूसरे हम ग्राहक को समझाएंगे कि यदि उसने हमारी पॉलिसी में एक्स्ट्रा प्रीमियम ना देकर किसी और कंपनी में बीमा के लिए आवेदन किया तो वह उस कंपनी के फॉर्म में वहां क्या लिखेगा जहां पूछा होता है कि आप के आवेदन पर किसी बीमा कंपनी ने एक्स्ट्रा प्रीमियम तो नहीं लगाया यदि वह इसमें हां लिखेगा तो हमारे निर्णय का हवाला देगा तो वह कंपनी ज्यादा चुकाने होकर जांच करेगी और पूरी संभावना है कि वह भी ज्यादा प्रीमियम की मांग करेगी यदि उसने वहां ना लिखा तो पॉलिसी पहले दिन से ही फर्जी हो गई ऐसी पॉलिसी जो गलत जानकारी देकर खरीदी गई है उसमें किसी क्लेम के रिजेक्ट होने की संभावना बहुत ज्यादा है इसलिए ग्राहक के पक्ष में यही बेहतर है कि वह सच्चाई को स्वीकार करें और जो भी ज्यादा प्रीमियम मांगा गया है उसे दे और बेफिक्र हो कर रहे यदि मेडिकल के बाद किसी ग्रह की पॉलिसी कंपनी द्वारा नकार दी जाए तो यह सीधे-सीधे बिजनेस का नुकसान है एजेंट के लिए स्थिति में आप ग्राहक को समझाएं कि महोदय हमने पॉलिसी के लिए पांच 10 साल देरी से आवेदन किया यदि यह आवेदन पहले किया गया होता तो यह स्थिति नहीं आती हम आपके लिए बीमा खरीदने का विकल्प बंद हो चुका है अच्छी बात यह है कि वह विकल्प परिवार में बाकी लोगों के लिए तो खुला है इसलिए बेहतर होगा कि आप इसी पैसे से परिवार के बाकी लोगों के लिए पॉलिसी ले ले परिवार में पत्नी बेटे बेटी के नाम से पॉलिसी खरीद कर खुद प्रीमियम देकर भी वह टैक्स छूट तो ले ही सकता है

मेडिकल टेस्ट कैसे करवाएं

जब आपको किसी पॉलिसी के लिए ग्राहक की मेडिकल जांच करवानी हो तो आप किन किन बातों का ध्यान रखेंगे सबसे पहली बात तो यह है कि क्या आपको मालूम है कि वह टेस्ट किस चीज का है और उसमें क्या जांच की जाती है एक प्रोफेशनल एजेंट के रूप में आप से यह अपेक्षा की जाती है कि आपको इसकी जानकारी होनी चाहिए यदि पहले से नहीं जानते हैं तो ग्राहक को बताने से पहले इसके बारे में पता करके जाएं बेहतर होगा आप इन सब टेस्ट की डिटेल अपनी फाइल में लगाएं आपको यह भी ज्ञात होना चाहिए कि इस टेस्ट के लिए खाली पेट ही जाना जरूरी है या कुछ खाकर जा सकते हैं यदि टेस्टिंग खाली पेट होनी है तो ग्राहक को स्पष्ट बताएं कि खाली पेट का मतलब है सिर्फ पानी पी सकते हैं अक्सर लोग यह समझते हैं कि चाय पी कर भी हम खाली पेट ही कहलाते हैं चाय पीने से भी खून की जांच होने से उसमें शुगर बड़ी हुई आती है यदि खाकर जाना है तो कितनी देर पहले क्या खा सकते हैं यह अवश्य बताएं ध्यान रहे कि मेडिकल करवाने के लिए ग्राहक को डॉक्टर के यहां अकेले नहीं भेजे ग्राहक के अकेले जाने से पहले नुकसान तो यह हो सकता है कि यदि वहां दो और ग्राहक आए हुए हैं जिनके एजेंट उनके साथ हैं तो ग्राहक को लगता है कि आप वैसे प्रोफेशनल एजेंट नहीं है जैसे दूसरे एजेंट हैं दूसरा नुकसान होने की आशंका यह है कि जो दो और एजेंट वहां आए हुए हैं उनके सामने आपका ग्राहक खुला खड़ा है जिसे वे अपनी पॉलिसी बेचने की कोशिश कर सकते हैं वैसे भी ग्राहक जब हाल में जाता है तो उसे नहीं मालूम वहां किस से बात करनी है कहां वजन करवाना है कहां खून की जांच करवानी है किस फॉर्म पर साइन करने हैं आपके लिए हर रोज का काम हो सकता है यदि आप साथ रहेंगे तो ग्राहक को लगता है कि समय भी कम लगा और वह कुछ तनाव से बच गया मेडिकल टेस्ट करवाते समय ग्राहक को एक पहचान पत्र और उसकी फोटो कॉपी भी साथ लेकर जानी चाहिए प्रयास करें कि सारी मेडिकल जांच एक ही बार में हो कुछ कंपनियां मेडिकल जांच घर पर भी करवाने की सुविधा देती है जिसका उपयोग किया जा सकता है

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