मैंने जब बीमा एजेंसी ली तो एक परिचित के पास भी में के लिए गया उसने बताया कि उसका पॉलिसी खरीदने से का पहला अनुभव बहुत कटु रहा था उसकी किसी पड़ोसी नहीं जैसी ली थी और उसे बीमा के लिए मिला इस भाई ने उससे यह कह दिया कि मैं ₹8000 सालाना की किस्त दे सकता हूं तुम जो भी पॉलिसी ठीक समझते हो कर दो पॉलिसी बन कर आ गई और इसने उठाकर अलमारी में रख दी जब अगले साल कष्ट के लिए कंपनी का नोटिस आया तो वह ₹16000 का था इसने उस एजेंट से बात की तो उसने बताया कि उसने पहले से ही 16000 साल आना की पॉलिसी बनाई थी जिसमें ₹8000 अपनी और से कमीशन के मिलाकर डाल दिए थे ग्राहक 16000 साल आना नहीं दे सकता था तो पॉलिसी बंद हो गई और दोनों का ही नुकसान हुआ इसलिए जरूरी है कि ग्राहक को उसकी क्षमता अनुसार ही पॉलिसी बेची जाए ना जरूरत से कम और ना ज्यादा इसके लिए पहली जरूरत जरूरी बात है वह यह कि आप ग्राहक के सामने ठीक सा इसका उदाहरण लें जब मैंने बीमा एजेंसी ली तो पहले साल में मेरा औसत प्रीमियम था ₹6000 प्रति पॉलिसी मैंने जब विचार किया तो एहसास हुआ कि ग्राहक दे तो ज्यादा भी सकता है परंतु मैं उदाहरण ही एक लाख बीमा धन की पॉलिसी काट लेता हूं ऐसा मैं इसलिए करता था क्योंकि जब मुझे पॉलिसी सिखाई गई थी तो एक लाख के उदाहरण से ही बताई गई थी और मैंने उसी को अपनी आदत बना लिया इसके बाद मैंने 200000 की पॉलिसी का उदाहरण लेना शुरू किया तो बिजनेस पढ़ने लगा अब या तो ग्राहक 200000 की पॉलिसी ले लेता या बोलता कि 12000 की किस्त थोड़ी ज्यादा है इससे औसत प्रीमियम 8 से 9000 के बीच हो गया 2011 2012 के समय के हिसाब से यह राशि कम नहीं थी इसलिए ठीक सा इसका उदाहरण लिए इस बात की संभावना कम है कि ग्राहक एक लाख की पॉलिसी का उदाहरण देखें और 500000 की पॉलिसी खरीद ल बहुत छोटी पॉलिसी बेच कर आ जाते हैं क्योंकि वे उसकी क्षमता का ठीक से आकलन नहीं कर पाते ग्राहक का सही मूल्यांकन करना बहुत जरूरी है एक भारतीय आदमी जापान में गया वह वहां के एक अत्यधिक प्रसिद्ध वैज्ञानिक की प्रयोगशाला देखने चला जाता है उसने वैज्ञानिक से कहा कि कोई नई चीज दिखाएं वैज्ञानिक ने अपनी मुट्ठी बंद की और बोला बताओ इसमें क्या है उस भारतीय ने आसपास निगाह घुमा कर देखा तो पाया कि कुछ टेलीविजन के मॉडल और फोटोग्राफ रखे थे उसे लगा कि इस जापानी ने कोई छोटी छोटा टीवी बना लिया लगता है जो उसकी मुट्ठी में बंद कर लिया है उसने कहा मुट्ठी में टीवी है वैज्ञानिक बोला बिल्कुल ठीक अब बताओ कितने एमडीआरटी दिल्ली की मीटिंग में एक एजेंट ने बताया कि वह किसी ग्रह के पास गया और उसे अपनी पॉलिसी बताई उसकी बात से संतुष्ट होने पर ग्राहक ने कहा एक लाख की दे दो उस एजेंट है उसे एक लाख की बीमा राशि की पॉलिसी जिसका प्रेम ₹6000 था दे दी पॉलिसी लेने के बाद ग्राहक ने कहा कि वह एक लाख का प्रीमियम देना चाहता था पर एजेंट ने उसकी हैसियत का मूल्यांकन 6000 के प्रीमियम के बराबर ही किया तो उसे इतना ही प्रीमियम दिया सबसे बढ़िया तरीका ग्राहक की क्षमता का अनुमान लगाने का कि आप उससे पूछा कि आपको इस प्लान में लगभग कितनी मेच्योरिटी वैल्यू चाहिए इस बात की संभावना कम है कि कोई ग्राहक आपको यह बोले कि उसे 15 साल के बाद ₹100000 ही चाहिए जब आप प्रेम की बात करते हैं तो उसे लगता है कि यह तो पैसा मांग रहे हैं इसलिए चौकन्ना रहता है जब आप मैच्योरिटी की बात करते हैं तो आप उसे पैसा देने की बात कर रहे हैं इसलिए मैं ज्यादा सहज रहता है ग्राहक आपको बोलता है कि 15 साल के बाद लगभग 1500000 रुपए तो मिलना ही चाहिए अब हम ग्राहक से कहेंगे कि आपने बिल्कुल ठीक अनुमान लगाया 1500000 तो मिलना ही चाहिए यदि आप ₹1000000 की पॉलिसी लेते हैं तो आपको लगभग 1500000 मिलेगा 1000000 के लिए आप की किस्त बनेगी लगभग ₹5000 महीना यदि आप सीधे ₹60000 सालाना की बात करते तो उसके लिए इसे स्वीकार करना कठिन हो सकता था पर अब आप जिस तरीके से समझा रहे हैं यह एक बेहतर तरीका है उसे अपनी बात समझाने का।
कितना रिस्क कवर चाहिए
जब हम ग्राहक से यह कहते हैं कि आपकी पुरानी पॉलिसी आपकी फाइनैंशल प्लानिंग का हिस्सा नहीं है तो ग्राहक हम से कह सकता है कि चलिए अब आप बताएं कि मुझे कितने का बीमा लेना चाहिए आप मेरी फाइनैंशल प्लानिंग करें क्या आप जानते हैं कि किसी आदमी का कितना बीमा होना चाहिए एक प्रोफेशनल तरीके से इसे कैसे जुड़ेंगे अक्सर हमारी ट्रेनिंग क्लास में जब यह सवाल एजेंटों से पूछा जाता है तो एक एजेंट बोलता है सालाना आमदनी का 10 गुना तो दूसरा बोलता है ढाई सौ गुना दोनों एजेंट ठीक नहीं हो सकते हैं इसका अर्थ है कि लोगों की समझ में कहीं ना कहीं कमी है एक सिद्धांत आता है ह्यूमन लाइफ वैल्यू का जिसमें यह गणना की जाती है कि यह आदमी अपने जीवन में कुल कितना धन कम आएगा और इसे उतना ही बीमा देना चाहिए इस सिद्धांत में समस्या यह है कि यह अनुमान लगाना संभव ही नहीं है कि आदमी अगले 20 साल में कितनी तरक्की करेगा कितना सफल होगा कितना कम आएगा इसलिए यह सिद्धांत व्यवहारिक नहीं है दूसरा सिद्धांत है इनकम रिप्लेसमेंट का यानी यह आदमी सालाना कितना कमाता है और इसे उतना ही बीमा दिया जाए जिससे इसके जाने के बाद परिवार का पहले जैसा स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग बना रहे यानी उन्हें घर खर्च के लिए पहले जैसी आमदनी उपलब्ध रहे यह ज्यादा व्यवहारिक है क्योंकि इसकी गणना संभव है हम किसी आदमी को उतना ही बीमा देंगे जिससे कि उसके ना रहने पर परिवार को उसकी वर्तमान आमदनी के बराबर मासिक आमदनी मिल सके इसकी गणना इस प्रकार से करेंगे कि सालाना आमदनी का 12 गुना बीमा कर दें यदि एक आदमी साल में तीन तीन लाख कमाता है तो उसे हमें हम 36 लाख का बीमा देंगे अब यदि परिवार का मुखिया चल बसे तो परिवार को 3600000 का जो क्लेम मिलेगा उसे किसी भी सुरक्षित जगह पर जमा करवाने से जहां 8% का ब्याज मिले तीन लाख सालाना की आमदनी हो जाएगी इससे परिवार को वह सब साधन मिलते रहेंगे जो आज मिल रहे हैं यदि परिवार पर कोई कर्ज है जैसे मकान या कार का लोन तो उसे भी 3600000 में जोड़ देंगे ताकि उसे चुकाने के बाद परिवार 3600000 निवेश कर सके कहा तो यह जाता है कि सालाना आमदनी में से ग्राहक का व्यक्तिगत खर्च जैसे सिगरेट शराब आदि घटाकर उसका 12 गुणा करना चाहिए क्योंकि ग्राहक के जाने के बाद इस खर्च की जरूरत नहीं होगी मेरा मानना यह है कि हमें व्यक्तिगत खर्च घटाएं बिना ही 12 गुणा करना चाहिए क्योंकि घर खर्च हर साल बढ़ता रहेगा जबकि ब्याज से होने वाली आमदनी स्थिर रहेगी इसलिए थोड़ा ज्यादा बीमा क्लेम ही चाहिए यदि ग्राहक अपनी आमदनी बताने को राजी ना हो तो हम उससे उसका मासिक खर्च पूछेंगे जो कि ग्राहक आसानी से बता देता है ऐसी अवस्था में हम आमदनी का 12 गुणा करके खर्च का 12 गुना करेंगे इस प्रकार जोरासी निकले उसमें सारे कर्ज को जोड़ दें तो यह बीमा राशि यार इस कवर की राशि निकल आएगी जो ग्राहक को लेना चाहिए इसे एक उदाहरण से ठीक समझ पाएंगे यदि किसी ग्रह की सालाना खर्च रुपए है तो उसे कितना रिस्क कवर देंगे इस चार लाख की रकम को हम 12 से गुना करेंगे यानी 4800000 का कवर देंगे जिससे आने की स्थिति में परिवार को 8% की दर से ₹400000 सालाना का ब्याज मिल सके अब यदि उसके ऊपर 500000 का कर्ज है तो उसे इस 4800000 में जोड़ देंगे यानी 53 लाख का बीमा देंगे यदि क्लेम आया तो लोन चुकाने के बाद परिवार के पास 4800000 ही बचेंगे यदि उसके पास पहले से ही 300000 की सुरक्षित सेविंग है तो उस रकम को 53 लाख से घटा देंगे यानी 50 लाख का रिस्क कवर चाहिए।
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