टाइम वैल्यू आफ मनी (Time Value of Money)

टाइम वैल्यू आफ मनी (Time Value of Money)

निवेश जितना जल्दी करेंगे, उतना ही बेहतर रिटर्न मिलेगा, यह बात सब जानते हैं पर प्रायः नजरअंदाज कर देते हैं। एक एजेंट के रूप में हमारा कार्य है कि हम ग्राहक को इस बात का एहसास करवाएं की बीमा पॉलिसी लेने के निर्णय को यदि वह टालता है तो उसकी बहुत बड़ी कीमत है। यदि ग्राहक को यह बात एक सरल उदाहरण से समझाई जाए तो वह बेहतर समझ सकता है।

एक व्यक्ति 30 साल की उम्र में ₹1,00,000 सालाना बचाकर निवेश करना शुरू करता है और 40 की उम्र तक, यानी केवल 10 साल पैसा देता है। यदि ब्याज की दर 9% सालाना मान ली जाए तो 60 साल की उम्र में जब वे रिटायर होगा तो उसे 92,80,000 रुपए मिलेंगे।। दूसरा व्यक्ति देरी से जागता है। वह 40 वर्ष की उम्र में निवेश शुरू करता है और 20 साल तक ₹1,00,000 रूपय सालाना देता है। 9% ब्याज दर पर उसे 60 की उम्र में 55,80,000 ही मिलेंगे।

पहले व्यक्ति ने कुल दस लाख रूपया दिया और दूसरे ने बीस लाख रूपया दिया। फिर भी पहले को दूसरे से बहुत ज्यादा पैसा मिला, क्योंकि उसने 10 साल पहले बचाना शुरू किया। ब्याज की दर दोनों के लिए समान है। इसलिए ग्राहक को समझाना है वह जितनी जल्दी जोड़ना शुरु करेगा, उतना ही लाभ में रहेगा। यदि हम इस प्रयास में सफल रहे तो पॉलिसी टाले जाने की संभावना समाप्त हो जाएगी।

अक्सर हमें लगता है कि यह बहुत सामान्य घटना है और ग्राहक इसे जानता है, परंतु उसे सही वक्त पर यह सब याद दिलाना महत्वपूर्ण हो सकता है।

आप इस पोस्ट में दी गई सूचनाओं को ज्ञान में बदलें। व्यवहार में लाई गई बातें ही आप को लाभ पहुंचा सकती है  सिर्फ पढ़ी गई नहीं। बहुत सफल बीमा एजेंट बनने की हार्दिक शुभकामनाएं!

एम.डी.आर.टी (MDRT)

इसका अर्थ है मिलियन डॉलर राउंड टेबल। यह 1927 में कुछ बीमा एजेंट के द्वारा शुरू किया गया एक प्रयास है जो जीवन बीमा के क्षेत्र में सर्वोच्च सम्मान भी माना जाता है। अमेरिका में मुख्यालय वाली इस संस्था की हर वर्ष एक मीटिंग होती है, जो प्रायः अमेरिका या कनाडा में होती है।  इस मीटिंग में भाग लेने के लिए दुनियाभर के एजेंट्स के लिए मानक यानी क्वालिफाइड कंडीशन तय की जाती है, जो प्रायः हर वर्ष बदल जाती है। यह राशि हर देश में अलग-अलग होती है। उदाहरण के लिए भारत में जो एजेंट 1 जनवरी 2022 से 31 दिसंबर 2022 तक ₹7,95,900 रूपय का कमीशन या 31,83,600 रूपय का प्रीमियम करेगा, वह इसका सदस्य बन सकता है। चीन, जर्मनी और श्रीलंका में यह राशि अलग होती है। 

एमडीआरटी की उपलब्धि की प्रक्रिया को तीन भागों में बांटा जा सकता है। पहला है कि ऊपर दिए गए प्रीमियम या कमीशन को हासिल करना और अपनी बीमा कंपनी से इस बात का प्रमाण पत्र हासिल करना कि आपने यह कर लिया है। 

दूसरा कदम है कि आप अपने आप को एमडीआरटी में रजिस्टर्ड करवाएं। यदि आपने आवश्यक प्रीमियम या कमीशन कर लिया है तो इससे आप एमडीआरटी के सदस्य नहीं बन गए। आपने सिर्फ सदस्य बनने की पात्रता हासिल की है। आपको यह देखना है कि आप आवश्यक फीस देकर अपने आपको एमडीआरटी के सदस्य के रूप में रजिस्टर्ड करवाएं। इसके लिए फीस लगभग ₹30,000 रूपए है।  आप वह फीस देकर अपना रजिस्ट्रेशन करवाकर ही अपने विजिटिंग कार्ड पर एमडीआरटी का प्रतीक चिन्ह (logo) लगा सकते हैं। कुछ बीमा कंपनियां इसके लिए क्वालीफाई करने वाले सभी एजेंट का रजिस्ट्रेशन अपने खर्चे पर भी करवा देती हैं। 

तीसरा कदम है आप वहां जाकर उस सेशन में भाग लें। उसके लिए आपको अलग से फीस चुकानी होगी। एमडीआरटी का नियम है कि आपको इस में भाग लेने के लिए स्वयं ही सारा खर्चा उठाना होगा और बीमा कंपनी उसमें आपको मदद नहीं दे सकती। कुछ बीमा कंपनियां अपने एजेंट को भाग लेने के लिए ब्याज रहित कर्ज दे देती हैं। कुछ और कंपनियां एमडीआरटी की मीटिंग के दिनों में ही ठीक उसी शहर में अपने जेंट्स की मीटिंग रख लेती है, जिससे एजेंट की जेब से हवाई यात्रा का और वहां रहने का खर्चा ना लगे। 79 देशों की 475 कंपनियों से लगभग 35,000 एजेंट रजिस्ट्रेशन करवाते हैं। इनमें से लगभग एक तिहाई महिला एजेंट हैं। सबसे ज्यादा लगभग 10,000 एजेंट अमेरिका से ही होते हैं। 

इसके बाद भारत का नंबर है जिसके 6000 से ज्यादा एजेंट रजिस्ट्रेशन करवाते हैं और यह आंकड़ा हर वर्ष बढ़ता ही जा रहा है। इन 35,000 एजेंट्स में से लगभग 6000 एजेंट सेशन में भाग लेने के लिए वहां पहुंचते हैं। 
निर्धारित प्रीमियम या कमीशन से 3 गुना कमाने वाले एजेंट को कोर्ट ऑफ द टेबल यानि सीओटी कहा जाता है। उसका भी दुगना करने वाले एजेंट को टॉप ऑफ द टेबल कहा जाता है, यानि टीओटी। 35,000 एमडीआरटी एजेंट्स में 4,300 सीओटी और 1600 टीओटी होते हैं। 

एमडीआरटी एजेंट बनने का लाभ यह है कि आपका स्तर प्रमाणित हो गया। यह मान लिया गया कि आप बाकी एजेंट से बहुत ही बड़े और ऊंचे स्तर के एजेंट हैं। इसका लाभ तभी होगा जब आप अपने नाम का रजिस्ट्रेशन करवाएं। पूरा लाभ तब होगा जब आप इस मीटिंग में भाग लेने के लिए जाएं। मेरा मानना है कि इस तरह की मीटिंग में भाग लेने से दो तरह के लाभ होते हैं। पहला तो वह सब बातें जो वहां मंच से अपन-अपने क्षेत्र के विश्व प्रसिद्ध लोगों के द्वारा कही जाती हैं। दूसरे यह कि आप दुनिया के सबसे सफल बीमा एजेंट से मिलते हैं। आपको वहां वह सब जानने का अवसर मिलता है जो आप नहीं जान सकते। सफल लोगों से मिलना अपने आप में एक उपलब्धि की तरह होता है। वहां सब एक दूसरे से सीखते हैं।

पॉलिसी बेचने के अन्य तरीके

ग्रुप प्रेजेंटेशन

प्रायः बीमा एजेंट एक बार में एक ग्राहक से ही बात करता है पॉलिसी समझाने के लिए। एक बार में 1 से ज्यादा ग्राहकों को पॉलिसी समझाने का नाम है ग्रुप प्रेजेंटेशन। इसमें एजेंट एक ग्रुप के लोगों से इकट्ठे बात करता है। प्रायः यह ग्रुप एक ही तरह के लोगों का होता है, जैसे एक कंपनी में काम करने वाले लोग, एक ही स्कूल के अध्यापक, सुबह एक साथ सैर करने वाले लोग, छोटे बच्चों के माता-पिता, आदि। 

ग्रुप में जन टेशन बहुत ही कामयाब तरीका है, कम समय में ज्यादा पॉलिसी बेचने का। इसलिए जरूरी है कि इसका अधिकतम लाभ उठाने की विधि सीखी जाए। पहला ध्यान तो यह रखें कि ग्रुप बहुत ही बड़ा ना हो। आपका लक्ष्य पॉलिसी बेचने का है, ज्ञान बांटने का नहीं। यदि ग्रुप में बहुत ज्यादा लोग होंगे तो आपका प्रेजेंटेशन एक प्रवचन के तरीके से रहेगा, जिसे लोग सुन कर चल देंगे। ग्रुप में 20 से ज्यादा लोग ना हो तो बेहतर है। इतने से लोगों के बीच में आप आपसी बातचीत का सा माहौल बना सकते हैं। आप लोगों की भावनाओं को समझ सकते हैं, अपनी बातचीत को उनके मूड के हिसाब से बदल सकते हैं, सवाल-जवाब कर सकते हैं और उनके साथ बेहतर तरीके से जुड़ सकते हैं।  

ग्रुप प्रेजेंटेशन के बाद लोगों से एक फीडबैक फॉर्म जरूर भरवाएं जिसमें उनका नाम, पता, फोन नंबर रहे, जिससे आप बाद में उनसे बात कर सकें। ध्यान रहे कि ग्रुप प्रेजेंटेशन में पॉलिसी नहीं बेची जा सकती है, सिर्फ लोगों की रुचि आपकी पॉलिसी की और बनाई जा सकती है। पॉलिसी बेचने के लिए तो आपको बाद में ही लोगों से एक-एक करके मिलना होगा और उनकी व्यक्तिगत जरूरत के हिसाब से पॉलिसी समझानी होगी। इसलिए ग्रुप प्रेजेंटेशन में अत्यंत महत्वपूर्ण है बाद में ग्राहकों से मिलना। अपने सेशन के बाद आप लोगों से फीडबैक लेते समय उन्हें अपना विजिटिंग कार्ड और अपने प्लान के ब्रोशर दे सकते हैं। आप सेशन में बहुत सारी चीजें ग्राहकों को नहीं समझा सकते हैं। आपको यह देखना है कि ऐसी क्या बातें हैं जिसमें सामने बैठे लोगों में से अधिकांश की रुचि हो। आप इनकम टैक्स की बचत की बात कर सकते हैं, पेंशन प्लान की बात कर सकते हैं, बच्चों के लिए सेविंग की बात कर सकते हैं, आप रिस्क कवर पर फोकस करके बड़े टर्म प्लान की बात कर सकते हैं, आदि। आपको एक कॉमन मुद्दा खोजना होगा, जिससे सब लोग आपकी बात को उत्साह से सुनें। 

एक बात और है जो आपके ग्रुप प्रेजेंटेशन को ज्यादा कारगर बना सकती है। जो भी व्यक्ति आपको उस ग्रुप से मिलवा रहा है या ग्रुप प्रेजेंटेशन का मौका दिलवा रहा है,  उसे आप सबसे पहले अकेले में ही पॉलिसी समझाएं और बेचने का प्रयास करें। फिर आप उस के माध्यम से एक-दो उसके नजदीकी मित्रों को प्लान बेचें। प्रयास यह करें कि आप उस ग्रुप के मुखिया अथवा वहां के किसी अन्य प्रभावशाली अधिकारी को पहले अकेले में पॉलिसी बेचें। इसके बाद जब आप ग्रुप प्रेजेंटेशन करेंगे तो आपको लाभ यह रहेगा कि यदि सामूहिक निर्णय में किसी ने भी पॉलिसी नहीं ली तो आप कुछ पॉलिसी तो वहां बेच ही चुके हैं।  दूसरे उस ग्रुप प्रेजेंटेशन में आप उस मुख्य अधिकारी को, जिसको आप ग्राहक बना चुके हैं, उसका नाम प्रयोग कर सकते हैं कि झा साहब ने भी हमारी पॉलिसी में विश्वास जताया है और वह हमारे ग्राहक हैं। बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो उस अधिकारी की निर्णय क्षमता के कायल होते हैं और इसीलिए पॉलिसी लेने को तैयार हो जाएंगे कि झा साहब ग्राहक बन गए हैं तो इनका प्लान और कंपनी अच्छे ही होंगे। यहां ध्यान यह रखना है कि आप ग्रुप प्रेजेंटेशन या बाद में झा साहब की ली हुई पॉलिसी या उनकी व्यक्तिगत जानकारी का खुलासा दूसरों के सामने ना करें।  

कैनोपी 

कैनोपी या स्टाल या इंफॉर्मेशन डेस्क का उपयोग होता है, नय ग्राहकों की खोज करना। इसके लिए किसी खास अवसर पर स्टाल लगाया जा सकता है,  जैसे दिवाली मेला, नवरात्रि, दुर्गा पूजा, किसी स्कूल में लगने वाला फेस्टिवल, आदि कोई भी ऐसा स्थाई अवसर जहां लोग ज्यादा जुड रहे हों। यह कुछ घंटे से लेकर दो-तीन दिन तक का हो सकता है। इसके अलावा किसी थाई स्थायी स्थान जैसे बाजार, पार्क, मॉल, चौराहे आदि पर भी थोड़े समय के लिए लगाया जा सकता है। 

कैनोपी लगाते समय भी ध्यान रहे कि यहां आप पॉलिसी बेच नहीं सकते हैं, सिर्फ संभावित ग्राहकों के नाम और फोन नंबर इकट्ठे कर सकते हैं, जिससे ग्राहकों से बाद में मिल सकें। कोई भी ग्राहक अपने जेब में प्रीमियम का चैक, फोटो, आमदनी का प्रूफ, आयु प्रमाण पत्र लेकर नहीं घूमता है। यदि आप ग्राहक की रुचि जगा पाएं तो वह आपको मिलने का अवसर देगा जहां आप उसकी जरूरत के अनुसार उसे पॉलिसी बता सकते हैं। यदि स्टॉल पर एक लैपटॉप हो तो ठीक रहेगा जहां आप लोगों को कुछ बेसिक चीजें दिखा सकें। आप स्टॉल पर आने वाले हर ग्राहक को अपना विजिटिंग कार्ड अवश्य दें। 

कैनोपी लगाते समय एक से अधिक लोग साथ हों तो बेहतर रहेगा। आपके पास एक बार में एक से ज्यादा संभावित ग्राहक भी आ सकते हैं, दूसरे कुछ लोगों को आपको अपने आप बोल कर अपनी स्टाल की ओर आकर्षित करना होगा। इसलिए कम से कम 2 लोग तो स्टाल पर होने ही चाहियें।वहां एक विजिटर रजिस्टर भी रखना होगा, जिसमें हर आने वाले आदमी का नाम और फोन नंबर आप लिख सकें या ग्राहक से ही लिखवा सकें। प्रयास करें कि आप ग्राहक से उसका विजिटिंग कार्ड ले लें जिसमें उसका पूरा पता, पद, फोन नंबर और ईमेल का पता हो सकता है। 

इस तरह से एकत्र किए गए लोगों के नाम पते प्रायः जहां आपने स्टाल लगाया है,  उसके आस पास के ही होंगे आपको चाहिए कि इन सब लोगों से एक-दो दिन के अंदर ही संपर्क स्थापित कर उनसे मिलें। 

वैसे यह स्टाल लगाने का काम उन्हीं एजेंट्स को करना चाहिए जिनका व्यक्तिगत संपर्क का दायरा सीमित हो। दूसरे शब्दों में वे एजेंट जिनके पास बीमा बेचने का समय तो बहुत हो पर मिलने वाले लोग ना हों। 

अपने मैनेजर से ग्राहकों को पत्र लिखवाएं 

बाजार में एक एजेंट के रूप में आपकी इमेज जितनी अच्छी होगी, कामयाबी की उतनी ही संभावना बढ़ेगी। एक प्रोफेशनल और कामयाब एजेंट की इमेज बनाने के लिए आप बाकी बातों के अलावा एक काम और भी कर सकते हैं। आपने यदि ब्रांच में या अपनी कंपनी में कोई कामयाबी हासिल की है तो आप उसका लाभ ले सकते हैं। आप अपने मैनेजर से कह कर अपने ग्राहकों को एक पत्र लिखवाएं कि उनके सहयोग से आपने यह उपलब्धि हासिल की है। जब आप के ग्राहकों को इस बात का एहसास होता है कि उनका एजेंट एक कामयाब एजेंट है तो आपको उनसे बिजनेस मिलने की संभावना और बढ़ जाती है। 

ध्यान रहे कि यह पत्र बहुत बड़ा नहीं होना चाहिए। मान लीजिए आपने किसी महीने अपनी ब्रांच में बहुत बढ़िया बिजनेस किया। अब इस पत्र की भाषा कुछ इस तरह से हो सकती है हमारे एजेंट श्री विनय प्रसाद को सहयोग करने के लिए धन्यवाद आपके सक्रिय सहयोग से पिछले माह वह हमारी ब्रांच के टॉप टेन में से एक थे। आशा है आप अपना सहयोग बनाए रखेंगे। 

(ब्रांच मैनेजर)

रिकार्ड कीपिंग

यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण काम है। आप जितनी भी पॉलिसी बेच रहे हैं, उन सब का रिकॉर्ड आपके पास होना चाहिए। रिकॉर्ड से मतलब यह नहीं है कि किस ग्राहक का कौन सा पॉलिसी नंबर था। आपको पता होना चाहिए कि ग्राहक कि उस समय फैमिली हिस्ट्री क्या थी, ऊंचाई और वजन कितना था, आमदनी कितनी थी, वगैरह। साथ ही ग्राहक के हस्ताक्षर का नमूना। कभी ऐसा भी हो सकता है कि 10 साल के बाद ग्राहक भूल जाए कि उसने अंग्रेजी में साइन किए थे या हिंदी में। यदि आप ग्राहक के प्रपोजल फॉर्म की फोटो कॉपी रख पाए तो बहुत उपयुक्त होगा। 

इस सब जानकारी से आपको एक तो लाभ यह होगा कि आप ग्राहक को उसके और उसके बच्चों के जन्मदिन की शुभकामनाएं दे सकते हैं, यदि वह दूसरी पॉलिसी खरीद रहा है और सूचना, अंदाजे से ही दे रहा है तो आप जांच सकते हैं, इससे पहले कि कंपनी का अंडरराइटर नई पुरानी पॉलिसी की सूचना मे विरोधाभास देखकर पॉलिसी नकार दें। 

आपके पास यह भी रिकॉर्ड रहेगा कि कौन ईपॉलिसी कब मैच्योर हो रही है, किसका मनी बैक कब आना है ग्राहक का अता पता और फोन नंबर तो उसमें रहेगा ही। साथ ही यदि कंपनी ने पॉलिसी में कोई गलती कर दी तो आप कंपनी को सबूत दिखा सकते हैं कि आपने तो सब ठीक ही लिखा था। एक और महत्वपूर्ण लाभ यह है कि आपको नई पॉलिसी लेते समय ग्राहक से बहुत कम सूचनाएं चाहिए। पुराने फार्म से बहुत ही सूचना मिल जाएगी यह काम ऐसा ही होगा कि किसी टेलर के पास आपको माप दे रखा है आप जाकर सिर्फ कपड़ा दे आते हो शर्ट की सिलाई करने के लिए। 

अनेक एजेंट 20 साल तक भी ग्राहक की डिटेल संभाल कर रखते हैं यदि आप उनमें से हैं तो आपके ग्राहक को विश्वास भी है कि आप वह प्रोफेशनल एजेंट है जो आजीवन इसी काम में रहने के लिए आए हैं।

टाइम मैनेजमैंट (Time Management)

ईश्वर ने हम सभी को अलग-अलग क्षमताएं दी हैं। अलग-अलग शारीरिक बल  बुद्धि का स्तर, धन, परिवार की इज्जत, पड़ोसी, ऊंचे तबके के लोगों से संबंध, आदि सब चीजें हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग हैं। एक ही चीज ऐसी है जो दुनिया के हर आदमी को, चपरासी से लेकर प्रधानमंत्री तक को बराबर मिली है। वह है समय। हर किसी के पास दिन में 24 घंटे ही हैं। किसी भी आदमी की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह इस समय का उपयोग कैसे करता है। बीमा एजेंट के रूप में मिलने वाली सफलता भी इससे अलग नहीं है। 

प्रसिद्ध लेखक स्टीवन को वे अपनी पुस्तक "सेवन हैबिट्स आफ हाईली सक्सेसफुल पीपल" में लिखते हैं कि हर आदमी के कार्यकलापों को चार भागों में बांटा जा सकता है।

अर्जेंट नहीं, महत्वपूर्ण नहीं

ये वे काम हैं जो ना हमारे लिए अर्जेंट हैं, ना ही महत्वपूर्ण। इनको यदि नहीं किया जाए तो हमारा किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होगा। यह काम टाइम पास करने वाले काम हैं। कहीं खाली बैठे हैं, टीवी चल रहा है बस, बिना किसी मकसद के उसे देख रहे हैं, दूसरे मनोरंजन के साधन, किसी का अचानक फोन आ जाना और उसका हमें ऐसा काम बताना जिससे हमारा कोई सरोकार नहीं है, कोई झगड़ा जिसमें हम बेकार ही समय नष्ट कर रहे हैं, कोई ऐसा आदमी आकर बैठ गया जो आपका समय खराब कर रहा है और जिसे आप जाने के लिए नहीं कह सकते। 

किसी भी कामयाब आदमी को चाहिए कि वह अपने समय का कम से कम हिस्सा इस तरह की गतिविधियों में जाने दे। एक बीमा एजेंट को चाहिए कि वह समय की अहमियत को समझे और ब्रांच में खाली बैठकर या बिना किसी उद्देश्य के घूम फिरकर अपने कीमती समय को व्यर्थ ना गवाएं। यदि बैठना भी हो तो किसी कामयाब एजेंट या मैनेजर के पास बैठें, जिससे कुछ लाभ मिल सके।

अर्जेंट है, महत्वपूर्ण नहीं

दूसरी श्रेणी उन कामों की है जो जरूरी तो है लेकिन उनमें लगना मेरे किसी फायदे का नही है, यानी मेरे लिए महत्वपूर्ण नहीं है। यह वह काम है जो किसी मुख्य काम में व्यवधान के रूप में आते हैं, जैसे अचानक कोई मिलने के लिए आ जाए, कोई मीटिंग बुला ली जाए, जिसे आप मना ना कर सकें, कोई रिपोर्ट अचानक बनाकर भेजनी है, आदि। 

प्रायः ऐसे काम कार्यालय में काम करने वाले लोगों के होते हैं, जिन्हें कम से कम करने का प्रयास करना चाहिए। समस्या यह है कि ये सभी काम किसी और के द्वारा हम पर थोपे हुए होते हैं इसलिए हमारा इन पर नियंत्रण कम होता है। एक एजेंट के लिए इस तरह के काम हो सकते हैं कि अचानक किसी ग्राहक का फोन आ गया कि उसे आज ही इनकम टैक्स की रिटर्न भरनी है और बीमे की रसीद नहीं मिल रही। अब तुरंत आपको डुप्लीकेट रसीद तैयार करनी पड़ेगी। एक जनरल बीमा का एजेंट किसी जरूरी सेल्स कॉल पर जा रहा है और किसी ग्राहक का फोन आ गया कि उसकी कार का एक्सीडेंट हो गया है, आप तुरंत उसकी मदद करें। जितना ज्यादा समय इन कामों में जाएगा, उतना ही सार्थक कामों में कम जाएगा।

अर्जेंट है, महत्वपूर्ण है

यह वे सभी काम हैं जिनको करना तुरंत जरूरी है और वे महत्वपूर्ण भी हैं। इनमें वे काम गिनें जा सकते हैं जो एक निश्चित तिथि तक ही पूरे करने हैं और वह तिथि आ गई है। किसी ग्राहक की किस्त आपको आज लेनी थी, ना जमा होने पर पॉलिसी लैप्स हो जाएगी। आपको एक क्लब मेंबरशिप करनी थी, 10 पॉलिसी करनी अभी रहती है और दो ही दिन बचे हैं। आपको किसी ग्राहक को उसकी रसीद देनी थी, आप समय पर दे नहीं पाए, अब उसे रसीद पहुंचाने के लिए स्पैशली उनके घर जाना पड़ेगा। यह वह काम है जो आप चाहते तो पहले कर सकते थे, परंतु समय पर ना किए जाने से वे अर्जेंट हो गए हैं। 

जो लोग इस तरह से काम करते हैं वह बहुत ही दबाव में काम करते हैं। अंतिम समय में काम करने से गलतियां करते हैं, खर्च ज्यादा करते हैं, तनाव भी झेलते हैं, और सफलता की संभावना उतनी ही कम कर लेते हैं। आखिरी दिन बिजली का बिल भरने के लिए लाइन में लगना या रेलगाड़ी पकड़ने के लिए घर से देरी से निकलना इसी तरह के कुछ उदाहरण हो सकते हैं।

अर्जेंट नहीं, महत्वपूर्ण है

यह वे काम है जो हमारे लिए बहुत मायने रखते हैं, पर अभी जरूरी नहीं हैं। काम का महत्व है, पर उसे तभी कर लिया गया जब वह एकदम अर्जेंट नहीं हो गया। यह वह काम हैं जो समय रहते नहीं किए जाते तो अर्जेंट वाली श्रेणी में चले जाते, एमरजेंसी बन जाते। यदि टेलीफोन का बिल भरना है, अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना आपने भर दिया तो वह इस श्रेणी में है, अंतिम तिथि तक रुके रहे तो वह जरूरी हो जाएगा, जिस पर आपको ज्यादा भागदौड़ करनी है, जुर्माना देना है। यदि क्लब मेंबरशिप करनी है तो पहले से ही प्लानिंग है कि कितना बिजनेस किस महीने करना है, कितना प्रीमियम कहां से लेना है, कितने नए ग्राहकों से मिलना है, किससे रेफरेंस लेना है, किससे कब मनी बैक का फॉर्म भरकर मंगवाना है, आदि। 

ये सभी विकास के काम होते हैं, जैसे आप बीमार होने से पहले ही स्वास्थ्य का ध्यान रख रहे हो। यह करने से एमरजेंसी की स्थिति से बचाव होता है। इसमें प्लानिंग का काम है, नई संभावनाएं खोजने का काम है। इसलिए सफल लोग इस श्रेणी में ज्यादा से ज्यादा काम करते हैं। 

बीमा एजेंट इसके अलावा जो टाइम मैनेजमेंट कर सकता है, वह है एक निश्चित इलाके में ही पॉलिसी बेचना। यदि आप दिल्ली, मुंबई जैसे महानगर में रहते हैं और आपने इस तरह से पॉलिसी बेच रखी है कि आपका एक ग्राहक दूसरे ग्राहक से 30 किलोमीटर की दूरी पर है, तो आपको ज्यादा समय सड़क पर ही गुजारना पड़ेगा। यदि एक ग्राहक से मिलने जाने के लिए आपको 1 घंटे से ज्यादा का समय लगता है तो इसका अर्थ है कि आपको नया बिजनेस करने के लिए कम से कम समय मिल रहा है। आपका ज्यादा समय तो पॉलिसी की सर्विसिंग में ही जा रहा है, और बहुत सा खर्च भी। 

आपको तय कर लेना चाहिए कि आप एक निश्चित एरिया में ही पॉलिसी बेचेंगे। इससे बाहर आप तभी निकलेंगे जब आपको बहुत बड़ी पॉलिसी मिलने की आशा हो या एक ही जगह से बहुत सी पॉलिसी मिलने वाली हों। ऐसा करने से आप एक ही दिन में अनेक ग्राहकों से मिल सकते हो, नई पॉलिसी के लिए भी और सर्विसिंग के लिए भी। 

टाइम मैनेजमेंट के लिए एक और साधन भी आप अपना सकते हैं। अक्सर बीमा एजेंट को ग्राहक का इंतजार करना पड़ता है, उसके घर या दफ्तर में पहुंचकर इस खाली समय को आप अपनी प्लानिंग करने के लिए, मिलने वाले लोगों की लिस्ट बनाने के लिए, दूसरे कोई और नोट्स बनाने के लिए उपयोग कर सकते हो। इस दौरान आप अपने प्लान के ब्रॉशर या रेडी रेकनर के शुरू वाले पेज पढ़ सकते हो। यह वह समय होता है जब आप कुछ और नहीं कर सकते। इस तरह से आप समय का सदुपयोग भी करेंगे और आपकी बोरियत भी कम होगी।

रिबेट (Rebate)

रिबेट का अर्थ है एजेंट का आपने कमीशन में से एक हिस्सा ग्राहक को देना यह जीवन बीमा के लिए एक खून की तरह है और बहुत ही विवाद का विषय है कानूनन रिबेट लेना और देना दोनों ही अपराध है रिबेट लेने और देने वाले दोनों ही पक्ष के लोगों का स्वार्थ इस से जुड़ा होता है इसलिए कोई इसकी शिकायत नहीं करता है और यह प्रैक्टिस चलती रहती है पहली बात तो यह है कि रिबेट देना या ना देना आपका अपना निर्णय है किसी और का इसमें दखल नहीं हो सकता यह किसी भी और चीज में डिस्काउंट देने जैसा ही है यह बात तय है कि जो दुकानदार कम डिस्काउंट देकर समान बेचता है वह बाकी दुकानदारों से अलग कुछ सेवा ग्राहकों को देता है जो दूसरे दुकानदार नहीं देते उसकी दुकान पर वैरायटी ज्यादा होगी सेल्समैन पढ़े लिखे होंगे सामान घर तक छुड़वाने की सुविधा होगी क्रेडिट कार्ड भी स्वीकार करता होगा सामान में शिकायत आने पर उसे बदलने में आनाकानी नहीं करेगा आदि आप यदि बिना रैबिट के या कम से कम रेबेट के पॉलिसी बेचना चाहते हैं तो आप अपने अंदर झांक कर देखें कि आप ग्राहक को क्या अलग सर्विस दे रहे हैं जो दूसरे एजेंट नहीं दे रहे हैं क्या आप ज्यादा प्रोफेशनल एजेंट हैं आपकी बीमा के बारे में जानकारी ज्यादा है आपका व्यक्तित्व ज्यादा प्रभावशाली है आप सिर्फ एक पॉलिसी ना बता कर ग्राहक की फाइनेंसियल प्लानिंग कर रहे हैं आप इनकम टैक्स के नियम और दूसरे फाइनेंशियल प्रोडक्ट के बारे में दूसरे एजेंट से ज्यादा जानते हैं आपके पास ग्राहक की पुरानी सब पॉलिसी का रिकॉर्ड है क्या आप लैपटॉप साथ लेकर चलते हैं क्या आप ग्राहक को पहले 1 मिनट में प्रभावित कर सकते हैं यदि आप इन सब मायनों में बाकी एजेंट से अलग है और ग्राहक भी इस बात का अनुभव कर रहा है तो रिबेट का मुद्दा आपकी पॉलिसी के आड़े नहीं आएगा अक्सर समस्या यही रहती है कि हम अपने आपको बाकी एजेंट से अलग नहीं साबित कर पाते और ग्राहक के पास हमें तोलने का एक ही नजरिया रहता है कि हम रिबेट कितनी दे रहे हैं एक उदाहरण ने यदि आपको अपने घर में पेंट करवाना हो तो आप मिस्त्री तलाशने के लिए कहां जाएंगे हर नगर में एक ऐसा चौराहा या बाजार होता है जहां हर सुबह सब मिस्त्री लोग इकट्ठे होते हैं आपके नगर में ऐसी जो भी जगह है आप वही जाएंगे और जो भी सबसे कम रेट मांग रहा है उसे ले आएंगे अपने घर वहां जो भी मिस्त्री खड़ा है वह सिर्फ रेट पर ही बिकता है उसके काम की क्वालिटी हमें मालूम नहीं है अब यदि आपको एक बढ़िया मिस्त्री खोजना है क्योंकि आप की कोठी बहुत महंगी है पेंट भी महंगा ही करवाना है तो कोई भी मिस्त्री नहीं चलेगा आपको मालूम है कि नगर में लालचंद नाम का मिस्त्री बहुत ही बढ़िया है आप उसे खोजते हुए पहुंचते हो और वह कहता है कि 1 महीने तक वह व्यस्त है उसके बाद ही वह आपकी कोठी पर आ सकता है क्या आप उससे यह उम्मीद करेंगे कि वह सबसे सस्ता भी होगा आपके लिए चुनौती यही है कि आप अपने आप को बेहतर दूसरों से अलग एजेंट साबित करें जिससे रिबेट का मुद्दा बहुत बड़ा होकर सामने ना आए यदि आप भीड़ के हिस्से वाले एजेंट है तो आपका मूल्यांकन ऐसे ही होगा कि आप कितनी ज्यादा से ज्यादा रिबेट दे सकते हैं बैंक से मुकाबला आजकल प्रायः सभी बैंक किसी ना किसी कंपनी का बीमा भेजते हैं बैंक में घुसने वाले हर ग्राहक को यह अंदेशा रहता है कि अभी कोई आकर उससे बीमे की बात करेगा यदि आपका कोई ग्राहक बैंक से बीमा लेने की प्लानिंग कर रहा है तो आप उसे समझा सकते हैं कि बैंक में जो अधिकारी आज आपको बीमा बेच रहा है वह पॉलिसी के मैच्योरिटी के समय यहां नहीं होगा और जब वह यहां भी आपकी पॉलिसी की सर्विसिंग जैसे की किस्त जमा करवाना रसीद पहुंचाना लोन दिलवा ना फंड बदलना आदि किसी भी काम में उसकी कोई भूमिका है ही नहीं उसका काम है सिर्फ आपको पॉलिसी बेचना और एक और हो जाना आप ग्राहक से पूछे कि क्या वह चाहेगा कि एक बार पॉलिसी लेने के बाद अगले 10 साल तक पॉलिसी का सारा ध्यान उसे ही रखना पड़े या फिर आप जैसे किसी प्रोफेशनल एजेंट से पॉलिसी ले और सदा के लिए निश्चिंत हो जाए बैंक के लोग यह कहकर पॉलिसी बेचते हैं कि अकेला एजेंट तो पता नहीं कब तक एजेंसी चलाएगा पर बैंक तो सदा यही बना रहेगा आप ग्राहक को बताएं कि पॉलिसी की सर्विस बैंक ने नहीं बल्कि बैंक के लोगों ने देनी है 5 साल बाद वहां बैठे मैनेजर की रुचि इस बात में क्यों होगी कि वह आपकी पॉलिसी का ध्यान रखें बैंक हमेशा सर्विसिंग की बात आते ही ग्राहक को बीमा कंपनी के दफ्तर में भेजता भेज देता है। आपकी व्यक्तिगत सेवाओं में और बैंक की सेवा में बहुत अंतर है, ग्राहक को इस बात का एहसास करवाएं।

कुछ भी आपत्ति से परे नही है

कुछ बीमा एजेंटों की शिकायत यह रहती है कि बीमा खरीदते समय लोग बहुत से सवाल पूछते हैं और बहुत सारे ऑब्जेक्शन खड़े करते हैं यह एक सामान्य बात है वास्तव में यदि आप देखें तो दुनिया में कुछ भी बेचना आपत्ति से परे नहीं है यानी ऐसा कोई भी बिक्री नहीं होती है जिसमें सवाल खड़े ना किए जा सकें इसे एक उदाहरण से समझें यदि आप एक कार के सेल्समैन है तो आप देखेंगे कि ग्राहक ऐसी कार खरीदना चाहेंगे जो देखने में बहुत खूबसूरत हो सकती हो कम खर्च में चलती हो अंदर जगह बहुत ज्यादा हो स्टेटस सिंबल हो पार्किंग में जगह कम गिरे वगैरह अब आप सोच कर देखें दुनिया में क्या ऐसी कोई कार है यह हो सकती है जिसमें यह सब खूबियां हो ऐसी कार होना संभव ही नहीं है क्योंकि इसमें जिन गुणों को हम ढूंढ रहे हैं वे परस्पर विरोधी हैं सस्ती कार का स्टेटस सिंबल होना अंदर से ज्यादा जगह होने पर भी पार्किंग में कम जगह घेर ना सब सुविधाएं और लग्जरी फीचर्स होने पर भी देखने का खर्च कम होना बहुत पावरफुल इंजन होने पर भी पेट्रोल का खर्च कम होना आदि ऐसे विरोधाभास हैं जो किसी भी एक कार में संभव नहीं है अब यदि ऐसी आदर्श कार दुनिया में बनी ही नहीं है या बनना संभव ही नहीं है तो ऐसा तो नहीं है कि लोग कार नहीं खरीदते हैं ग्राहक को सब कुछ किसी भी कार में नहीं मिलता है मतलब उसके हाथ से कुछ तो छूटना ही है और जो छूटना है उस पर आपत्ति तो ग्राहक को करनी ही है यदि आप सस्ती छोटे साइज की कार बेचेंगे तो ग्राहक को स्टेटस सिंबल नहीं दिखाई देगा यदि बड़ी कार दिखाएंगे तो पार्किंग की समस्या आड़े आएगी इस स्थिति में ग्राहक को आप उसके चुने हुए गुणों के आधार पर कार भेजते हैं इसका सार यही है कि ग्राहक जो कुछ चाहता है वह सब उसे एक प्रोडक्ट में नहीं मिल सकता है उसे कुछ चीजें छोड़ने ही पड़ेगी और सेल्समेन चाहे किसी भी चीज का हो उसका काम ग्राहक को यही समझाना है कि उसे सब कुछ नहीं मिल सकता ग्राहक के लिए जो बातें जो गुण सबसे महत्वपूर्ण है वह उनके हिसाब से सामान खरीद लेता है बीमा एजेंट के रूप में आप ग्राहक को किसी भी ऐसी चीज का उदाहरण दे सकते हैं जो वह पहले से प्रयोग कर रहा है जैसे की तान्या घड़ी अब घड़ी सस्ती है तो स्टेटस सिंबल नहीं है स्टेटस सिंबल है तो महंगी है यह सिद्धांत वित्तीय चीजों पर भी लागू होता है जब भी कोई व्यक्ति निवेश करना चाहता है तो वह तीन चीजें देखता है पैसे की सुरक्षा लिक्विडिटी और बेहतर रिटर्न वास्तव में दुनिया में ऐसा कोई भी निवेश नहीं है जिसमें तीनों चीजें हो आपके पैसे की सबसे बेहतर सुरक्षा बैंक में फिक्स डिपॉजिट में हो सकती है लेकिन उसमें सबसे कम होगा शेयर मार्केट में पैसा ज्यादा तेजी से बढ़ सकता है लेकिन वहां पैसे की सुरक्षा की गारंटी नहीं होती प्रॉपर्टी में पैसे कुछ हद तक हो सकती है और रिटर्न भी आने की संभावना रहती है लेकिन उसमें लिक्विडिटी नहीं होती यानी आप जब चाहे उसे बेचकर पैसा प्राप्त नहीं कर सकते इसका अर्थ है कि ग्राहक को इन तीनों में से कोई एक ही छोड़नी होगी हर ग्राहक अपनी सोच के अनुसार अलग-अलग चीज छोड़ना चाहेगा इसलिए बैंकों में बेहिसाब पैसा फिक्स डिपाजिट में रखा जाता है तो दूसरी और प्रॉपर्टी और शेयर मार्केट में भी लोग खूब निवेश करते हैं इस सारी चर्चा का अर्थ यही है कि कुछ भी खरीदने से पहले ग्राहक गतिरोध उत्पन्न करता ही है क्योंकि जो उसे छोड़ना पड़ रहा है उसे वह आसानी से छोड़ना नहीं चाहता बीमा बेचते हुए इस गतिरोध को सामान्य समझें जितनी बड़ी खरीद उतना बड़ा गतिरोध अक्सर बीमा एजेंट यह शिकायत करते हैं कि जीवन बीमा में ग्राहक निर्णय लेने में बाकी चीजों की अपेक्षा बहुत ज्यादा समय लगाता है दो या तीन बार डालने के बाद ही ग्राहक पॉलिसी लेने का निर्णय लेता है यह बात बिल्कुल सही है और हमें इसका तर्क समझना होगा ग्राहक को जितनी महंगी चीज खरीदनी होती है उतना ही ज्यादा समय वह निर्णय लेने में लगाता है आप जितने समय में एक छोटा केलकुलेटर खरीद लेते हैं उतनी देर में कंप्यूटर नहीं खरीदते आप तो पेस्ट खरीदने में जितना समय लगाते हैं साइकिल खरीदने में उससे ज्यादा समय लगाते हैं कार खरीदने में उससे ज्यादा और मकान खरीदने में उससे भी ज्यादा जहां टूथपेस्ट खरीदने में 10 मिनट लगते हैं वहीं मकान में कुछ महीने या साल भी लग सकते हैं यह सिद्धांत जीवन बीमा पर भी लागू होता है बीमा एजेंट को लगता है कि ग्राहक 20000 का प्रीमियम देने में इतनी आनाकानी कर रहा है ग्राहक के लिए यह निर्णय 20000 का नहीं है यदि उसे 20000 की सालाना किश्त 20 साल तक देनी है तो उसके लिए यह निर्णय ₹400000 का है और इसके लिए वह तुरंत निर्णय नहीं ले सकता इस चर्चा से यह स्पष्ट है कि जीवन बीमा बेचने में ज्यादा समय और श्रम लगना स्वाभाविक ही है आपके लिए जो पॉलिसी 20000 की है वह ग्राहक के लिए चार लाख की है यदि ग्राहक को आप ऐसी पॉलिसी बेचते बेचते जिसमें उसे एक ही बार ₹20000 देना होता तो है निर्णय लेने में इतना समय नहीं लगा था क्योंकि तब उसके लिए यह 20000 की ही खरीद होती